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13 साल सेना में रहे, कारगिल में लड़े और फिर बॉलीवुड में बनाई पहचान, कुछ ऐसी थी बिक्रमजीत की कहानी

13 साल सेना में रहे, कारगिल में लड़े और फिर बॉलीवुड में बनाई पहचान, कुछ ऐसी थी बिक्रमजीत की कहानी
13 साल सेना में रहे, कारगिल में लड़े और फिर बॉलीवुड में बनाई पहचान, कुछ ऐसी थी बिक्रमजीत की कहानी

मुंबई, 28 अगस्त (आईएएनएस)। बिक्रमजीत कंवरपाल उन एक्टर्स में रहे, जिनकी असली जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। पर्दे पर अक्सर पुलिस ऑफिसर, आर्मी ऑफिसर या किसी सख्त अधिकारी के रोल में नजर आने वाले बिक्रमजीत असल जिंदगी में भी भारतीय सेना का हिस्सा रह चुके थे। उन्होंने करीब 13 साल तक देश की सेवा की और मेजर के पद से रिटायर हुए लेकिन उनकी जिंदगी में एक सपना ऐसा था, जिसे उन्होंने कभी छोड़ा नहीं।

बिक्रमजीत को बचपन से ही एक्टिंग और फिल्मों का शौक था। सेना की नौकरी के दौरान भी उनके मन में बॉलीवुड में जाने की इच्छा बनी रही। आखिरकार 34 साल की उम्र में उन्होंने इस सपने को पूरा करने का फैसला किया।

बिक्रमजीत कंवरपाल का जन्म 29 अगस्त 1968 को हिमाचल प्रदेश के सोलन में हुआ था। उनका परिवार आर्मी से जुड़ा हुआ था। उनके पिता द्वारका नाथ कंवरपाल भी भारतीय सेना में अधिकारी थे और उन्हें 1963 में उनकी बहादुरी के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था। पढ़ाई के दिनों से ही उन्हें एक्टिंग में काफी दिलचस्पी थी और वह स्कूल के नाटकों में हिस्सा लेते थे। उनके दोस्त उन्हें प्यार से 'बिज' या 'बिजू' कहकर बुलाते थे।

बचपन में फिल्मों का सपना देखने वाले बिक्रमजीत ने आगे चलकर 1989 में भारतीय सेना ज्वाइन कर ली। उन्होंने सेना में करीब 13 साल काम किया। इस दौरान उनकी पोस्टिंग अलग-अलग जगहों पर हुई और वह कारगिल युद्ध का भी हिस्सा रहे। उनकी बचपन की दोस्त वंदना शाह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कारगिल युद्ध के बाद बिक्रमजीत ने उनसे कहा था कि वह अब फिल्मों में जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि ड्यूटी के दौरान उन्होंने मौत को बहुत करीब से देखा है और जिंदगी बहुत छोटी है, इसलिए इंसान को अपने सपने पूरे करने चाहिए। यही सोच उनके बॉलीवुड जाने के फैसले की बड़ी वजह बनी।

सेना से रिटायर होने के बाद बिक्रमजीत ने अपने पुराने सपने का पीछा किया। साल 2002 में मुंबई के खार इलाके में उनकी मुलाकात पूजा भट्ट से हुई और इसके बाद उन्हें फिल्म 'पाप' में काम करने का मौका मिला। साल 2003 में रिलीज हुई इस फिल्म से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों में कई तरह के रोल मिलने लगे। उनकी लंबी कद-काठी, आवाज और गंभीर अंदाज की वजह से डायरेक्टर्स उन्हें अक्सर पुलिस, सेना, अधिकारी या किसी ताकतवर शख्स के किरदार में पसंद करते थे।

बिक्रमजीत ने 'पेज 3', 'कॉरपोरेट', 'डॉन', 'रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर', 'मर्डर 2', 'जब तक है जान', 'शौर्य', '1971', 'द गाजी अटैक' और 'क्रिएचर 3डी' जैसी फिल्मों में काम किया। 'डॉन' में उन्होंने डॉ. अशोक खिलवानी और 'मर्डर 2' में कमिश्नर अहमद खान का रोल निभाया। वह सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहे बल्कि टीवी और ओटीटी पर भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई। '24', 'स्पेशल ऑप्स', 'अदालत', 'रिपोर्टर्स', 'भौकाल' और 'योर ऑनर' जैसे प्रोजेक्ट्स में उन्हें देखा गया।

बिक्रमजीत कंवरपाल का निधन 1 मई 2021 को कोरोना संक्रमण से जुड़ी परेशानियों के कारण हुआ। वह उस समय 52 साल के थे। उनके निधन की खबर से फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई थी।

--आईएएनएस

पीके/पीएम

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