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ऑनलाइन गेम्स की लत बच्चों को कर रही बर्बाद? एक्सपर्ट ने गिनाए 5 लक्षण जो समय रहते नहीं पहचाने तो आप खो देंगे अपना बच्चा 

ऑनलाइन गेम्स की लत बच्चों को कर रही बर्बाद? एक्सपर्ट ने गिनाए 5 लक्षण जो समय रहते नहीं पहचाने तो आप खो देंगे अपना बच्चा 

हाल ही में गाजियाबाद से एक दुखद घटना सामने आई है। तीन नाबालिग बहनों ने ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण एक साथ आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद एक बार फिर इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के दिमाग पर कितना गहरा असर डाल रही है। एक समय था जब ऐसे गेम्स को टाइम पास का ज़रिया माना जाता था, लेकिन अब ये बच्चों के लिए एक जानलेवा लत बन सकते हैं। इस मामले को विस्तार से समझने के लिए हमने नई दिल्ली की सीनियर साइकोलॉजिस्ट मोनिका शर्मा से बात की। आइए जानते हैं कि इस पूरे मुद्दे पर एक्सपर्ट की क्या राय है।

एक्सपर्ट की राय क्या है?
एक्सपर्ट के अनुसार, ज़्यादा गेम्स खेलने से बच्चों की मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे उनके व्यवहार में बदलाव, नींद की समस्या और तनाव हो सकता है। इसके अलावा, बच्चे असली दुनिया से दूर होने लगते हैं, और धीरे-धीरे पढ़ाई, दोस्तों और परिवार में उनकी दिलचस्पी कम हो जाती है। इतना ही नहीं, यह बच्चे के दिमाग पर इतना गहरा असर डालता है कि वे हार या नाकामी बर्दाश्त नहीं कर पाते।

बच्चे ऑनलाइन गेम्स के आदी क्यों हो जाते हैं?
कोविड-19 महामारी के बाद से मोबाइल फोन का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। खासकर बच्चों ने डिजिटल दुनिया का इस्तेमाल तेज़ी से करना शुरू कर दिया है। ऑनलाइन गेम्स में कई ऐसे एलिमेंट्स होते हैं जो बच्चों को आकर्षित करते हैं। कम उम्र होने के कारण उनकी समझ कच्ची होती है, इसलिए वे आसानी से इस जाल में फंस जाते हैं।

बच्चों में गेमिंग की लत के लक्षण:
व्यवहार: गेम खेलने से रोकने पर बहुत ज़्यादा गुस्सा या आक्रामक हो जाना।
सेहत: नींद न आना, आंखों के नीचे काले घेरे, वज़न बढ़ना और खाने की आदतों में बदलाव।
पढ़ाई: स्कूल के नतीजों में लगातार गिरावट और होमवर्क न करना।
सामाजिक अलगाव: दोस्तों से मिलना बंद कर देना और अपने कमरे में बंद रहना।
भावनात्मक परेशानी: बार-बार रोना, खुद को बेकार समझना, या अपनी ज़िंदगी खत्म करने की बात करना।

माता-पिता को क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट के अनुसार, इस लत से छुटकारा पाने के लिए बच्चों के साथ सख़्ती करना सही तरीका नहीं है। ऐसा करने से बच्चे विद्रोही हो सकते हैं या गलत रास्ते पर जा सकते हैं। इसलिए, उन्हें रोकने के बजाय, प्यार से समझाएं और धीरे-धीरे समय सीमा तय करें। बच्चों को आउटडोर गेम्स और एक्सरसाइज़ में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करें। अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा डिप्रेशन में जा रहा है या उसके व्यवहार में काफ़ी बदलाव आया है, तो तुरंत किसी साइकोलॉजिस्ट से सलाह लें।

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