Samachar Nama
×

सोशल एंग्जायटी या 'Liking Gap'? जानिए क्यों हमें लगता है कि सामने वाला हमें पसंद नहीं करता

सोशल एंग्जायटी या 'Liking Gap'? जानिए क्यों हमें लगता है कि सामने वाला हमें पसंद नहीं करता

किसी से बातचीत करने के बाद उस बातचीत को बार-बार याद करना और अपनी कही हर बात के बारे में सोचना आम बात है। खासकर जब सामने वाले की तरफ से यह साफ संकेत न मिले कि उसे आपसे बात करके अच्छा लगा, तो कई लोग तुरंत मान लेते हैं कि शायद उन्होंने बातचीत के दौरान कुछ गलत कह दिया या ठीक से बात नहीं कर पाए। इसके बाद वे खुद को ही जज करने लगते हैं।हालांकि, कई बार यह सिर्फ हमारी सोच होती है। हम अपनी छोटी-छोटी गलतियों और झिझक पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देते हैं, जबकि सामने वाला व्यक्ति उसी बातचीत को बिल्कुल अलग तरीके से देख सकता है। मनोविज्ञान में इसी तरह की स्थिति को 'लाइकिंग गैप' (Liking Gap) कहा जाता है।

थेरेपिस्ट जेफ्री मेल्टजर ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में इस कॉन्सेप्ट के बारे में बताया है।

क्या होता है 'लाइकिंग गैप'?

जेफ्री मेल्टजर के मुताबिक, लोगों को अक्सर यह लगता है कि बातचीत के बाद सामने वाला उन्हें उतना पसंद नहीं करता, जितना वे चाहते हैं। खासकर किसी नए व्यक्ति से मिलने या बातचीत करने के बाद यह सोच ज्यादा आ सकती है।लाइकिंग गैप का मतलब है कि हम अक्सर यह अनुमान कम लगाते हैं कि सामने वाला व्यक्ति हमें वास्तव में कितना पसंद करता है। हमें अपनी बातचीत की कमियां ज्यादा दिखाई देती हैं, जबकि दूसरे व्यक्ति को शायद वे कमियां उतनी महत्वपूर्ण लगती ही नहीं हैं।

हम ऐसा क्यों सोचने लगते हैं?

इसकी एक वजह यह हो सकती है कि हम अपने मन में चल रहे डर, झिझक और नकारात्मक विचारों से पूरी तरह परिचित होते हैं, लेकिन सामने वाला व्यक्ति इन विचारों को नहीं जानता।उदाहरण के लिए, बातचीत के दौरान अगर कोई बात ठीक से नहीं निकल पाई या कुछ सेकंड की चुप्पी रही, तो हम बाद में उसी घटना को बार-बार याद कर सकते हैं। हमें लग सकता है कि सामने वाले ने भी इसे अजीब समझा होगा। लेकिन जरूरी नहीं कि उसका अनुभव भी ऐसा ही रहा हो।बातचीत के बाद हम अक्सर अपनी ही 'परफॉर्मेंस' का विश्लेषण करने लगते हैं। इस दौरान हमारा ध्यान उन चीजों पर ज्यादा जाता है जो हमें गलत लगीं और उन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिनसे पता चल सकता था कि बातचीत वास्तव में अच्छी रही।

ओवरथिंकिंग का रिश्तों पर पड़ सकता है असर

जब किसी व्यक्ति को लगातार लगता है कि सामने वाला उसे पसंद नहीं करता, तो वह बातचीत को बार-बार दिमाग में दोहरा सकता है। वह अपनी कही हुई बातों का जरूरत से ज्यादा विश्लेषण करने लगता है और कई बार दोबारा उस व्यक्ति से बात करने या संपर्क करने से भी बचता है।ऐसा होने पर एक संभावित दोस्ती या नए रिश्ते की शुरुआत भी प्रभावित हो सकती है। यानी सिर्फ इस डर की वजह से कि सामने वाला हमें पसंद नहीं करता, हम खुद ही उससे दूरी बनाना शुरू कर सकते हैं।

अगली बार खुद को तुरंत जज न करें

अगर किसी बातचीत के बाद आपको लगे कि सामने वाले को आप पसंद नहीं आए, तो बिना किसी ठोस संकेत के तुरंत यह निष्कर्ष निकालने से बचें। हो सकता है कि आप अपनी बातचीत की छोटी-छोटी कमियों पर जरूरत से ज्यादा ध्यान दे रहे हों।सामने वाले को यह मौका दें कि वह अपने व्यवहार से बताए कि वह आपके बारे में क्या सोचता है। संभव है कि बातचीत का उसका अनुभव आपकी कल्पना से बिल्कुल अलग हो और उसे आपके साथ समय बिताना अच्छा लगा हो।

Share this story

Tags