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Jaun Elia Poetry in Hindi: मशहूर उर्दू शायर जॉन एलिया की कुछ सबसे मशहूर शेर 

Jaun Elia Poetry in Hindi: मशहूर उर्दू शायर जॉन एलिया की कुछ सबसे मशहूर शेर 

सादा, लेकिन तीखी तराशी और चमकाई हुई ज़बान में निहायत गहरी और शोर अंगेज़ बातें कहने वाले हफ़्त ज़बान शायर, पत्रकार, विचारक, अनुवादक, गद्यकार, बुद्धिजीवी और स्व-घोषित नकारात्मकतावादी और अनारकिस्ट जौन एलिया एक ऐसे ओरिजनल शायर थे जिनकी शायरी ने न सिर्फ उनके ज़माने के अदब नवाज़ों के दिल जीत लिए बल्कि जिन्होंने अपने बाद आने वाले अदीबों और शायरों के लिए ज़बान-ओ-बयान के नए मानक निर्धारित किए। जौन एलिया ने अपनी शायरी में इश्क़ की नई दिशाओं का सुराग़ लगाया। वो बाग़ी, इन्क़िलाबी और परंपरा तोड़ने वाले थे लेकिन उनकी शायरी का लहजा इतना सभ्य, नर्म और गीतात्मक है कि उनके अशआर में मीर तक़ी मीर के नश्तरों की तरह सीधे दिल में उतरते हुए श्रोता या पाठक को फ़ौरी तौर पर उनकी कलात्मक विशेषताओं पर ग़ौर करने का मौक़ा ही नहीं देते। मीर के बाद यदा-कदा नज़र आने वाली तासीर की शायरी को निरंतरता के साथ नई गहराईयों तक पहुंचा देना जौन एलिया का कमाल है। अपनी निजी ज़िंदगी में जौन एलिया की मिसाल उस बच्चे जैसी थी जो कोई खिलौना मिलने पर उससे खेलने की बजाए उसे तोड़ कर कुछ से कुछ बना देने की धुन में रहता है, अपनी शायरी में उन्होंने इस रवय्ये का इज़हार बड़े सलीक़े से किया है। जौन एलिया कम्युनिस्ट होने के बावजूद कला कला के लिए के क़ाइल थे। उन्होंने रूमानी शायरी से दामन बचाते हुए, ताज़ा बयानी के साथ दिलों में उतर जाने वाली इश्क़िया शायरी की। अहमद नदीम क़ासमी के अनुसार, “जौन एलिया अपने समकालीनों से बहुत अलग और अनोखे शायर हैं। उनकी शायरी पर यक़ीनन उर्दू, फ़ारसी, अरबी शायरी की छूट पड़ रही है मगर वो उनकी परम्पराओं का इस्तेमाल भी इतने अनोखे और रसीले अंदाज़ में करते हैं कि बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में होने वाली शायरी में उनकी आवाज़ निहायत आसानी से अलग पहचानी जाती है।”  उर्दू शायरी की तीन सौ वर्षों के इतिहास में शायद ही किसी ने इस लहजा, इस अर्थ की, इस नशतरियत से परिपूर्ण शे’र कहे होंगे। जौन एलिया के यहां विभिन्न प्रकार के रंग और नए आलेख व विषय हैं जो उर्दू ग़ज़ल की रिवायत में नया दर खोलते हैं और परम्परा से विद्रोह के रूप में भी अलग हैसियत रखते हैं। उनकी नज़्में भी विषयगत न हो कर संवेदनशील हैं।

कौन इस घर की देखभाल करे,
रोज़ एक चीज़ टूट जाती है!

जो गुजारी न जा सकी हमसे,
हमने वो जिंदगी गुजारी है!

उस गली ने यह सुन के सब्र किया,
जाने वाले यहां के थे ही नहीं!

यह मुझे चैन क्यों नहीं पड़ता,
एक ही शख्स था जहान में क्या?

एक गली थी जब उससे हम निकले,
ऐसे निकले की जैसे दम निकले!

तू मुझे ढूंढ मैं तुझे ढूंढू,
कोई हममें से रह गया है कहीं!

मैं रहा उम्र भर जुदा खुद से,
याद मैं खुद को उम्र भर आया!

अब मेरी कोई जिंदगी ही नहीं,
अब भी तुम मेरी जिंदगी हो क्या?

एक ही तो हवस रही है हमें,
अपनी हालत ख़राब की जाए!

काम की बात मैंने की ही नहीं,
यह मेरा तौर ए ज़िंदगी ही नहीं!

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