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RBI के फैसले का दिखा असर, BOI और UCO बैंक ने सस्ती की EMI

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ई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद 10 अप्रैल की सुबह 10 बजे देश के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि रेपो रेट में 0.25% की कटौती की जा रही है। इससे पहले रेपो रेट 6.25% था, जिसे घटाकर अब 6.0% कर दिया गया है। इस ऐलान के कुछ ही घंटों के भीतर बैंक ऑफ इंडिया (BOI) और यूको बैंक ने अपने ग्राहकों को राहत देते हुए लोन की ब्याज दरों में 0.25% की कटौती कर दी। इससे उन लाखों ग्राहकों को राहत मिलेगी जो होम लोन, कार लोन या अन्य तरह के ऋणों की ईएमआई चुका रहे हैं।

रेपो रेट में कटौती क्यों अहम है?

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI देश के वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। यदि रेपो रेट में कमी होती है, तो बैंकों को RBI से सस्ता कर्ज मिलता है। इससे बैंकों की ऋण देने की क्षमता बढ़ जाती है और वे ग्राहकों को कम ब्याज दर पर ऋण देना शुरू कर देते हैं। इस कारण होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई सस्ती हो जाती है।

इस कटौती से सीधे तौर पर उन ग्राहकों को फायदा मिलेगा जिनका लोन रेपो रेट से लिंक है। देश में 80% से अधिक होम लोन अब रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) पर आधारित हैं।

बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक ने तुरंत की घोषणा

RBI के ऐलान के बाद सबसे पहले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी रेपो आधारित उधारी दर (RBLR) को 9.10% से घटाकर 8.85% कर दिया। बैंक ने बताया कि यह नई दर तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

वहीं यूको बैंक ने भी अपने ग्राहकों के लिए राहत की घोषणा करते हुए रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट को घटाकर 8.80% कर दिया। यूको बैंक की नई दरें 11 अप्रैल से लागू होंगी।

बैंकों के इस फैसले से उन ग्राहकों को फायदा होगा जो पहले से इन बैंकों से लोन ले चुके हैं और साथ ही जो नए ग्राहक लोन लेना चाहते हैं।

और भी बैंक कर सकते हैं ब्याज दरों में कटौती

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि RBI की इस कटौती के बाद अन्य बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक भी जल्द ही अपनी लोन दरों में कटौती कर सकते हैं। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले सप्ताहों में यदि बाजार में मांग में बढ़ोतरी नहीं होती है तो बैंक अधिक आकर्षक ब्याज दरों के साथ लोन ऑफर कर सकते हैं।

ग्राहक कैसे उठाएंगे फायदा?

अगर आपने रेपो रेट से लिंक्ड लोन लिया है तो आपको बैंक की ओर से जल्द ही एक सूचना मिलेगी, जिसमें नई दरों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे आपकी मासिक किश्त यानी ईएमआई में सीधी कटौती होगी।

उदाहरण के लिए, अगर आपने ₹50 लाख का होम लोन लिया है और उस पर ब्याज दर 9.10% थी, तो आपकी ईएमआई ₹45,215 के आसपास होती। अब यही ब्याज दर 8.85% हो गई है, तो आपकी ईएमआई लगभग ₹43,931 हो जाएगी। यानी आपको हर महीने ₹1,284 की बचत होगी।

अगर लोन की अवधि 20 साल है, तो कुल बचत ₹3 लाख से अधिक की हो सकती है।

रेपो रेट कटौती का आर्थिक प्रभाव

RBI द्वारा रेपो रेट घटाने का मकसद अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह को बढ़ाना और निवेश को प्रोत्साहित करना होता है। जब लोन सस्ता होता है तो लोग मकान, गाड़ी या अन्य चीजों के लिए अधिक आसानी से ऋण लेते हैं। इससे रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर गुड्स जैसे सेक्टर में बिक्री बढ़ती है और अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलती है।

वहीं दूसरी ओर, ब्याज दरें कम होने से फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य निवेश योजनाओं से मिलने वाला रिटर्न भी घटता है। इससे निवेशक शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड जैसी हाई रिस्क-हाई रिटर्न योजनाओं की ओर रुख करते हैं, जिससे बाजार में तेजी आ सकती है।

क्या कहता है बैंकिंग सेक्टर?

बैंकिंग सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि RBI का यह कदम उचित समय पर लिया गया है। देश की आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही हैं और इसमें नकदी प्रवाह की अहम भूमिका होती है। ऐसे में रेपो रेट में कटौती से उपभोक्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और मांग में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

RBI के इस कदम की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी सराहना की है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “RBI का यह फैसला अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला है। इससे मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी।”

भविष्य की संभावनाएं

RBI के गवर्नर ने यह भी संकेत दिए हैं कि अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है और वैश्विक बाजार स्थिर बने रहते हैं तो आने वाले महीनों में रेपो रेट में और भी कटौती की जा सकती है। इससे लोन लेना और सस्ता हो सकता है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई दर और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगा।

निष्कर्ष

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में की गई 0.25% की कटौती भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने बैंक से लोन लिया है या लेने की योजना बना रहे हैं।

बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक ने सबसे पहले लोन दरों में कटौती कर ग्राहकों को राहत दी है। उम्मीद की जा रही है कि अन्य बैंक भी जल्द ही इसी तरह की घोषणा करेंगे।

यह फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे खपत में वृद्धि होगी और बाजार में नई ऊर्जा का संचार होगा। अब देखना यह है कि अन्य बैंक इस रेट कटौती को कितनी जल्दी अपनाते हैं और ग्राहक इससे किस हद तक लाभ उठा पाते हैं।

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