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15 जून 2026 का पंचांग: इस दिन बन रहा अमावस्या, सोमवार व्रत और मिथुन संक्रांति का दुर्लभ संयोग, जानिए शुभ-अशुभ समय

नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। 15 जून 2026, सोमवार का दिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काफी खास माना जा रहा है। इस दिन अमावस्या तिथि, सोमवार व्रत और मिथुन संक्रांति जैसे कई योग एक साथ बन रहे हैं। इसके अलावा, दिनभर कुछ ऐसे शुभ समय भी रहेंगे जिन्हें पूजा-पाठ, दान और नए कामों की शुरुआत के लिए अच्छा माना जाता है। वहीं कुछ समय ऐसे भी हैं, जिनमें जरूरी काम करने से बचने की सलाह दी जाती है।
15 जून 2026 का पंचांग: इस दिन बन रहा अमावस्या, सोमवार व्रत और मिथुन संक्रांति का दुर्लभ संयोग, जानिए शुभ-अशुभ समय

नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। 15 जून 2026, सोमवार का दिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काफी खास माना जा रहा है। इस दिन अमावस्या तिथि, सोमवार व्रत और मिथुन संक्रांति जैसे कई योग एक साथ बन रहे हैं। इसके अलावा, दिनभर कुछ ऐसे शुभ समय भी रहेंगे जिन्हें पूजा-पाठ, दान और नए कामों की शुरुआत के लिए अच्छा माना जाता है। वहीं कुछ समय ऐसे भी हैं, जिनमें जरूरी काम करने से बचने की सलाह दी जाती है।

पंचांग के अनुसार, 15 जून को ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि सुबह 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। अमावस्या का दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों की याद में दान-पुण्य करते हैं। चूंकि यह दिन सोमवार का भी है, इसलिए इस दिन कई श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव पर जल अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

इस दिन एक और बड़ा ज्योतिषीय परिवर्तन देखने को मिलेगा। सूर्य दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। इस परिवर्तन को मिथुन संक्रांति कहा जाता है। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य का राशि परिवर्तन कई लोगों के जीवन और कार्यों पर असर डालता है। इसी वजह से इस दिन को खास माना जाता है।

चंद्रमा भी इस दिन अपनी राशि बदलेगा। सुबह 8 बजकर 40 मिनट तक चंद्रमा वृषभ राशि में रहेगा और इसके बाद मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। वहीं मृगशीर्षा नक्षत्र शाम 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद आद्रा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। ज्योतिष में नक्षत्रों को शुभ और अशुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस दिन दो शुभ योग बन रहे हैं। अमृतसिद्धि योग और सर्वार्थसिद्धि योग दोनों सुबह सूर्योदय से लेकर शाम 7 बजकर 8 मिनट तक रहेंगे। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इन योगों में किए गए शुभ कार्यों को सफलता मिलने की संभावना रहती है। नए कार्यों की शुरुआत, महत्वपूर्ण निर्णय, पूजा-पाठ और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए यह समय अनुकूल माना जाता है।

हालांकि दिन में कुछ अशुभ काल भी रहेंगे, जिनका ध्यान रखना जरूरी है। राहुकाल सुबह 7 बजकर 25 मिनट से 9 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड काल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा कुलिक काल दोपहर 2 बजकर 7 मिनट से 3 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इन समयों में नए और जरूरी कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत काल सुबह 11 बजकर 27 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 9 मिनट से 4 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जिसे पूजा-पाठ, ध्यान और भगवान का स्मरण करने के लिए बहुत अच्छा समय माना जाता है।

--आईएएनएस

पीके/पीएम

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