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Firaq Gorakhpuri Shayari: देश के मशहूर शायरों में शुमार फ़िराक़ गोरखपुरी की जोश और अनबन से भरी शायरी 

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रमेश चंद्र द्विवेदी जी ने अपने एक मज़मून में लिखा है कि फ़िराक़ साहब जीते-जी अफ़साना बन चुके थे। उनके साथ कई कहानियाँ मंसूब हो गई थीं जिनका कोई सर-पाँव तो नहीं था लेकिन उनसे मानूस हर शख़्स था। ऐसा ही एक क़िस्सा यूँ है कि उन्हें ‘हिन्दोस्तान का स्पॉइलट जीनियस’ (Spoilt Genius) क़रार दिया गया और ये बाद में ये फ़िक़रा गांधी जी से मंसूब कर दिया गया। हालाँकि फ़िराक़ साहब स्पॉइलट तो नहीं, मगर बिला-शुबा एक जीनियस तो ज़रूर थे। एक ग़ज़ल-गो शाइर के तौर पर उनके कारनामों से हर शख़्स वाक़िफ़ है। अफ़सानों में उनका जौहर ‘नौ-रत्न’ में देखा ही जा सकता है। उनकी तन्क़ीदी किताबों की भी एक लंबी फ़ेहरिस्त है मसलन ‘उर्दू की इश्क़िया शाइरी’, ‘उर्दू ग़ज़लगोई’ और ‘नज़ीर की बानी’ वग़ैरह। उनके सियासी शऊर की शिनाख़्त उनकी किताब ‘हमारा सबसे बड़ा दुश्मन’ पढ़ के हो जाती है। फ़िराक़ साहब की शख़्सियत और तख़लीक़ात के मुख़्तलिफ़ पहलुओं पर गाहे-गाहे गुफ़्तगू होती ही रहती है। लेकिन जो काम फ़िराक़ साहब ने रुबाई के मैदान में किया है, उसकी दूसरी मिसाल ढूँढ पाना ना-मुमकिन है, तो आईये पढ़ें इनकी लिखी कुछ सबसे मशहूर शायरियां...

हज़ार बार ली तुमने तलाशी मेरे दिल की,
बताओ कभी कुछ मिला इसमें प्यार के सिवा..??

खत्म हो गई कहानियां मेरे अंदाजे से पहले,
जला दिया गया मेरा दिल मेरे जनाजे से पहले..!!

यकीनन तुम भी ये मुक्कमल जहाँ भी शमशान होता,
जान! तुम्हारा इश्क़ भी समझ आता अगर आसान होता ..!!

लिखना तो था कि हम खुश हैं उसके बिना,
मगर आंसू निकल पड़े कलम उठाने से पहले..!!

रास्ते कभी खत्म नहीं होते रिश्ते खत्म हो जाते है… ।
अनजानी राहों पे चलते चलते कई अनजाने मिल जाते है…. ||

एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं.!

रफ्ता रफ्ता गैर अपनी ही नज़र में हो गए
वाह-री गफलत तुझे अपना समझ बैठे थे हम.!

कर पाओ तो कर लेना कीही हमारी सादगी से
क्योंकि सूरत कुछ खास नहीं हमारी ।

ये माना जिंदगी है चार दिन की
बहुत होते हैं यारों चार दिन भी।

रात भी नींद भी कहानी भी
हाय क्या चीज़ है जवानी भी..।

खामोश शहर की चीखती रातें,
सब चुप है पर, कहने को है हजार बातें… !

सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई
देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ.!

एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं.!

मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है
अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है।

बहुत पहले से उन कदमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ जिन्दगी, हम दूर से पहचान लेते हैं.

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