सुधा मूर्ति का मैरिज टिप: 'लड़ाई नहीं हुई तो आप पति-पत्नी नहीं', न्यू कपल्स को खास सलाह
शादी का रिश्ता हमेशा एक-दूसरे की हर बात से सहमत होने का नाम नहीं है। पति-पत्नी के बीच कभी छोटी-सी बहस हो सकती है, कभी मनमुटाव और कभी किसी बात को लेकर नाराजगी भी हो सकती है। नौकरी, परिवार, बच्चों की जिम्मेदारी और घर के काम जैसी कई चीजें भी वैवाहिक जीवन का हिस्सा होती हैं।
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2024 में सुधा मूर्ति ने अपने पति एन. आर. नारायण मूर्ति के साथ बातचीत के दौरान युवा कपल्स को रिश्ते से जुड़ी कुछ अहम बातें बताई थीं। उनका कहना था कि पति-पत्नी के बीच कभी-कभार होने वाली नोकझोंक को रिश्ते की कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए। ज्यादा जरूरी यह है कि दोनों मतभेदों को किस तरह संभालते हैं।
पति-पत्नी के बीच बहस होना सामान्य
जब एन. आर. नारायण मूर्ति ने सुधा मूर्ति से पूछा कि वह युवा कपल्स को क्या सलाह देना चाहेंगी, तो उन्होंने यह नहीं कहा कि शादी में कभी झगड़ा नहीं होना चाहिए।
सुधा मूर्ति के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। अगर कोई कपल यह कहे कि उनकी शादीशुदा जिंदगी में कभी कोई बहस या झगड़ा ही नहीं हुआ, तो यह कुछ असामान्य लग सकता है।
उनके मुताबिक, महत्वपूर्ण यह नहीं है कि पति-पत्नी के बीच कभी मतभेद न हों, बल्कि यह है कि मतभेद होने के बाद दोनों एक-दूसरे के साथ किस तरह व्यवहार करते हैं।
हर छोटी बहस को बड़ा झगड़ा बनाने की जरूरत नहीं होती। कई बार सामने वाले की बात ध्यान से सुनना, उसकी भावनाओं को समझना या उसे थोड़ा समय और स्पेस देना स्थिति को बेहतर बना सकता है।
दोनों एक साथ गुस्सा हों तो बात बिगड़ सकती है
सुधा मूर्ति ने यह भी बताया कि अगर पति-पत्नी में से कोई एक गुस्से में है, तो दूसरे को उस समय शांत रहने की कोशिश करनी चाहिए।
उन्होंने अपनी शादी का उदाहरण देते हुए बताया कि जब नारायण मूर्ति गुस्सा होते हैं, तो वह उनकी बात सुनती हैं और उसी समय बहस करने से बचती हैं। इसी तरह जब वह खुद नाराज होती हैं, तो नारायण मूर्ति भी तुरंत बहस करने के बजाय शांत रहने की कोशिश करते हैं।
कई बार दोनों लोग एक साथ गुस्से में आकर अपनी-अपनी बात सही साबित करने लगते हैं। ऐसी स्थिति में छोटी-सी बहस भी बड़ी लड़ाई का रूप ले सकती है। इसलिए कुछ समय के लिए शांत रहना और सही समय पर बातचीत करना रिश्ते के लिए मददगार हो सकता है।
कोई भी पार्टनर परफेक्ट नहीं होता
सुधा मूर्ति के मुताबिक, शादी में एक-दूसरे को जैसा वह है, वैसा स्वीकार करना भी जरूरी है। हर व्यक्ति में कुछ खूबियां होती हैं और कुछ कमियां भी।
शादी का रिश्ता सहयोग, समझ और एक-दूसरे का साथ देने पर टिका होता है। जरूरी नहीं कि दोनों पार्टनर हर काम में बराबर अच्छे हों। हो सकता है कि कोई एक व्यक्ति घर के कुछ काम बेहतर तरीके से करता हो, जबकि दूसरे को किसी दूसरे काम में महारत हो।
इसलिए पति या पत्नी से हर समय हर चीज में परफेक्ट होने की उम्मीद करना रिश्ते पर अनावश्यक दबाव डाल सकता है। इसके बजाय एक-दूसरे की खूबियों को पहचानना और कमियों को समझने की कोशिश करना ज्यादा जरूरी है।
शादी में हर चीज परफेक्ट होना जरूरी नहीं
एक खुशहाल शादी का मतलब यह नहीं है कि पति-पत्नी के बीच कभी बहस या नाराजगी न हो। मतभेद किसी भी रिश्ते का सामान्य हिस्सा हो सकते हैं।
कभी एक पार्टनर को ज्यादा धैर्य दिखाना पड़ सकता है, तो कभी दूसरे को थोड़ा समय और अपनी जगह की जरूरत हो सकती है। रिश्ते की मजबूती इस बात से तय नहीं होती कि उसमें कितने मतभेद होते हैं, बल्कि इस बात से होती है कि उन मतभेदों को किस तरह संभाला जाता है।
एक मजबूत रिश्ते में दोनों पार्टनर एक-दूसरे की बात सुनने, भावनाओं को समझने और एक-दूसरे का सम्मान करने की कोशिश करते हैं। यही छोटी-छोटी समझदारी लंबे समय में रिश्ते को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है।

