मानसिक रूप से बीमार बच्ची को उसके माता पिता ने सड़कों पर छोड़ा, NGO वाले बने सहारा, Video
एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां मानसिक रूप से बीमार एक बच्ची को उसके ही माता‑पिता ने सड़कों पर छोड़ दिया। यह मामला न केवल परिवार और समाज की जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों के अधिकारों की अनदेखी की तस्वीर भी सामने लाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बच्ची को पहले अकेला देखा गया था, वह भय और असहायता में सड़क पर घूम रही थी। आसपास के लोग उसकी मदद के लिए आगे आए, लेकिन जैसे ही स्थिति गंभीर हुई, स्थानीय NGO के सदस्य मौके पर पहुंचे और बच्ची को सुरक्षित स्थान पर ले गए।
NGO के प्रतिनिधियों ने बताया कि बच्ची मानसिक रूप से बीमार है और उसे नियमित देखभाल की आवश्यकता है। फिलहाल बच्ची को NGO की देखभाल में सुरक्षित रखा गया है, जहां उसके इलाज और भोजन की व्यवस्था की गई है। उन्होंने प्रशासन और समाज से अपील की है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों को गंभीरता से लिया जाए और किसी भी बच्चे को छोड़ने जैसी घटना न हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए परिवार और समाज की जिम्मेदारी बेहद अहम होती है। ऐसे बच्चों को उपेक्षा या त्याग का सामना करना पड़ना उनकी स्थिति को और गंभीर बना सकता है। सामाजिक जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी इस तरह की घटनाओं का कारण बन सकती है।
पुलिस ने भी मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि बच्ची के माता‑पिता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि बच्ची के कल्याण के लिए कोर्ट में मामले की सुनवाई करायी जाएगी और माता‑पिता की लापरवाही की गंभीरता से जांच की जाएगी।
स्थानीय समाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि केवल NGO और प्रशासन की मदद ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार और समुदाय को बच्चों और मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील होना होगा।
इस घटना ने समाज को एक चेतावनी दी है कि मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों के अधिकारों की अनदेखी कितनी खतरनाक हो सकती है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई, सामाजिक जागरूकता और जिम्मेदार परिवार की भूमिका ही बच्चों के सुरक्षित और स्वस्थ जीवन की गारंटी बन सकती है।

