Parenting Tips: हर पिता को अपनी बेटी के लिए करने चाहिए ये 3 काम, मजबूत होगा रिश्ता
हर पिता की ख्वाहिश होती है कि उसकी बेटी जिंदगी में खुश रहे, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े और अपने सपनों को पूरा करे। बेटी की अच्छी परवरिश के लिए माता-पिता उसे बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देने की पूरी कोशिश करते हैं। हालांकि, सिर्फ अच्छे स्कूल में पढ़ाना और अच्छे नंबर हासिल करना ही परवरिश की पूरी तस्वीर नहीं है। बच्चे के व्यक्तित्व को मजबूत बनाने के लिए प्यार, भरोसा, आजादी और आत्मविश्वास भी उतने ही जरूरी हैं।
बेटियों की परवरिश में पिता की भूमिका भी बेहद अहम होती है। इसी विषय पर 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए बेटियों के पिता के लिए कुछ खास बातें बताई हैं। उनका कहना है कि पिता का प्यार कई बार बच्चों को साफ तौर पर दिखाई नहीं देता, इसलिए कुछ भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करना जरूरी है।
बेटी के साथ जरूर करें ये 3 काम
1. बेटी के सपनों के बारे में बात करें
दिव्या मित्तल के मुताबिक, पिता को बेटी से सिर्फ उसकी पढ़ाई, परीक्षा और नंबरों के बारे में ही बात नहीं करनी चाहिए। उससे यह भी पूछना चाहिए कि वह भविष्य में क्या करना चाहती है और उसकी जिंदगी का सपना क्या है।
बेटी से जानें कि उसे किस तरह का काम पसंद है, वह आगे क्या हासिल करना चाहती है और अपने भविष्य को किस तरह देखती है। जरूरी नहीं कि उसका सपना पिता को आसान या व्यावहारिक लगे। हो सकता है उसकी पसंद कुछ ऐसी हो, जिसे समझने में आपको समय लगे।
ऐसे में सबसे जरूरी है कि उसकी बात पूरी तरह सुनें और उसे अपनी राय रखने का मौका दें। जब बेटी को महसूस होता है कि परिवार उसके सपनों को महत्व देता है, तो उसके अंदर अपने लक्ष्य को लेकर आत्मविश्वास बढ़ता है।
2. छोटे फैसलों में भी बेटी की राय लें
बेटी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जरूरी है कि बचपन से ही उसे अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। दिव्या मित्तल सलाह देती हैं कि घर के छोटे-छोटे फैसलों में बेटी की राय भी पूछनी चाहिए।
उदाहरण के लिए, किसी त्योहार पर क्या खरीदना है, घर में क्या खाना बनाया जाए या किसी खास मौके की तैयारी किस तरह की जाए—ऐसे मामलों में उसकी पसंद जान सकते हैं।
ये फैसले भले ही बहुत छोटे लगें, लेकिन इनका असर बच्चे के आत्मविश्वास पर बड़ा हो सकता है। इससे बेटी को अपनी पसंद और राय व्यक्त करने की आदत पड़ती है। आगे चलकर उसे पढ़ाई, करियर, नौकरी और निजी जिंदगी से जुड़े बड़े फैसले खुद लेने होंगे। बचपन से अपनी बात रखने का अनुभव उसे उन परिस्थितियों में ज्यादा आत्मविश्वासी बना सकता है।
3. बेटी से कहें कि आपको उस पर भरोसा है
कई पिता अपनी बेटियों से बेहद प्यार करते हैं, लेकिन अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते। दिव्या मित्तल का कहना है कि पिता को बेटी को यह बताना चाहिए कि उन्हें उस पर भरोसा है।
पिता की ओर से कही गई एक छोटी-सी बात भी बेटी के आत्मविश्वास पर गहरा असर डाल सकती है। जब उसे यह महसूस होता है कि उसके माता-पिता उस पर विश्वास करते हैं, तो मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने का हौसला बढ़ता है।
इसलिए बेटी की उपलब्धियों पर उसकी तारीफ करने के साथ-साथ उसके प्रयासों को भी पहचानें। उसे यह एहसास दिलाएं कि गलती होने पर भी वह परिवार से अपनी बात साझा कर सकती है।
पिता का भरोसा बेटी को बनाता है मजबूत
दिव्या मित्तल के अनुसार, बेटी को मजबूत बनाने के लिए केवल उसे सुविधाएं देना पर्याप्त नहीं है। उसे घर में अपनी बात रखने की आजादी, अपने सपनों को पूरा करने के लिए परिवार का समर्थन और पिता का भरोसा मिलना भी जरूरी है।
जब बेटी को बचपन से अपनी राय व्यक्त करने और फैसलों में शामिल होने का मौका मिलता है, तो उसके अंदर आत्मविश्वास विकसित होता है। यही आत्मविश्वास आगे चलकर उसे अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने और चुनौतियों का सामना करने में मदद कर सकता है।
इसलिए बेटियों के साथ सिर्फ उनकी पढ़ाई और भविष्य की चिंता करना ही जरूरी नहीं, बल्कि उनके सपनों को सुनना, उनकी राय को महत्व देना और उन पर भरोसा जताना भी पिता की परवरिश का अहम हिस्सा है।

