महंगाई का नया झटका: अंडा, चिकन और दूध हुए महंगे, बिगड़ा किचन का बजट; जानें कितनी बढ़ी कीमतें
महंगाई का असर अब आम आदमी की रसोई में साफ दिखाई देने लगा है। खाने-पीने की जरूरी चीजों के बाद अब अंडा, चिकन और दूध जैसे रोजमर्रा के प्रोडक्ट्स की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक साल में पोल्ट्री और डेयरी उत्पादों के दाम में करीब 30 से 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी ने परिवारों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है।
अंडे की कीमत में जबरदस्त उछाल
प्रोटीन का सस्ता और आसानी से उपलब्ध स्रोत माने जाने वाले अंडे की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान काफी तेजी आई है। अलग-अलग बाजारों में अंडे के दाम करीब 35 से 38.7 फीसदी तक बढ़ने की बात सामने आ रही है।
थोक बाजार में भी इसका असर दिखाई दे रहा है। NECC के बाजार भाव में 100 अंडों की कीमत कई जगह 670 से 730 रुपये से ऊपर पहुंच गई है। इसका सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ा है।
जो अंडा सामान्य दिनों में करीब 6 रुपये में मिल जाता था, उसकी कीमत अब कई जगह 8.50 से 9 रुपये प्रति पीस हो गई है। कुछ स्थानीय बाजारों में ग्राहकों को इसके लिए 10 से 12 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
चिकन की कीमत भी पहुंची 330 रुपये किलो तक
अंडे के साथ चिकन के दामों ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले एक साल में कई बाजारों में चिकन की कीमत में 30 से 40 फीसदी तक का इजाफा दर्ज किया गया है।
कई खुदरा बाजारों में जो चिकन करीब 220 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, उसकी कीमत अब बढ़कर 330 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इससे नॉन-वेज खाने वाले परिवारों का साप्ताहिक और मासिक बजट भी प्रभावित हो रहा है।
दूध भी हुआ महंगा
महंगाई की मार डेयरी प्रोडक्ट्स पर भी पड़ी है। दूध की कीमतों में बढ़ोतरी ने पहले से दबाव झेल रहे घरेलू बजट को और प्रभावित किया है।
देश की प्रमुख डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने लागत बढ़ने का हवाला देते हुए दूध के दाम में करीब 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि की है। इसके बाद कुछ इलाकों में प्रीमियम दूध की कीमत 68 से 70 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
आम आदमी की रसोई पर बढ़ता बोझ
अंडा, चिकन और दूध तीनों ही ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में परिवार रोजाना या नियमित तौर पर करते हैं। ऐसे में इनकी कीमत बढ़ने का असर सीधे घरेलू खर्च पर पड़ता है।
एक तरफ सब्जियों और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर परिवार पहले से बजट संभालने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं अब प्रोटीन और डेयरी से जुड़े जरूरी सामान महंगे होने से खर्च और बढ़ सकता है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
पोल्ट्री और डेयरी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे उत्पादन लागत, चारा, परिवहन और अन्य इनपुट खर्च बढ़ना अहम वजह माने जाते हैं। जब उत्पादन और सप्लाई की लागत बढ़ती है तो उसका असर थोक बाजार से होते हुए खुदरा कीमतों पर भी दिखाई देता है।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर अंडे, चिकन और दूध की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले समय में आम परिवारों के मासिक किचन बजट पर इसका दबाव और बढ़ सकता है।

