मुफ्त योजनाओं की शर्तों के फेर में उलझे दिल्लीवाले, जानें किसे कहां आ रही है परेशानी
दिल्ली में हाल ही में बीजेपी की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में कई सरकारी योजनाओं को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पहले की सरकार द्वारा शुरू की गई फ्री योजनाओं में अब कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे दिल्ली वासियों को इन योजनाओं का लाभ लेने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
फ्री योजना में दस्तावेज अनिवार्य, लोगों की बढ़ी चिंता
दिल्ली सरकार की नई गाइडलाइंस के अनुसार अब विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जिनके पास आवश्यक दस्तावेज होंगे। खासकर महिलाओं के लिए चलाई जा रही महिला समृद्धि योजना के तहत अब लाभ उठाने के लिए कम से कम 5 साल पुराना दिल्ली का आधार कार्ड या वोटर कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में वे महिलाएं जो हाल ही में दिल्ली में आई हैं या जिनके पास पुराने दस्तावेज नहीं हैं, वे योजना से वंचित रह सकती हैं।
आयुष्मान भारत योजना में भी बदले नियम
दिल्ली में अब आयुष्मान भारत योजना लागू की जा चुकी है, जिसके तहत 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज करवाया जा सकता है। हालांकि इस योजना का लाभ भी केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जिनके पास दिल्ली का पता दर्शाने वाला आधार कार्ड या वोटर आईडी है। दिल्ली में लंबे समय से रह रहे लेकिन दस्तावेजों की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए यह एक बड़ी समस्या बनती जा रही है।
डीटीसी बसों में फ्री सफर को लेकर नई शर्तें
महिलाओं को डीटीसी बसों में मुफ्त सफर की सुविधा मिलती रही है, लेकिन अब इसमें भी बदलाव किया जा रहा है। नई दिल्ली सरकार ने संकेत दिया है कि अब केवल उन्हीं महिलाओं को फ्री सफर का लाभ मिलेगा जिनके पास डिजिटल कार्ड होगा। हालांकि सरकार की ओर से इस डिजिटल कार्ड को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं जारी किए गए हैं, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
जनसंख्या और दस्तावेजों में असमानता बन रही परेशानी की जड़
2024 की जनगणना के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या करीब 1.6 करोड़ है। इनमें से बड़ी संख्या उन लोगों की है जो अन्य राज्यों से आकर दिल्ली में बसे हैं। लेकिन इन लोगों के पास जरूरी दस्तावेजों की कमी के कारण फ्री योजनाओं का लाभ मिलना मुश्किल हो गया है।
निष्कर्ष
दिल्ली सरकार की योजनाओं का उद्देश्य आम जनता को राहत देना है, लेकिन नियमों में बार-बार बदलाव और दस्तावेजों की सख्ती के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर महिलाओं, प्रवासी मजदूरों और जरूरतमंदों को अब योजनाओं से वंचित होना पड़ सकता है। सरकार को चाहिए कि वह नए नियम लागू करते समय लोगों की सुविधा और व्यवहारिक समस्याओं को भी ध्यान में रखे।

