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Milk Egg Chicken Price: मक्का-सोयाबीन महंगा होने से बढ़ी दूध, अंडे और चिकन की लागत, जानें क्या है वजह
 

Milk Egg Chicken Price: मक्का-सोयाबीन महंगा होने से बढ़ी दूध, अंडे और चिकन की लागत, जानें क्या है वजह

भारत में दूध, अंडे और चिकन की कीमतों पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसके पीछे एक बड़ी वजह पशुओं और मुर्गियों के चारे की बढ़ती लागत बताई जा रही है। चारे में इस्तेमाल होने वाला मक्का और सोयाबीन मील महंगा होने से उत्पादन खर्च बढ़ गया है। अगर आने वाले महीनों में मक्के की कीमत में और तेजी आती है, तो इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
कृषि अर्थव्यवस्था में बढ़ी पशुधन की हिस्सेदारी
पिछले एक दशक में भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था में पशुधन क्षेत्र की भूमिका काफी बढ़ी है। 2013-14 में पशुधन से जुड़ी गतिविधियों का मूल्य फसल क्षेत्र के मूल्य का करीब 34 फीसदी था। 2023-24 तक यह अनुपात बढ़कर लगभग 57 फीसदी पहुंच गया।
इससे पता चलता है कि दूध, अंडे, मांस और अन्य पशु उत्पाद अब कृषि अर्थव्यवस्था का पहले से कहीं बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में चारे की लागत में होने वाला बदलाव पूरे सेक्टर को प्रभावित कर सकता है।
मुर्गियों के चारे में मक्के की बड़ी हिस्सेदारी
पोल्ट्री उद्योग में मक्का बेहद महत्वपूर्ण कच्चा माल है। ब्रॉयलर मुर्गियों के फीड में करीब 55-65 फीसदी मक्का इस्तेमाल होता है, जबकि अंडा देने वाली लेयर मुर्गियों के चारे में इसकी हिस्सेदारी लगभग 50-60 फीसदी रहती है।
पशुओं के फीड में भी मक्के का इस्तेमाल करीब 15-20 फीसदी तक होता है। इसके अलावा प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए सोयाबीन मील, सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी और कपास के बीज से मिलने वाली खली का इस्तेमाल किया जाता है।
ब्रॉयलर फीड में करीब 25-30 फीसदी सोयाबीन मील, जबकि लेयर फीड में इसकी हिस्सेदारी लगभग 18-20 फीसदी रहती है। इसलिए इन दोनों प्रमुख कच्चे माल की कीमत बढ़ने का सीधा असर चारे की लागत पर पड़ता है।


मक्के के दाम में लगातार बढ़ोतरी
मक्के की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। तमिलनाडु के इरोड जिले के अलंगेयम बाजार में अगस्त 2025 में मक्के का औसत भाव करीब 2,537 रुपये प्रति क्विंटल था। अगस्त 2026 में यह बढ़कर 2,759 रुपये और अब करीब 2,810 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।
सोयाबीन मील भी पिछले साल के मुकाबले महंगा हुआ है। मध्य प्रदेश के इंदौर में अगस्त 2025 में इसकी कीमत करीब 38,186 रुपये प्रति टन थी, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 58,156 रुपये प्रति टन हो गई। हालांकि अब भाव घटकर करीब 50 हजार रुपये प्रति टन रह गया है, फिर भी यह पिछले साल की तुलना में काफी ऊंचा है।
महंगे चारे का असर अंडे की कीमत पर
फीड की बढ़ती लागत का असर अंडे के बाजार में भी देखने को मिल रहा है। दिल्ली में अंडे की फार्मगेट कीमत करीब 600 रुपये प्रति 100 अंडे है, जबकि खुदरा बाजार में एक अंडे की कीमत करीब 7 से 9 रुपये के बीच बताई जा रही है।
जुलाई में अंडे का औसत भाव करीब 670.50 रुपये प्रति 100 अंडे रहा था। यह पिछले साल की तुलना में लगभग 38.7 फीसदी ज्यादा था। इस दौरान कीमत बढ़कर 725-730 रुपये प्रति 100 अंडे तक भी पहुंच गई थी।


चिकन उत्पादन पर भी बढ़ा खर्च
पिछले चार महीनों में लेयर मुर्गियों के फीड की कीमत करीब 24-26 रुपये से बढ़कर 30-32 रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं, ब्रॉयलर फीड का भाव करीब 40 रुपये से बढ़कर 46 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया।
ब्रॉयलर मुर्गी को लगभग 35-42 दिनों में 2 से 2.5 किलो वजन तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में फीड की कीमत में मामूली बढ़ोतरी भी कुल उत्पादन लागत को काफी प्रभावित करती है। पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अनुसार, ब्रॉयलर की उत्पादन लागत करीब 110 रुपये प्रति किलो है।
आगे मक्के की कीमत पर रहेगी नजर
सोयाबीन मील के दाम में कुछ नरमी आई है और नई फसल बाजार में आने के बाद इसकी उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि मक्के को लेकर चिंता बनी हुई है। इस साल खरीफ सीजन में मक्के की बुआई का क्षेत्र करीब 4.1 फीसदी कम बताया गया है।
USDA के अनुमान के मुताबिक, 2026-27 में भारत में मक्के का उत्पादन करीब 50 मिलियन टन रह सकता है, जबकि 2025-26 में उत्पादन रिकॉर्ड 58.1 मिलियन टन रहा था।
मक्का महंगा होने पर चारे की लागत बढ़ सकती है। इससे पशुपालन और पोल्ट्री का उत्पादन खर्च बढ़ेगा और आगे चलकर दूध, अंडे और चिकन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा मक्के का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में भी होता है। ऐसे में सरकार के सामने एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य और पशु चारे की जरूरत के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी।
 

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