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डॉग के साथ होटल पहुंचा परिवार, नहीं मिली एंट्री, ट्रैवल एजेंसी को चुकानी पड़ी बड़ी कीमत, जानें पूरा मामला
 

डॉग के साथ होटल पहुंचा परिवार, नहीं मिली एंट्री, ट्रैवल एजेंसी को चुकानी पड़ी बड़ी कीमत, जानें पूरा मामला


पालतू डॉग आज कई परिवारों का अहम हिस्सा बन चुका है और लोग यात्रा के दौरान भी उसे अपने साथ ले जाना पसंद करते हैं। लेकिन अगर ट्रैवल पैकेज बुक करते समय पेट-फ्रेंडली होटल की पुष्टि न की जाए, तो परेशानी खड़ी हो सकती है। हरियाणा के एक परिवार के साथ भी ऐसा ही हुआ। दार्जिलिंग-गंगटोक यात्रा के दौरान होटल में डॉग के साथ ठहरने की अनुमति नहीं मिलने पर परिवार को काफी परेशानी और अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां ट्रैवल एजेंसी को परिवार को रकम लौटाने के साथ मुआवजा और ब्याज देने का आदेश दिया गया।

93 हजार रुपये में बुक किया था पूरा ट्रैवल पैकेज

हरियाणा के रहने वाले 60 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी पत्नी, बेटे-बेटी, 79 और 81 साल के माता-पिता और पालतू डॉग के साथ दार्जिलिंग-गंगटोक घूमने का प्लान बनाया था। परिवार ने एक ट्रैवल एजेंसी से पूरा पैकेज बुक कराया था।पैकेज में होटल में ठहरने, नाश्ता-डिनर, होटल की सुविधाओं और टैक्सी जैसी सेवाएं शामिल थीं। इसके लिए परिवार ने करीब 93 हजार रुपये का भुगतान किया था। परिवार के मुताबिक, बुजुर्ग माता-पिता और पेट के साथ आराम से यात्रा करने के लिए उन्होंने पैकेज बुक किया था।

होटल पहुंचते ही सामने आई परेशानी

परिवार का आरोप था कि यात्रा शुरू होने के बाद ट्रैवल एजेंसी ने होटल और यात्रा कार्यक्रम में बदलाव कर दिया। जब परिवार बदले हुए होटल में पहुंचा तो वहां पालतू डॉग के साथ ठहरने की अनुमति नहीं मिली।इसके बाद परिवार को डॉग के साथ वापस दार्जिलिंग जाना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 8 घंटे का समय यात्रा और इंतजार में बर्बाद हुआ। परिवार ने आरोप लगाया कि होटल बदलने और दूसरी व्यवस्थाएं करने के कारण उन्हें होटल, टैक्सी और खाने समेत करीब 54 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े।

सुनवाई में ट्रैवल एजेंसी नहीं हुई शामिल

मामला उपभोक्ता आयोग के सामने पहुंचा। आयोग के मुताबिक, ट्रैवल एजेंसी को ई-मेल और व्हाट्सऐप के जरिए नोटिस भेजे गए थे, लेकिन वह सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हुई। इसके बाद आयोग ने उसकी गैरमौजूदगी में मामले की सुनवाई की।आयोग ने माना कि परिवार बुजुर्ग माता-पिता और पालतू डॉग के साथ यात्रा कर रहा था। ऐसे में होटल बदलने और वहां डॉग को ठहरने की अनुमति नहीं मिलने से परिवार को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ी। आयोग ने इसे ट्रैवल एजेंसी की सेवा में कमी और लापरवाही माना।

ट्रैवल एजेंसी को लौटाने होंगे 93 हजार रुपये

उपभोक्ता आयोग ने ट्रैवल एजेंसी को परिवार को 93 हजार रुपये वापस करने का आदेश दिया। इसके अलावा परिवार को 10 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर और 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने को कहा गया।

इतना ही नहीं, आयोग ने 93 हजार रुपये की रकम पर शिकायत दर्ज होने की तारीख से 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का भी आदेश दिया।

पेट के साथ यात्रा करने वालों के लिए क्या सीख?

इस मामले से उन लोगों को खास सबक मिलता है जो अपने पालतू जानवरों के साथ यात्रा करते हैं। ट्रैवल पैकेज बुक करने से पहले कुछ जरूरी बातों की लिखित पुष्टि करना बेहतर है।

होटल में पेट के ठहरने की अनुमति है या नहीं, इसकी पहले से पुष्टि करें।
ट्रैवल एजेंसी से मिली जानकारी को ई-मेल या व्हाट्सऐप पर लिखित रूप में सुरक्षित रखें।
बुजुर्गों, बच्चों या पालतू जानवर के साथ यात्रा कर रहे हैं तो अपनी जरूरतें बुकिंग के समय स्पष्ट बताएं।
होटल या यात्रा कार्यक्रम में बदलाव हो तो उसकी जानकारी और सहमति का रिकॉर्ड रखें।
एजेंसी की गलती से अतिरिक्त खर्च या परेशानी होती है तो बिल, रसीद और बातचीत के रिकॉर्ड संभालकर रखें।
सेवा में कमी होने पर उपभोक्ता आयोग में शिकायत का रास्ता अपनाया जा सकता है।

यात्रा से पहले पेट-फ्रेंडली होटल की लिखित पुष्टि करना छोटी सावधानी है, लेकिन इससे बड़ी परेशानी और अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है।

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