क्या आप भी बच्चे को यही सिखाते हैं कि 'कभी झूठ मत बोलो'? पेरेंट्स की यह गलती पड़ सकती है भारी!
बच्चों की परवरिश में माता-पिता अक्सर उन्हें सिखाते हैं कि हमेशा सच बोलना चाहिए और झूठ बोलना गलत आदत है। लेकिन क्या हर परिस्थिति में सच बोलना जरूरी होता है? खासकर जब बात बच्चे की सुरक्षा से जुड़ी हो, तो उसे यह समझाना भी जरूरी है कि किसी अनजान व्यक्ति के सामने अपनी निजी जानकारी छिपाना गलत नहीं है।
आज के समय में बच्चे कम उम्र में ही इंटरनेट, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया से जुड़ जाते हैं। इसके साथ ही उन्हें अजनबियों से बातचीत और अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखने की समझ देना भी बेहद जरूरी हो गया है।
ऐसे में माता-पिता बच्चों को कुछ ‘सेफ्टी वाले झूठ’ या सही मायने में गलत जानकारी देने से बचने की कला सिखा सकते हैं, ताकि किसी संदिग्ध परिस्थिति में वे खुद को सुरक्षित रख सकें।
1. सोशल मीडिया पर निजी जानकारी न बताना
आजकल बच्चे छोटी उम्र से ही सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने लगे हैं। ऐसे में उन्हें यह समझाना जरूरी है कि इंटरनेट पर हर व्यक्ति भरोसेमंद नहीं होता।
अगर कोई अनजान व्यक्ति बच्चे से उसका स्कूल, घर का पता, फोन नंबर, रोज की लोकेशन या माता-पिता से जुड़ी जानकारी पूछे, तो बच्चे को ऐसी जानकारी बिल्कुल नहीं देनी चाहिए।
जरूरत पड़ने पर बच्चा गलत जानकारी देने के बजाय बातचीत बंद कर सकता है, उस व्यक्ति को ब्लॉक कर सकता है और तुरंत माता-पिता या किसी भरोसेमंद बड़े को इसकी जानकारी दे सकता है।
2. अजनबी को घर या परिवार की जानकारी न दें
बच्चों को अक्सर सिखाया जाता है कि अजनबियों से कुछ लेना-खाना नहीं चाहिए। लेकिन इसके साथ यह भी बताना जरूरी है कि किसी अनजान व्यक्ति को घर का पता, माता-पिता का फोन नंबर, स्कूल का नाम या परिवार की दिनचर्या जैसी जानकारी नहीं देनी है।
अगर कोई व्यक्ति बार-बार ऐसी जानकारी हासिल करने की कोशिश करे, तो बच्चा साफ कह सकता है कि उसे जानकारी नहीं है या वह अपने माता-पिता से पूछे बिना कुछ नहीं बता सकता।
यह झूठ बोलने की आदत डालना नहीं, बल्कि निजी जानकारी को सुरक्षित रखना सिखाना है।
3. घर पर अकेले होने की बात कभी न बताएं
अगर बच्चा घर पर अकेला है और उसी दौरान दरवाजे पर कोई अनजान व्यक्ति आता है, तो उसे यह बिल्कुल नहीं बताना चाहिए कि घर में कोई बड़ा मौजूद नहीं है।
बच्चे को दरवाजा खोलने के बजाय पहले व्यक्ति की पहचान पूछने, माता-पिता से फोन पर संपर्क करने और जरूरत पड़ने पर पड़ोसी या किसी भरोसेमंद व्यक्ति की मदद लेने की आदत डालनी चाहिए।
बच्चे को यह भी समझाएं कि फोन पर या दरवाजे के बाहर खड़े व्यक्ति से यह कहना कि ‘मैं अभी माता-पिता से बात करवाता हूं’ पूरी तरह ठीक है, भले ही उस समय माता-पिता घर पर न हों।
4. असहज या असुरक्षित महसूस हो तो वहां से निकलें
कई बार बच्चे किसी व्यक्ति के व्यवहार से असहज महसूस करते हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आता कि ऐसे समय में क्या करना चाहिए। उन्हें बताएं कि ऐसी स्थिति में सिर्फ शिष्टाचार निभाना जरूरी नहीं है।
अगर कोई व्यक्ति उन्हें डराता है, गलत तरीके से छूने की कोशिश करता है, अकेले कहीं बुलाता है या ऐसी बात करता है जिससे बच्चा असुरक्षित महसूस करे, तो बच्चा तुरंत वहां से हट सकता है।
वह कह सकता है कि उसके माता-पिता या परिवार का कोई सदस्य पास में है या उसे लेने आने वाला है। इसके बाद उसे किसी भरोसेमंद बड़े, शिक्षक, पुलिसकर्मी या सुरक्षा कर्मचारी से मदद मांगनी चाहिए।
5. घर की आर्थिक स्थिति किसी अनजान को न बताएं
बच्चों को घर की आर्थिक स्थिति, माता-पिता की कमाई, घर में रखे पैसे या महंगी चीजों के बारे में अनजान लोगों से जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति ऐसे सवाल पूछता है, तो बच्चा कह सकता है कि उसे इस बारे में जानकारी नहीं है या वह अपने माता-पिता से बात किए बिना कुछ नहीं बता सकता।
बच्चे को यह भी समझाना जरूरी है कि घर में कितने पैसे हैं, कौन-सी महंगी चीज खरीदी गई है या माता-पिता कब घर पर नहीं होते—ऐसी बातें सोशल मीडिया पर भी शेयर नहीं करनी चाहिए।
बच्चों को ‘झूठ’ नहीं, सेफ्टी रूल्स सिखाएं
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चों को हर स्थिति में झूठ बोलने की आदत नहीं डालनी चाहिए। उन्हें यह समझाना चाहिए कि सुरक्षा के लिए अपनी निजी जानकारी छिपाना गलत नहीं है।
साथ ही बच्चों को यह भी सिखाएं कि अगर कोई अजनबी उनसे निजी जानकारी मांगता है, उन्हें डराता है, धमकाता है या असहज महसूस कराता है, तो बात छिपाने के बजाय तुरंत माता-पिता या किसी भरोसेमंद बड़े को बताएं।
बच्चों को सही और गलत के साथ-साथ यह समझाना भी जरूरी है कि कब सच बोलना है, कब जानकारी साझा नहीं करनी है और कब तुरंत मदद मांगनी है। यही समझ किसी मुश्किल परिस्थिति में उनके लिए सबसे बड़ी सुरक्षा बन सकती है।

