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Munawwar Rana Shayari: देश के सबसे मशहूर शायरों में शामिल मुनव्वर राना की लिखी कुछ सबसे चुनिंदा शायरी

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कभी ख़ुशी से, ख़ुशी की तरफ नहीं देखा, तुम्हारे बाद, फिर किसी की तरफ नहीं देखा, ये सोच कर कि तेरा इंतजार लाज़िम है, तमाम उम्र घडी की तरफ नहीं देखा।।

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मैं इसके नाज़ उठाता हूँ, सो ये ऐसा नहीं करती, ये मिट्टी मेरे हाथों को कभी मैला नहीं करती, खिलौनों की दुकानों की तरफ से आप क्यों गुज़रे, ये बच्चे की तमन्ना है, ये समझौता नहीं करती।।

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तो अब इस गांव से रिश्ता हमारा ख़त्म होता है, फिर आँखें खोल ली जाये, की सपना ख़त्म होता है।।

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ज़िंदगी!! तू कब तलक दर-दर फिराएगी हमें, टूटा फूटा ही सही, घर बार होना चाहिए।।

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हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं, जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं।।

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नये कमरों में अब चीजें पुरानी कौन रखता है, परिंदों के लिए शहरों में पानी कौन रखता है।।

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किसी को घर मिला हिस्से में, या कोई दुकां आई, मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से में माँ आई।।

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ये ऐसा कर्ज है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता, मैं जब तक घर न लौटूं माँ मेरी सजदे में रहती है।।

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बर्बाद कर दिया हमें परदेश ने मगर, माँ सबसे कह रही है कि बेटा मज़े में है।।

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कभी ख़ुशी से ख़ुशी की तरफ़ नहीं देखा, तुम्हारे बाद किसी की तरफ़ नहीं देखा, ये सोच कर कि तेरा इंतज़ार लाज़िम है, तमाम उम्र घड़ी की तरफ़ नहीं देखा

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यह एहतराम तो करना ज़रूर पड़ता है, जो तू ख़रीदे तो बिकना ज़रूर पड़ता है !!!

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