पीरियड्स में हो रही है देरी? इन वजहों से हो सकते हैं इर्रेगुलर पीरियड्स, जानें क्या करें
हर महिला का मासिक धर्म चक्र (पीरियड साइकिल) अलग-अलग हो सकता है। कभी-कभी पीरियड जल्दी या देर से आ सकते हैं। कभी-कभी पीरियड के बीच का समय बदल सकता है, या ब्लीडिंग कम या ज़्यादा हो सकती है। हालांकि ऐसे बदलाव कभी-कभार हो सकते हैं, लेकिन अगर ये बार-बार हों तो चिंता की बात हो सकती है। मासिक धर्म का पैटर्न आपकी सेहत के बारे में जानकारी दे सकता है; इसलिए, अपनी पीरियड की तारीखों और ब्लीडिंग में होने वाले किसी भी बदलाव पर नज़र रखना अच्छा रहता है।
पीरियड के समय में बदलाव का मतलब हमेशा कोई गंभीर समस्या नहीं होता; अक्सर ये शरीर में होने वाले सामान्य बदलावों की वजह से हो सकते हैं। हालांकि, लगातार अनियमित पीरियड या ब्लीडिंग में बड़े उतार-चढ़ाव होने पर डॉक्टर से जांच करवाने की ज़रूरत पड़ सकती है। अपने लक्षणों को समझना और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है। आइए जानते हैं कि पीरियड देर से क्यों आते हैं, कब डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और रेगुलर मासिक धर्म चक्र कैसे बनाए रखा जाए।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, पीरियड के समय पर न आने के कई कारण हो सकते हैं। तनाव, वज़न में तेज़ी से बदलाव, बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज़ और हार्मोन में उतार-चढ़ाव इसके कारण हो सकते हैं। मासिक धर्म शुरू होने के शुरुआती सालों (टीनएज) या मेनोपॉज़ के समय भी मासिक धर्म का पैटर्न बदल सकता है। प्रेग्नेंसी भी पीरियड न आने का एक आम कारण है। इसके अलावा, PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) से जुड़े हार्मोनल असंतुलन के कारण भी पीरियड देर से आ सकते हैं या अनियमित हो सकते हैं।
थायरॉइड की समस्या भी हार्मोन के लेवल पर असर डाल सकती है, जिससे पीरियड के समय और बहाव में बदलाव आ सकता है। यूटेराइन फाइब्रॉएड — गर्भाशय में होने वाली नॉन-कैंसरस गांठें — के कारण बहुत ज़्यादा या लंबे समय तक ब्लीडिंग हो सकती है। तनाव, वज़न में उतार-चढ़ाव और कुछ दवाएं भी आपके साइकिल पर असर डाल सकती हैं। अगर आपके पीरियड अक्सर देर से आते हैं या पैटर्न लगातार बदलता रहता है, तो असल कारण जानने के लिए डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।
अनियमित पीरियड के लिए डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए? अगर आपके पीरियड अक्सर अनियमित रहते हैं, तो डॉक्टर को दिखाना सबसे अच्छा है। मेडिकल जांच ज़रूरी हो सकती है, खासकर तब जब लगातार तीन महीनों तक पीरियड न आए हों और आप प्रेग्नेंट न हों। अगर आपको बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग हो, लंबे समय तक ब्लीडिंग हो, या एक पीरियड खत्म होने और दूसरे के शुरू होने के बीच स्पॉटिंग हो, तो भी आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा, पेट में तेज़ दर्द, चक्कर आना, बहुत ज़्यादा कमज़ोरी या सांस फूलने जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। अगर आपके पीरियड रेगुलर थे लेकिन अचानक पैटर्न बदल गया है, तो भी डॉक्टर से सलाह लेना सही रहता है। पीरियड्स को रेगुलर रखने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
पीरियड्स को रेगुलर रखने के लिए बैलेंस्ड डाइट लेना, अच्छी नींद लेना और स्ट्रेस को मैनेज करना ज़रूरी है। तेज़ी से वज़न घटने या बढ़ने से बचें और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही एक्सरसाइज़ करें। रोज़ाना पर्याप्त मात्रा में खाना खाएं और लंबे समय तक खाना न छोड़ें। अपने पीरियड्स की तारीखों, ब्लीडिंग की अवधि और फ्लो की तीव्रता का रिकॉर्ड रखें।
इससे आपके पीरियड्स के पैटर्न को समझना आसान हो जाएगा। अगर आपको PCOS, थायरॉइड की समस्या या कोई अन्य हेल्थ कंडीशन है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज करवाएं। डॉक्टर से सलाह लिए बिना पीरियड्स को कंट्रोल करने के लिए हार्मोन या दवाएं न लें।

