Mahadevi Verma Poetry: छायावादी आंदोलन की कवयित्री महादेवी वर्मा की कुछ सबसे मशहूर कवितायेँ
महादेवी वर्मा की संपूर्ण काव्य-यात्रा न सिर्फ आधुनिक हिंदी कविता का इतिहास बनने की साक्षी हैं, बल्कि भारतीय महिमा का भी जीवंत प्रतीक है. उनकी कविताएं हिंदी साहित्य की एक सार्थक कालजयी उपलब्धि हैं. छायावाद की इस कवयित्री की हिंदी साहित्य में अपनी एक अनूठी पहचान है. आप भी पढ़ें उनके काव्य-संग्रह ‘आत्मिका’ से कुछ चुनिंदा कविताएं. इस किताब में महादेवी वर्मा की वे रचनाएं संग्रहीत हैं, जो उनकी जीवन-दृष्टि, दर्शन, सौन्दर्यबोध और काव्य-दृष्टि का परिचय देती हैं. आत्मिका को ‘राजपाल प्रकाशन’ ने प्रकाशित किया है, जिसके कई संस्करण प्रकाशित हुए, आईये पढ़े इनकी कुछ सबसे मशहूर कवितायेँ....
मेरे गीले नयन
प्रिय मेरे गीले नयन बनेंगे आरती!
श्वास में सपने कर गुम्फित,
बंदनवार वेदना-चर्चित,
भर दुख से जीवन का घट नित
मूक क्षणों में मधुर भरूंगी भारती!दृग मेरे दो दीपक झिलमिल,
भर आंसू का स्नेह रहा ठुल,
सुधि तेरी अविराम रही जल,
पद-ध्वनि पर आलोग रहूंगी वारती!यह लो प्रिय! निधियोंमय जीवन,
जग अक्षय स्मृतियों का धन,
सुख-सोना करुणा-हीरक-कण,
तुमझे जीता आज तुम्हीं को हारती!
सन्देह
बहती जिस नक्षत्रलोक में
निद्रा के श्वासों से बात,
रजतरश्मियों के तारों पर
बेसुध सी गाती है रात!अलसाती थीं लहरें पीकर
मधुमिश्रित तारों की ओस,
भरतीं थीं सपने गिन गिनकर
मूक व्यथायें अपने कोप।दूर उन्हीं नीलमकूलों पर
पीड़ा का ले झीना तार,
उच्छ्वासों की गूँथी माला
मैनें पाई थी उपहार!यह विस्मॄति है या सपना वह
या जीवन विनिमय की भूल!
काले क्यों पड़ते जाते हैं
माला के सोने से फूल?
अधिकार
वे मुस्काते फूल, नहीं
जिनको आता है मुर्झाना,
वे तारों के दीप, नहीं
जिनको भाता है बुझ जाना;वे नीलम के मेघ, नहीं
जिनको है घुल जाने की चाह
वह अनन्त रितुराज,नहीं
जिसने देखी जाने की राह|वे सूने से नयन,नहीं
जिनमें बनते आँसू मोती,
वह प्राणों की सेज,नही
जिसमें बेसुध पीड़ा सोती;ऐसा तेरा लोक, वेदना
नहीं,नहीं जिसमें अवसाद,
जलना जाना नहीं, नहीं
जिसने जाना मिटने का स्वाद!क्या अमरों का लोक मिलेगा
तेरी करुणा का उपहार?
रहने दो हे देव! अरे
यह मेरा मिटने का अधिकार!

