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घर की बालकनी में ऐसे उगाएं करेला, 60 दिन में बेल पर लटकेंगे ताजे फल; गमले में खेती का आसान तरीका
 

घर की बालकनी में ऐसे उगाएं करेला, 60 दिन में बेल पर लटकेंगे ताजे फल; गमले में खेती का आसान तरीका


नई दिल्ली: शहरों में किचन गार्डनिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बालकनी, छत या छोटे से आंगन में लोग अपनी जरूरत के मुताबिक हरी सब्जियां उगाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर आप भी घर पर करेला उगाना चाहते हैं तो इसके लिए बड़े खेत या ज्यादा जगह की जरूरत नहीं है। सही गमला, मिट्टी, धूप और नियमित देखभाल के साथ करेले की बेल को घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है।

करेला स्वाद में भले ही कड़वा होता है, लेकिन भारतीय खानपान में इसका खास स्थान है। इसे घर पर उगाने का फायदा यह है कि जरूरत के मुताबिक ताजा फल तोड़कर इस्तेमाल किया जा सकता है।

12-15 इंच का गमला रहेगा सही

करेले की बेल लगाने के लिए कम से कम 12 से 15 इंच गहरा गमला चुनें। गमले के नीचे ड्रेनेज होल जरूर होने चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके।

मिट्टी तैयार करने के लिए बगीचे की मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद और कोकोपीट मिलाया जा सकता है। एक आसान मिश्रण के तौर पर 50 प्रतिशत मिट्टी, 30 प्रतिशत सड़ी गोबर की खाद और 20 प्रतिशत कोकोपीट इस्तेमाल किया जा सकता है।

बीज बोने से पहले करें ये काम

करेले के बीज का बाहरी आवरण अपेक्षाकृत कठोर होता है। बेहतर अंकुरण के लिए बीजों को बोने से पहले रातभर गुनगुने पानी में भिगोया जा सकता है।

इसके बाद बीज को करीब 1 इंच गहराई में बोएं और मिट्टी पर हल्का पानी डालें। गमले को ऐसी जगह रखें जहां रोजाना करीब 5-6 घंटे धूप मिल सके।

उचित तापमान और नमी मिलने पर सामान्यतः कुछ दिनों में बीज अंकुरित होने लगते हैं।

बेल को सहारा देना बेहद जरूरी

करेला बेल वाली सब्जी है, इसलिए पौधा बढ़ने के साथ उसे ऊपर चढ़ने के लिए मजबूत सहारे की जरूरत होती है। इसके लिए लकड़ी की डंडी, जाली या रस्सी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

जब पौधा करीब 6-8 इंच का हो जाए तो सहारा देने की व्यवस्था कर दें। बेल को ऊपर फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलने पर पौधे की देखभाल भी आसान रहती है।

पानी देते समय रखें खास ध्यान

करेले के पौधे की मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन गमले में पानी जमा नहीं होना चाहिए। ज्यादा पानी देने से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।

गर्मी और मौसम के अनुसार पानी की मात्रा बदल सकती है। इसलिए पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी परत की नमी जांच लेना बेहतर है।

पौधे को पोषण देने के लिए समय-समय पर वर्मीकम्पोस्ट जैसी जैविक खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी भी घरेलू खाद या लिक्विड फर्टिलाइजर का इस्तेमाल करते समय उसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा न रखें।

ज्यादा शाखाओं के लिए प्रूनिंग

जब करेले की मुख्य बेल अच्छी तरह बढ़ जाए तो उसकी टिप की हल्की प्रूनिंग की जा सकती है। इससे साइड शूट निकलने में मदद मिल सकती है और बेल ज्यादा घनी हो सकती है।

हालांकि, कटिंग बहुत ज्यादा करने से पौधे को नुकसान भी हो सकता है। इसलिए केवल स्वस्थ और पर्याप्त विकसित पौधे पर ही हल्की प्रूनिंग करें।

नीचे की पीली और सूखी पत्तियों को भी समय-समय पर हटाते रहें। इससे पौधे के आसपास हवा का संचार बेहतर बना रहता है।

कीटों से बचाने के लिए रखें नजर

करेले की बेल पर फल मक्खी और रस चूसने वाले कीट परेशानी पैदा कर सकते हैं। पौधे की पत्तियों और फलों की नियमित जांच करते रहें।

जरूरत पड़ने पर नीम आधारित कीटनाशक का इस्तेमाल लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार किया जा सकता है। यलो स्टिकी ट्रैप भी कुछ उड़ने वाले कीटों की निगरानी और नियंत्रण में मदद कर सकते हैं।

कब तोड़ें ताजा करेला?

बीज बोने के बाद फल आने का समय मौसम, किस्म और पौधे की देखभाल पर निर्भर करता है। अच्छी परिस्थितियों में लगभग 55-65 दिनों के आसपास शुरुआती फसल मिल सकती है, हालांकि यह हर पौधे में समान नहीं होता।

जब करेले का फल हरा, अच्छी तरह विकसित और कड़ा दिखाई दे, तब उसे तोड़ा जा सकता है। फल को बेल से हाथ से खींचने के बजाय कैंची या प्रूनिंग शीयर से काटना बेहतर रहता है।

छोटी जगह में भी तैयार हो सकती है फसल

करेला ऐसी बेल वाली सब्जी है जिसे सही सहारा देकर सीमित जगह में भी उगाया जा सकता है। अगर आपके पास बालकनी या छत पर पर्याप्त धूप आती है, तो बड़े गमले में इसकी बेल लगाने की कोशिश की जा सकती है।

बस ध्यान रखें कि अच्छी धूप, जल निकासी, संतुलित पानी, पोषण और बेल के लिए मजबूत सहारा करेले की अच्छी ग्रोथ के लिए सबसे जरूरी चीजों में शामिल हैं।
 

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