Floor Tiles Care: टाइल्स के बीच बार-बार टूट रहा है ग्राउट? इन वजहों को न करें नजरअंदाज
घर में नई टाइल्स लगने के बाद फर्श की चमक और खूबसूरती बढ़ जाती है. लेकिन कुछ महीनों या सालों बाद अगर टाइल्स के बीच का ग्राउट टूटने लगे, झड़ने लगे या उसमें महीन दरारें दिखाई देने लगें, तो इसे सामान्य घिसावट मानकर छोड़ना सही नहीं है. कई बार इसके पीछे फर्श की बेस, नमी या टाइल्स लगाने के दौरान हुई तकनीकी गलती जैसी वजहें हो सकती हैं.
समय रहते ग्राउट खराब होने के कारण का पता लगा लिया जाए, तो टाइल्स के नीचे पहुंचने वाली नमी और आगे होने वाले महंगे रिपेयर से बचा जा सकता है.
टाइल्स के बीच ग्राउट क्यों लगाया जाता है?
दो टाइल्स के बीच जानबूझकर थोड़ी जगह छोड़ी जाती है और इसी गैप को ग्राउट से भरा जाता है. इसका काम सिर्फ फर्श को एक जैसा और बेहतर फिनिश देना नहीं है. ग्राउट टाइल्स के बीच गंदगी जमा होने से रोकने और पानी को अंदर जाने से बचाने में भी मदद करता है.
हालांकि, ग्राउट की अपनी एक सीमा होती है. अगर फर्श के नीचे की सतह में लगातार हलचल या दबाव हो रहा है, तो ग्राउट उस तनाव को लंबे समय तक नहीं झेल पाता. यही वजह है कि सबसे पहले जोड़ में महीन दरारें दिखाई दे सकती हैं.
बेस कमजोर होने पर टाइल्स भी दे सकती हैं संकेत
फर्श की मजबूती काफी हद तक उसके नीचे की बेस पर निर्भर करती है. अगर बेस असमान है, कमजोर है या उसे सही तरीके से तैयार नहीं किया गया है, तो ऊपर लगी टाइल्स पर भी दबाव पड़ सकता है.
नई इमारतों में फर्श के धीरे-धीरे बैठने, तापमान में बदलाव और निर्माण सामग्री के फैलने-सिकुड़ने से भी हलचल हो सकती है. इसी तरह कंक्रीट को पर्याप्त समय तक सूखने से पहले टाइल्स लगा देना भी बाद में परेशानी पैदा कर सकता है.
ऐसी स्थिति में सिर्फ टूटे हुए ग्राउट को दोबारा भरने से समस्या कुछ समय के लिए छिप सकती है, लेकिन उसकी मूल वजह बनी रह सकती है.
ग्राउट में पानी का अनुपात बिगड़ना भी बड़ी गलती
ग्राउट तैयार करते समय पानी की मात्रा का सही होना काफी जरूरी है. जरूरत से ज्यादा पानी मिलाने पर सूखने के बाद ग्राउट कमजोर और भुरभुरा हो सकता है. दूसरी ओर, बहुत कम पानी होने पर भी वह सही तरीके से सेट नहीं हो पाता.
इसके अलावा ग्राउट को जोड़ के अंदर अच्छी तरह भरना जरूरी है. अगर उसके बीच खाली जगह रह जाए या पर्याप्त समय दिए बिना फर्श पर चलना शुरू कर दिया जाए, तो इसकी पकड़ कमजोर हो सकती है और कुछ समय बाद यह झड़ने लगता है.
इसलिए टाइल्स लगाते समय सिर्फ महंगी टाइल खरीदना ही पर्याप्त नहीं है. सही ग्राउट और उसे लगाने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
बाथरूम और किचन में क्यों जल्दी खराब होता है ग्राउट?
जहां फर्श लगातार पानी के संपर्क में रहता है, वहां ग्राउट के खराब होने का खतरा अधिक होता है. बाथरूम, किचन, बालकनी और वॉशिंग एरिया इसके सामान्य उदाहरण हैं.
बार-बार गीला और सूखा होने से टाइल्स के जोड़ पर दबाव पड़ता रहता है. अगर फर्श के नीचे वॉटरप्रूफिंग ठीक नहीं है, तो पानी और नमी धीरे-धीरे नीचे तक पहुंच सकती है. ऐसी स्थिति में बार-बार ऊपर से ग्राउट बदलना स्थायी समाधान नहीं होता.
अगर किसी एक हिस्से का ग्राउट बार-बार खराब हो रहा है, तो वहां पानी के रिसाव और वॉटरप्रूफिंग की भी जांच करानी चाहिए.
भारी फर्नीचर से भी बढ़ सकता है दबाव
घर के फर्श पर भारी अलमारी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन या अन्य सामान रखने से कुछ जगहों पर अतिरिक्त भार पड़ता है. इसी तरह ऐसे हिस्से जहां दिनभर लोगों की आवाजाही रहती है, वहां भी समय के साथ ग्राउट पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है.
कभी-कभी कोई भारी वस्तु फर्श पर गिरने से भी टाइल के जोड़ में अचानक दरार आ सकती है. अगर सिर्फ ग्राउट खराब हुआ है और टाइल मजबूती से अपनी जगह पर है, तो उसे हटाकर नया ग्राउट लगाया जा सकता है.
टाइल हिल रही है तो मामला गंभीर हो सकता है
अगर ग्राउट टूटने के साथ टाइल भी हिलती हुई महसूस हो, उसके नीचे से खोखली आवाज आए या टाइल ऊपर-नीचे होने लगे, तो इसे सिर्फ ग्राउट की समस्या नहीं मानना चाहिए.
ऐसे संकेत टाइल के नीचे सही बॉन्डिंग न होने या बेस में किसी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं. इस स्थिति में केवल ऊपर से ग्राउट भरने के बजाय प्रभावित हिस्से की ठीक से जांच कराना बेहतर होता है.
कब करानी चाहिए जांच?
अगर फर्श के एक ही हिस्से में बार-बार ग्राउट टूट रहा है, टाइल में दरार आ रही है, नमी दिखाई दे रही है या टाइल दबाने पर हिल रही है, तो समस्या को टालना ठीक नहीं है. शुरुआती स्तर पर मरम्मत कराने से पूरी टाइलिंग दोबारा करवाने जैसी स्थिति से बचा जा सकता है.
इसलिए ग्राउट को सिर्फ फर्श की सजावट का हिस्सा न समझें. इसके खराब होने के पीछे छिपी वजह का पता लगाना जरूरी है, खासकर तब जब समस्या बार-बार सामने आ रही हो.

