15-16 साल की लड़की रिश्ते में रह सकती है तो निकाह क्यों नहीं: साजिद रशीदी
नई दिल्ली, 27 सितंबर (आईएएनएस)। पॉक्सो मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले पर मौलाना साजिद रशीदी ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि 15-16 साल की लड़की के रिलेशनशिप में रहने को वैध माना जाता है, लेकिन अगर वही लड़की अपनी इच्छा से निकाह करना चाहे तो उसे अवैध क्यों माना जाए।
नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि जिस देश में लड़की-लड़की के साथ शादी जायज हो, लड़के-लड़के के साथ शादी जायज हो, उसमें हाईकोर्ट से यह उम्मीद कहीं नहीं की जा सकती कि वह वैध शादी को वैध ही माने। सवाल यह है कि 15-16 साल की लड़की रिलेशनशिप में रह सकती है, वह वैध है और वही 15-16 साल की लड़की अपनी मर्जी से अगर निकाह करना चाहे तो वह अवैध है। यह देश का दुर्भाग्य है।
कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे लोग बैठे हैं जो देश की सभ्यता और संस्कृति को समझने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश पर यूरोपीय संस्कृति थोपने की कोशिश की जा रही है। सवाल यह है कि लड़की 16 साल की उम्र में अपनी इच्छा से शादी करना चाहे तो कोर्ट कौन होता है उसकी शादी को अवैध करने वाला। यह एक बहुत बड़ा सवाल है जो समाज भी कोर्ट से पूछेगा।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर मौलाना ने कहा कि जो मुद्दई हैं, जिन पर असल दावा है, वही सरकारी गवाह बन गए, तो इससे ज्यादा और क्या हो सकता है? असल में जो करने वाले लोग हैं, उनको आपने सरकारी गवाह बना लिया। उन्होंने कहा कि अब दूसरे लोगों पर कार्रवाई होनी है या होगी, तो उनका मानना है कि या तो उन्होंने गुनाह अपने ऊपर ले लिया है या फिर उन्हें जान-बूझकर फंसाया गया है।
मौलाना साजिद रशीदी ने आरोप लगाया कि किसी व्यक्ति को बचाने के लिए उसे सरकारी गवाह बना दिया जाता है और इसके बाद वह कार्रवाई से बच जाता है। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ा एक षड्यंत्र होता है कि किसी को भी, जिसको बचाना हो, उसको सरकारी गवाह बना लिया जाए और फिर वह सेफ हो जाता है।
मौलाना ने चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि इन्हें बचाने के लिए सरकारी गवाह बनाए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई है, लेकिन देश की जनता सबकुछ देख रही है और इसका असर यूपी चुनाव 2027 में देखने को मिलेगा।
--आईएएनएस
डीकेएम/वीसी

