NPS और अटल पेंशन योजना में जबरदस्त ग्रोथ, करोड़ों लोगों ने चुना ये भरोसेमंद रिटायरमेंट प्लान
साल का वही समय फिर आ गया है जब सैलरीड लोग अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की तैयारी शुरू करते हैं। जल्द ही आपके नियोक्ता (Employer) से फॉर्म 16 मिलने वाला है, जो आपके टैक्स फाइलिंग के लिए जरूरी होगा। फॉर्म 16 प्राप्त करने के बाद, हम में से अधिकतर लोग अपने डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा करना और टैक्स कैलकुलेट करना शुरू कर देते हैं।
लेकिन अगर आपने पहले फाइनेंशियल ईयर के दौरान अपने नियोक्ता से कहा था कि आप ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) को चुनेंगे, और अब अपनी इनकम और डिडक्शन चेक करने के बाद आपको लग रहा है कि न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) ज्यादा फायदेमंद है, तो क्या आप इसे बदल सकते हैं? आइए विस्तार से समझते हैं।
क्या ITR फाइल करते समय टैक्स रिजीम बदल सकते हैं?
जी हां, आयकर नियमों के मुताबिक, सैलरीड व्यक्ति अपना ITR दाखिल करते समय टैक्स रिजीम बदल सकते हैं। चाहे आपने वित्तीय वर्ष के दौरान TDS कटौती के लिए कोई भी टैक्स रिजीम चुनी हो, रिटर्न फाइल करते समय आपके पास अपनी पसंद बदलने का पूरा अधिकार होता है।
मतलब, अगर आपने पुराने टैक्स रिजीम (Old Regime) के तहत टैक्स कटवाया है लेकिन अब आपको नया टैक्स रिजीम (New Regime) बेहतर लग रहा है, तो आप ITR फाइल करते समय नई रिजीम अपना सकते हैं। इसी तरह, जो लोग नए टैक्स रिजीम के तहत टैक्स दे रहे थे, वे भी चाहें तो रिटर्न फाइल करते समय पुरानी टैक्स रिजीम में स्विच कर सकते हैं।
नए इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म में बदलाव
नई व्यवस्था के अनुसार, इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म डिफॉल्ट रूप से नए टैक्स रिजीम के आधार पर होता है। जब आप ITR भरते हैं, तो फॉर्म आपसे पूछता है कि क्या आप सेक्शन 115BAC के तहत 'बाहर निकलना' चाहते हैं?
यदि आप 'हां' चुनते हैं, तो आप पुरानी टैक्स रिजीम (Old Regime) के तहत अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। अगर आप 'नहीं' का ऑप्शन चुनते हैं, तो आपकी फाइलिंग नए टैक्स रिजीम (New Regime) के तहत ही की जाएगी।
सेक्शन 115BAC दरअसल आयकर अधिनियम का वह भाग है जो नई टैक्स रिजीम के तहत टैक्स स्लैब और नियमों को तय करता है। इसमें टैक्स दरें कम हैं लेकिन अधिकतर डिडक्शंस और छूट (जैसे 80C, HRA, LTA आदि) समाप्त कर दी गई हैं।
समयसीमा का ध्यान रखना जरूरी
यह समझना बहुत जरूरी है कि आप टैक्स रिजीम का बदलाव तभी कर सकते हैं जब आप अपना ITR तय समयसीमा के भीतर दाखिल करें। यदि आप ड्यू डेट के बाद रिटर्न फाइल करते हैं यानी देर से रिटर्न फाइल करते हैं, तो आपके पास पुरानी टैक्स रिजीम चुनने का विकल्प नहीं रहेगा।
ऐसे मामलों में ITR डिफॉल्ट रूप से नई टैक्स रिजीम के अनुसार प्रोसेस किया जाएगा और आप चाहकर भी स्विच नहीं कर पाएंगे।
ITR फाइल करने की डेडलाइन
ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस प्रकार के टैक्सपेयर हैं। आमतौर पर:
-
व्यक्तियों, HUFs, AOPs, BOIs जिनके खातों का ऑडिट नहीं होता, उनके लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई 2025 है।
-
जिन बिजनेसमैन, फर्मों और कंपनियों को अकाउंट्स का ऑडिट कराना होता है, उनके लिए अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2025 है।
-
अगर आपका इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन है और आप सेक्शन 92E के तहत आते हैं, तो आपके लिए अंतिम तिथि 30 नवंबर 2025 है।
अगर आप इन डेडलाइनों को मिस कर देते हैं, तो आप 31 दिसंबर 2025 तक लेट फाइन के साथ बिलेटेड ITR दाखिल कर सकते हैं। इसके अलावा, चौथे असेसमेंट वर्ष के 31 मार्च तक अपडेटेड रिटर्न भी फाइल किया जा सकता है।
ऑडिटेड अकाउंट्स के लिए ऑडिट रिपोर्ट 30 सितंबर तक सबमिट करनी होती है, ताकि ITR 31 अक्टूबर तक भरा जा सके।
ध्यान देने योग्य बातें
-
समय पर फाइलिंग: टैक्स रिजीम बदलने का ऑप्शन सिर्फ तभी मिलेगा जब आप समय पर रिटर्न दाखिल करेंगे। ड्यू डेट मिस होने पर पुरानी टैक्स रिजीम चुनने का मौका नहीं मिलेगा।
-
सही आकलन करें: ITR फाइल करने से पहले सावधानीपूर्वक आकलन करें कि कौन सी टैक्स रिजीम आपके लिए फायदेमंद रहेगी। डिडक्शंस, छूट और टैक्स लायबिलिटी की तुलना करें।
-
समय पर डॉक्यूमेंट तैयार रखें: फॉर्म 16, इन्वेस्टमेंट प्रूफ्स, लोन सर्टिफिकेट्स और अन्य जरूरी दस्तावेज समय रहते जुटा लें ताकि अंतिम समय में कोई परेशानी न हो।
निष्कर्ष
अगर आप चाहते हैं कि टैक्स बचत के साथ-साथ प्रोसेस भी आसान हो, तो ITR दाखिल करने से पहले सही टैक्स रिजीम का चुनाव करें। समय सीमा का विशेष ध्यान रखें और जल्द से जल्द अपना रिटर्न फाइल करें। याद रखें, सही निर्णय और समय पर फाइलिंग से आप न केवल टैक्स में बचत कर सकते हैं, बल्कि भविष्य में पेनल्टी और अन्य कानूनी समस्याओं से भी बच सकते हैं।

