वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पीजी हिन्दी विभाग में “राही मासूम रजा का रचना संसार : एक अनुशीलन” विषय पर व्याख्यान आयोजित
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पीजी हिन्दी विभाग में “राही मासूम रजा का रचना संसार : एक अनुशीलन” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं हिन्दी साहित्य के अध्येताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। व्याख्यान का उद्देश्य प्रसिद्ध साहित्यकार राही मासूम रजा के साहित्यिक अवदान, उनकी वैचारिक दृष्टि और रचनात्मक संसार को समझना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापकों द्वारा अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। वक्ताओं ने राही मासूम रजा के साहित्य को भारतीय समाज की वास्तविक तस्वीर बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में गांव, समाज, राजनीति, सांप्रदायिकता और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत चित्रण देखने को मिलता है।
व्याख्यान के दौरान वक्ताओं ने कहा कि राही मासूम रजा केवल एक उपन्यासकार ही नहीं, बल्कि भारतीय समाज की जटिलताओं को समझने वाले संवेदनशील लेखक थे। उनका प्रसिद्ध उपन्यास “आधा गांव” आज भी ग्रामीण भारत की सामाजिक संरचना और बदलते परिवेश का सशक्त दस्तावेज माना जाता है। वहीं “टोपी शुक्ला” जैसी रचनाएं सामाजिक और सांप्रदायिक प्रश्नों पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करती हैं।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि राही मासूम रजा ने साहित्य के साथ-साथ फिल्म और टेलीविजन जगत में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। लोकप्रिय टीवी धारावाहिक “महाभारत” के संवाद लेखन में उनकी भूमिका को आज भी याद किया जाता है। उनके लेखन में भारतीयता, मानवीय मूल्यों और सामाजिक चेतना की गहरी छाप दिखाई देती है।
कार्यक्रम में शोधार्थियों ने भी राही मासूम रजा की विभिन्न रचनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने उनके साहित्य को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि उनकी रचनाएं समाज को सोचने और आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित करती हैं।
व्याख्यान के अंत में विभाग की ओर से सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम को हिन्दी साहित्य और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।

