Child Health: बच्चा 2 साल का हो गया पर नहीं बोलता? इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
हर बच्चे का विकास अपनी गति से होता है। कुछ बच्चे जल्दी बोलना शुरू कर देते हैं, जबकि कुछ बच्चों को बोलने और अपनी बात समझाने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। इसी वजह से कई माता-पिता बच्चे के देर से बोलने को सामान्य मानकर इंतजार करते रहते हैं।
हालांकि, अगर बोलने में देरी के साथ बच्चे के व्यवहार या सामाजिक जुड़ाव में भी कुछ बदलाव नजर आ रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में स्पीच डिले के पीछे सुनने से जुड़ी समस्या या विकास से संबंधित अन्य कारण हो सकते हैं।
हर बच्चे का विकास एक जैसा नहीं होता
विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों में भाषा और बोलने की क्षमता उम्र के साथ धीरे-धीरे विकसित होती है। हालांकि, हर बच्चे की विकास गति अलग हो सकती है। इसलिए सिर्फ दूसरे बच्चों से तुलना करने के बजाय बच्चे के अपने विकास के पैटर्न पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
अगर बच्चा उम्र के मुताबिक अपेक्षित शब्द या वाक्य नहीं बोल पा रहा है और लंबे समय तक कोई सुधार भी नहीं दिख रहा, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।
देर से बोलने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
बच्चों में स्पीच डिले के कई संभावित कारण हो सकते हैं। कुछ बच्चों में सुनने की क्षमता कम होने के कारण भाषा सीखने और बोलने में परेशानी आती है।
इसके अलावा कान से जुड़ी समस्या, वोकल कॉर्ड, नर्वस सिस्टम या दिमाग के उन हिस्सों से संबंधित परेशानी भी भाषा के विकास को प्रभावित कर सकती है जो बोलने और समझने की प्रक्रिया से जुड़े होते हैं।
इसलिए बच्चे के देर से बोलने का कारण खुद से तय करने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
इन व्यवहारों को भी न करें नजरअंदाज
सिर्फ देर से बोलना ही ध्यान देने वाला संकेत नहीं है। अगर बच्चे में इसके साथ कुछ खास तरह के दोहराव वाले व्यवहार भी दिखाई दें, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर:
- बार-बार हाथ फड़फड़ाना
- बिना किसी स्पष्ट वजह के गोल-गोल घूमना
- खिलौने के पूरे हिस्से के बजाय किसी एक हिस्से, जैसे पहिए, से ही लगातार खेलना
- तेज आवाज या रोशनी पर असामान्य रूप से ज्यादा परेशान होना
- किसी खास तरह के कपड़े या चीज को छूने पर बहुत ज्यादा चिड़चिड़ापन दिखाना
इनमें से कोई एक व्यवहार दिखाई देना अपने आप में किसी बीमारी का प्रमाण नहीं है। लेकिन कई संकेत एक साथ और लगातार नजर आएं तो विशेषज्ञ से बात करना बेहतर है।
आई कॉन्टैक्ट और नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया पर दें ध्यान
अगर बच्चा बोलने में पीछे है और साथ ही आंखों में देखकर बातचीत करने से बचता है, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं देता या दूसरों के साथ बातचीत और जुड़ाव में कम रुचि दिखाता है, तो इन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए।
इसे केवल बच्चे के शर्मीले स्वभाव के तौर पर नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। ऐसे लक्षण लगातार दिखाई देने पर बाल रोग विशेषज्ञ या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर बच्चे की उम्र के हिसाब से उसकी भाषा और बोलने की क्षमता में लगातार देरी हो रही है या घर पर बातचीत और प्रोत्साहन देने के बावजूद सुधार नजर नहीं आ रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
खासकर जब स्पीच डिले के साथ आई कॉन्टैक्ट कम होना, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना या दोहराव वाले व्यवहार जैसे अन्य संकेत भी दिखाई दें, तब विशेषज्ञ से जल्द सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
बच्चे के विकास से जुड़ी किसी भी चिंता में समय पर मूल्यांकन और जरूरत के अनुसार सहायता लेना फायदेमंद हो सकता है। हर बच्चा अलग होता है, इसलिए तुलना करने के बजाय उसके विकास पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर सही विशेषज्ञ की मदद लेना सबसे महत्वपूर्ण है।

