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Iqbal Azeem Shayari: पढ़ें मशहूर शायर और ग़ज़लकार इक़बाल अज़ीम के क्लासिक शेर

यूँ सर-ए-राह मुलाक़ात हुई है अक्सर, उस ने देखा भी नहीं हम ने पुकारा भी नहीं

ग़ज़ल पढ़ने वाले और उसमें रुची रखने वाले यकीनन इक़बाल अज़ीम का नाम जानते ही होंगे. वहशत रज़ा अली कलकत्वी के शागिर्द अज़ीम का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ में 8 जुलाई, 1913 में हुआ था. साहित्य के जानकारों के मुताबिक इक़बाल की ग़ज़लों में जिंदगी की सच्चाई झलकती है. तो आईये आज पढ़ें उनके लिखे चुनिंदा शेर...

ग़ज़ल पढ़ने वाले और उसमें रुची रखने वाले यकीनन इक़बाल अज़ीम का नाम जानते ही होंगे. वहशत रज़ा अली कलकत्वी के शागिर्द अज़ीम का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ में 8 जुलाई, 1913 में हुआ था. साहित्य के जानकारों के मुताबिक इक़बाल की ग़ज़लों में जिंदगी की सच्चाई झलकती है. तो आईये आज पढ़ें उनके लिखे चुनिंदा शेर

ज़माना देखा है हम ने हमारी क़द्र करो,हम अपनी आँखों में दुनिया बसाए बैठे हैं 

ग़ज़ल पढ़ने वाले और उसमें रुची रखने वाले यकीनन इक़बाल अज़ीम का नाम जानते ही होंगे. वहशत रज़ा अली कलकत्वी के शागिर्द अज़ीम का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ में 8 जुलाई, 1913 में हुआ था. साहित्य के जानकारों के मुताबिक इक़बाल की ग़ज़लों में जिंदगी की सच्चाई झलकती है. तो आईये आज पढ़ें उनके लिखे चुनिंदा शेर

हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलते, अब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते

ग़ज़ल पढ़ने वाले और उसमें रुची रखने वाले यकीनन इक़बाल अज़ीम का नाम जानते ही होंगे. वहशत रज़ा अली कलकत्वी के शागिर्द अज़ीम का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ में 8 जुलाई, 1913 में हुआ था. साहित्य के जानकारों के मुताबिक इक़बाल की ग़ज़लों में जिंदगी की सच्चाई झलकती है. तो आईये आज पढ़ें उनके लिखे चुनिंदा शेर

अब हम भी सोचते हैं कि बाज़ार गर्म है, अपना ज़मीर बेच के दुनिया ख़रीद लें

ग़ज़ल पढ़ने वाले और उसमें रुची रखने वाले यकीनन इक़बाल अज़ीम का नाम जानते ही होंगे. वहशत रज़ा अली कलकत्वी के शागिर्द अज़ीम का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ में 8 जुलाई, 1913 में हुआ था. साहित्य के जानकारों के मुताबिक इक़बाल की ग़ज़लों में जिंदगी की सच्चाई झलकती है. तो आईये आज पढ़ें उनके लिखे चुनिंदा शेर

अपनी मिट्टी ही पे चलने का सलीक़ा सीखो, संग-ए-मरमर पे चलोगे तो फिसल जाओगे

ग़ज़ल पढ़ने वाले और उसमें रुची रखने वाले यकीनन इक़बाल अज़ीम का नाम जानते ही होंगे. वहशत रज़ा अली कलकत्वी के शागिर्द अज़ीम का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ में 8 जुलाई, 1913 में हुआ था. साहित्य के जानकारों के मुताबिक इक़बाल की ग़ज़लों में जिंदगी की सच्चाई झलकती है. तो आईये आज पढ़ें उनके लिखे चुनिंदा शेर

यूँ सर-ए-राह मुलाक़ात हुई है अक्सर, उस ने देखा भी नहीं हम ने पुकारा भी नहीं

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