बिल्कुल, इस बार टाइटल के साथ पूरा नया आर्टिकल दे रहा हूं, और टाइटल English keyword से शुरू किया गया है।
भारत में CNG कारों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल-डीजल की तुलना में कम रनिंग कॉस्ट और अच्छा माइलेज मिलने की वजह से लोग CNG वाहनों को काफी पसंद कर रहे हैं। लेकिन CNG कार इस्तेमाल करने वालों के लिए गैस की गुणवत्ता पर ध्यान देना भी जरूरी है। CNG की सप्लाई या कार के सिस्टम में किसी तरह की समस्या होने पर इसका असर सीधे माइलेज और गाड़ी की परफॉर्मेंस पर पड़ सकता है।
हालांकि, सिर्फ माइलेज कम होने से यह कहना सही नहीं होगा कि CNG में मिलावट है। टायर प्रेशर, ट्रैफिक, AC, ड्राइविंग स्टाइल और इंजन की स्थिति भी माइलेज को प्रभावित करती है। फिर भी कुछ संकेत ऐसे हैं, जिनसे आपको गाड़ी की समस्या का अंदाजा लग सकता है।
माइलेज अचानक कम हो जाए तो सावधान
अगर आपकी CNG कार सामान्य दिनों की तुलना में लगातार कम माइलेज देने लगी है, तो इसकी वजह जरूर जांचें। खासकर तब, जब आप रोज लगभग उसी रूट पर और समान परिस्थितियों में गाड़ी चला रहे हों।
लगातार कई बार CNG भरवाने के बाद माइलेज का रिकॉर्ड रखें। अगर किसी खास स्टेशन से गैस लेने के बाद ही माइलेज में बड़ा अंतर दिखाई देता है, तो दूसरे अधिकृत स्टेशन से CNG भरवाकर तुलना की जा सकती है।
गाड़ी का पिकअप कमजोर होना भी संकेत
CNG भरवाने के बाद अगर गाड़ी का पिकअप कमजोर महसूस हो रहा है, एक्सीलेटर दबाने पर प्रतिक्रिया धीमी है या चढ़ाई पर कार ज्यादा कमजोर पड़ रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें।
इंजन में झटके, असामान्य कंपन या स्टार्ट होने में परेशानी भी CNG सिस्टम से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकती है। हालांकि, इसके पीछे स्पार्क प्लग, एयर फिल्टर, इंजेक्टर या अन्य इंजन पार्ट्स की खराबी भी हो सकती है। इसलिए जरूरत पड़ने पर कार की तकनीकी जांच जरूर करवाएं।
CNG स्टेशन चुनते समय रखें ध्यान
CNG भरवाने के लिए हमेशा भरोसेमंद और अधिकृत स्टेशन को प्राथमिकता दें। अगर किसी स्टेशन से गैस भरवाने के बाद बार-बार माइलेज और पिकअप की समस्या सामने आ रही है, तो कुछ समय के लिए दूसरे अधिकृत स्टेशन से CNG लेकर फर्क देखें।
हर बार CNG भरवाने के बाद कितनी गैस ली और कितने किलोमीटर गाड़ी चली, इसका रिकॉर्ड रखने से भी आपको सही स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
सिर्फ प्रेशर देखकर न मानें CNG खराब
CNG भरवाते समय प्रेशर पर नजर रखना अच्छी आदत है, लेकिन केवल कम प्रेशर देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि गैस में हवा मिलाई गई है। फिलिंग प्रेशर तापमान, कंप्रेसर और स्टेशन के सिस्टम जैसी कई चीजों पर निर्भर कर सकता है।
अगर आपको फिलिंग में लगातार परेशानी महसूस हो या गैस भरवाने के बाद कार की परफॉर्मेंस में बदलाव नजर आए, तो स्टेशन बदलकर तुलना करें और समस्या बनी रहने पर अधिकृत शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करें।
CNG सिलेंडर की टेस्टिंग भी है जरूरी
कार के CNG सिलेंडर और किट की नियमित जांच बेहद जरूरी है। सिलेंडर की हाइड्रो टेस्टिंग और फिटनेस से जुड़े नियमों का पालन करें और जांच हमेशा अधिकृत केंद्र से ही करवाएं।
इसके अलावा CNG सिस्टम में गैस की गंध, लीकेज का संदेह या कोई असामान्य आवाज सुनाई दे तो खुद से सिस्टम को खोलने या ठीक करने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में अधिकृत सर्विस सेंटर पर वाहन की जांच करवाना बेहतर है।
इन बातों का रखें खास ख्याल
CNG की गुणवत्ता को लेकर किसी एक संकेत के आधार पर फैसला न करें। लगातार कम माइलेज, कमजोर पिकअप और इंजन के असामान्य व्यवहार जैसे संकेतों पर ध्यान दें। साथ ही नियमित सर्विस, सही टायर प्रेशर और अधिकृत CNG स्टेशन का इस्तेमाल करें।
थोड़ी सी सावधानी रखकर आप अपनी कार की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाए रख सकते हैं और CNG सिस्टम से जुड़ी किसी भी संभावित समस्या का समय रहते पता लगा सकते हैं।

