हर बात का स्क्रीनशॉट लेना पड़ सकता है भारी, रिसर्च में सामने आया याददाश्त पर चौंकाने वाला असर
आज के डिजिटल दौर में किसी जरूरी मैसेज, फोटो, डॉक्यूमेंट या जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए स्क्रीनशॉट लेना बेहद आम हो गया है. ज्यादातर लोगों को लगता है कि फोन में जानकारी सेव होने से उसे बाद में आसानी से देखा जा सकता है. लेकिन एक रिसर्च ने इस आदत को लेकर चौंकाने वाली बात सामने रखी है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, किसी जानकारी को याद रखने के बजाय उसका स्क्रीनशॉट लेने की आदत हमारी याददाश्त पर असर डाल सकती है.
क्या कहती है रिसर्च?
अमेरिका की बिंघैमटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने स्क्रीनशॉट और याददाश्त के बीच संबंध को समझने के लिए प्रयोग किया. रिसर्च में सामने आया कि जब लोग किसी तस्वीर या जानकारी को सिर्फ ध्यान से देखते हैं, तो उसके बारे में ज्यादा बातें याद रह सकती हैं. वहीं, जब वही चीज स्क्रीनशॉट के रूप में सेव कर ली जाती है, तो उसे याद रखने की क्षमता कम हो सकती है.
शोधकर्ताओं ने इस प्रभाव को Photo-Taking Impairment Effect से जोड़ा है. इसका मतलब है कि किसी चीज को रिकॉर्ड कर लेने की प्रक्रिया कभी-कभी उस चीज को खुद याद रखने में बाधा बन सकती है.
छात्रों पर किया गया प्रयोग
रिसर्च के दौरान छात्रों को अलग-अलग तस्वीरें दिखाई गईं. इनमें पेंटिंग और स्केच जैसी कलाकृतियां शामिल थीं. कुछ तस्वीरों को छात्रों से स्क्रीनशॉट करने के लिए कहा गया, जबकि कुछ को बिना स्क्रीनशॉट लिए सिर्फ ध्यान से देखने के लिए कहा गया.
इसके बाद छात्रों से तस्वीरों से जुड़ी बारीक जानकारियों के बारे में सवाल पूछे गए. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन तस्वीरों को छात्रों ने स्क्रीनशॉट किया था, उनके विवरण को याद करने में उन्हें अपेक्षाकृत ज्यादा परेशानी हुई. इसके मुकाबले केवल देखकर आगे बढ़ने वाली तस्वीरों की जानकारी उन्हें बेहतर तरीके से याद रही.
स्क्रीनशॉट लेने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है?
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ध्यान का बंटना हो सकती है. जब कोई व्यक्ति स्क्रीनशॉट लेने पर ध्यान देता है, तो उसका कुछ मानसिक ध्यान उस प्रक्रिया में चला जाता है. ऐसे में सामने मौजूद जानकारी को गहराई से समझने और याद रखने पर कम ध्यान दिया जा सकता है.
इसके अलावा शोधकर्ता इसे Cognitive Offloading से भी जोड़ते हैं. आसान भाषा में इसका मतलब है कि जब हमें भरोसा होता है कि कोई जानकारी फोन में सुरक्षित है और जरूरत पड़ने पर दोबारा मिल जाएगी, तो हमारा दिमाग उसे याद रखने की कम कोशिश कर सकता है.
यही वजह है कि फोन नंबर, जरूरी तारीख या किसी पते को याद रखने के बजाय लोग उसे तुरंत मोबाइल में सेव कर लेते हैं.
क्या हर स्क्रीनशॉट याददाश्त खराब करता है?
ऐसा कहना सही नहीं होगा कि हर स्क्रीनशॉट याददाश्त को कमजोर कर देता है. स्क्रीनशॉट एक उपयोगी डिजिटल टूल है और जरूरी जानकारी को बाद में दोबारा देखने के लिए इसे इस्तेमाल किया जा सकता है. समस्या तब हो सकती है जब हम हर चीज को बिना ध्यान से समझे सिर्फ इस भरोसे पर सेव करते जाएं कि बाद में फोन देखकर याद कर लेंगे.
अगर किसी जानकारी को वास्तव में याद रखना है, तो उसे ध्यान से पढ़ना, अपने शब्दों में दोहराना या लिखकर नोट करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है.
जरूरी जानकारी याद रखनी है तो अपनाएं ये तरीका
किसी महत्वपूर्ण जानकारी को लंबे समय तक याद रखना चाहते हैं तो सिर्फ स्क्रीनशॉट लेकर छोड़ने के बजाय उसे समझने की कोशिश करें. जरूरत हो तो मुख्य बिंदुओं को अपनी डायरी या नोटबुक में लिखें. लिखने और जानकारी को अपने शब्दों में दोहराने से उस पर सक्रिय रूप से ध्यान देने का मौका मिलता है.
इसलिए अगली बार किसी जरूरी जानकारी के सामने आते ही स्क्रीनशॉट लेने से पहले कुछ सेकंड रुकें और खुद से पूछें—क्या मुझे इसे सिर्फ सेव करना है या सच में याद भी रखना है?

