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पानी के स्लो प्रेशर से हैं परेशान? प्लंबर को बुलाने से पहले आजमाएं यह आसान हैक, नलों में आएगा तेज बहाव

पानी के स्लो प्रेशर से हैं परेशान? प्लंबर को बुलाने से पहले आजमाएं यह आसान हैक, नलों में आएगा तेज बहाव

कई घरों में नल से पानी बहुत धीमी गति से आता है। खासकर जब ओवरहेड टंकी से पानी सप्लाई होता है, तो ऊपर की मंजिलों या बाथरूम और किचन तक पहुंचते-पहुंचते पानी का फ्लो कम महसूस हो सकता है। इससे रोजमर्रा के कामों में ज्यादा समय लगता है और लोगों को परेशानी भी होती है।

अगर आपके घर में भी टंकी से पानी का प्रेशर कम है, तो पाइपलाइन की डिजाइन और पाइप के साइज पर ध्यान देना जरूरी है। सही साइज की पाइप, कम मोड़ और उचित फिटिंग पानी के फ्लो को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, सिर्फ पाइप मोटी करने से हर स्थिति में प्रेशर नहीं बढ़ता। टंकी की ऊंचाई और पाइपलाइन की लंबाई भी काफी मायने रखती है।

टंकी के आउटलेट पर रखें बड़ी पाइप

ओवरहेड टंकी से निकलने वाली मुख्य पाइप का साइज पर्याप्त रखना उपयोगी हो सकता है। घरेलू पाइपलाइन में जरूरत के हिसाब से 1 से 1.5 इंच की CPVC या UPVC पाइप इस्तेमाल की जा सकती है।

इसके बाद जैसे-जैसे पाइप अलग-अलग कमरों या बाथरूम की तरफ जाती है, वहां जरूरत के अनुसार रिड्यूसर लगाकर पाइप का साइज कम किया जा सकता है। उदाहरण के लिए मुख्य लाइन 1.5 इंच की हो और आगे किसी शाखा में 1 इंच या 3/4 इंच पाइप की जरूरत हो तो उचित रिड्यूसर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

बाथरूम और किचन के लिए पाइप का साइज

बाथरूम और किचन की अलग-अलग सप्लाई लाइन के लिए आमतौर पर 3/4 इंच पाइप इस्तेमाल की जाती है। हालांकि, सही साइज घर की पाइपलाइन, नलों की संख्या और पानी की जरूरत के अनुसार तय किया जाना चाहिए।

बहुत छोटी पाइप को मुख्य लाइन में लगाने से पानी के फ्लो में रुकावट आ सकती है। इसलिए पूरी पाइपलाइन में शुरुआत से ही बहुत छोटा पाइप लगाने के बजाय जरूरत के अनुसार साइज कम करना बेहतर हो सकता है।

लोहे की पाइप की जगह CPVC या UPVC

पुरानी लोहे की पाइप में समय के साथ जंग और अंदर जमा होने वाली गंदगी के कारण पानी के रास्ते में रुकावट आ सकती है। इससे पानी का फ्लो प्रभावित हो सकता है।

इसी वजह से घरेलू पानी की लाइन में अच्छी क्वालिटी की CPVC या UPVC पाइप का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि पाइप का चुनाव पानी के तापमान, इस्तेमाल और स्थानीय प्लंबिंग मानकों के अनुसार करना चाहिए।

पाइप में ज्यादा मोड़ न रखें

पानी की पाइपलाइन में बहुत ज्यादा मोड़ होने पर फ्लो में अतिरिक्त रुकावट पैदा हो सकती है। खासकर कई 90 डिग्री एल्बो लगातार लगाने से बचना उपयोगी हो सकता है।

जहां डिजाइन अनुमति दे, वहां 45 डिग्री फिटिंग या लॉन्ग-रेडियस बेंड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पाइपलाइन में पानी के प्रवाह को अपेक्षाकृत सुचारू रखने में मदद मिल सकती है।

एयर लॉक की समस्या भी जांचें

कभी-कभी पाइपलाइन में हवा फंस जाने से भी पानी का फ्लो प्रभावित हो सकता है। इसे एयर लॉक कहा जाता है। अगर नल से पानी रुक-रुककर आ रहा है या अचानक फ्लो बहुत कम हो गया है, तो पाइपलाइन में एयर लॉक की संभावना भी जांची जा सकती है।

ऐसी स्थिति में एयर वेंट या उचित वेंटिंग सिस्टम की जरूरत पड़ सकती है। इसे बिना प्लंबिंग विशेषज्ञ की सलाह के खुद से लगाने के बजाय पाइपलाइन की स्थिति देखकर तय करना बेहतर है।

टंकी के आउटलेट की जगह भी महत्वपूर्ण

टंकी के अंदर नीचे की तरफ मिट्टी, गाद या दूसरी गंदगी जमा हो सकती है। इसलिए आउटलेट को बिल्कुल तल पर रखने के बजाय टंकी के निचले हिस्से से थोड़ा ऊपर रखना उपयोगी हो सकता है।

कुछ घरेलू पाइपलाइन डिजाइनों में आउटलेट को टंकी के तल से करीब 2 से 2.5 इंच ऊपर रखा जाता है, ताकि नीचे जमा गाद सीधे पाइपलाइन में जाने की संभावना कम हो।

सिर्फ मोटी पाइप लगाने से नहीं बढ़ेगा हर बार प्रेशर

यह बात समझना जरूरी है कि पानी का प्रेशर केवल पाइप के साइज पर निर्भर नहीं करता। टंकी की ऊंचाई, पानी के स्रोत का प्रेशर, पाइप की लंबाई, पाइप में मोड़, फिटिंग और नल की स्थिति भी पानी के फ्लो को प्रभावित करती है।

अगर टंकी बहुत कम ऊंचाई पर है, तो केवल 1.5 इंच की पाइप लगाने से बहुत ज्यादा प्रेशर मिलने की गारंटी नहीं है। ऐसे मामलों में प्लंबर से पूरी पाइपलाइन की जांच करवाना बेहतर रहेगा।

इसलिए घर में पानी का फ्लो कम होने पर पाइप बदलने से पहले यह पता करना जरूरी है कि समस्या टंकी की ऊंचाई, पाइपलाइन में जाम, एयर लॉक, ज्यादा मोड़ या किसी अन्य कारण से तो नहीं है।

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