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इंटर लेवल पर शिक्षकों का अकाल! 9 के 9 पद खाली, जानिए कैसे चल रही हैं छात्रों की कक्षाएं

इंटर लेवल पर शिक्षकों का अकाल! 9 के 9 पद खाली, जानिए कैसे चल रही हैं छात्रों की कक्षाएं

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं देने के दावे तो अक्सर किए जाते हैं, लेकिन जमीनी तस्वीर कई बार कुछ और ही कहानी बताती है। उत्तराखंड के नैनीताल से लेकर मध्य प्रदेश के दमोह तक छात्राओं को अपनी पढ़ाई और स्कूल तक पहुंचने की समस्या को लेकर खुद आवाज उठानी पड़ी।

एक तरफ नैनीताल के बेतालघाट स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में शिक्षकों की भारी कमी से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के दमोह में स्कूल तक जाने वाला करीब एक किलोमीटर का कच्चा रास्ता बारिश में कीचड़ से भर गया, जिसके बाद छात्राओं ने सड़क पर साइकिलें रखकर चक्काजाम कर दिया।

नैनीताल में शिक्षकों की कमी से परेशान छात्राएं

नैनीताल जिले के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, बेतालघाट में शिक्षकों की कमी छात्राओं के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। स्कूल में शिक्षकों के कई पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसी समस्या को लेकर 3 सितंबर को कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं की छात्राओं ने प्रदर्शन किया।

बताया गया कि स्कूल में शिक्षक के सभी 9 पद खाली हैं। इसके अलावा ग्रेजुएट स्तर के 5 पद भी रिक्त हैं। कुछ विषयों की पढ़ाई फिलहाल गेस्ट टीचर्स और PTR शिक्षकों के सहारे चल रही है।

'शिक्षक ही नहीं होंगे तो बेटियों का भविष्य कैसे बनेगा?'

खाली पदों पर जल्द नियुक्ति की मांग को लेकर छात्राओं ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों तक अपनी बात पहुंचाई। अभिभावक संघ के अध्यक्ष की अगुवाई में छात्राओं ने प्रदर्शन करते हुए सवाल उठाया कि जब स्कूल में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे, तो उनकी पढ़ाई और भविष्य कैसे बेहतर होगा?

छात्राओं ने सरकार और शिक्षा विभाग से सभी रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की।

कई महीनों से अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शेखर दानी ने बताया कि स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति के मुद्दे को लेकर वह पिछले कई महीनों से शिक्षा विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार समस्या उठाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

दानी ने कहा कि जिन बेटियों को किताब-कॉपी लेकर स्कूल में पढ़ाई करनी चाहिए, उन्हें अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने इसे सरकार और शिक्षा विभाग के लिए गंभीर संदेश बताया।

उनके मुताबिक बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है और लंबे समय तक पद खाली रखना छात्राओं के भविष्य के साथ अन्याय है।

2024 में भी उठ चुका है मामला

स्कूल में शिक्षकों की कमी का मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी छात्राओं की ओर से शिक्षकों की नियुक्ति की मांग उठाई गई थी। हालांकि, इसके बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

अब छात्राओं के प्रदर्शन का मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कई यूजर्स छात्राओं के हौसले की तारीफ कर रहे हैं और उन्हें 'रॉक स्टार' बताते हुए शाबाशी दे रहे हैं।

दमोह में सड़क के लिए छात्राओं ने किया चक्काजाम

इसी तरह मध्य प्रदेश के दमोह जिले में स्कूल तक पहुंचने वाले बदहाल रास्ते को लेकर छात्राओं ने अनोखे तरीके से विरोध जताया। ग्राम मझगुआ पतोल, थाना हटा में स्कूल जाने वाला करीब एक किलोमीटर लंबा रास्ता कच्चा है।

बारिश होते ही यह रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। ऐसे में विद्यार्थियों को रोजाना स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सड़क पर साइकिलें रखकर रोक दिया रास्ता

22 अगस्त 2026 को दोपहर करीब साढ़े 11 बजे विद्यार्थियों ने प्रदर्शन शुरू किया। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं गांव की मुख्य सड़क पर पहुंच गए और अपनी साइकिलें सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया।

तेज बारिश के बीच हुए इस प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर आवागमन प्रभावित हो गया। स्कूली ड्रेस में प्रदर्शन कर रही छात्राओं का वीडियो भी सोशल मीडिया पर रिकॉर्ड होकर वायरल हो गया।

ग्रामीण भी बच्चों के समर्थन में उतरे

विद्यार्थियों के प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने बच्चों की मांग को जायज बताया।

उनका कहना था कि यह करीब एक किलोमीटर का रास्ता केवल स्कूली बच्चों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आसपास के ग्रामीण और किसान भी इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। बारिश के मौसम में उन्हें भी कीचड़ और खराब सड़क के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर देखा रास्ता

मामले की सूचना मिलने के बाद कार्यपालिका मजिस्ट्रेट और तहसीलदार उमेश तिवारी मौके पर पहुंचे। पटवारी सुधीर राज भी वहां मौजूद रहे। तहसीलदार ने विद्यार्थियों के साथ स्कूल तक जाकर पूरे कच्चे रास्ते का निरीक्षण किया।

प्रशासन की ओर से तत्काल वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।

हालांकि छात्राओं और ग्रामीणों की मुख्य मांग अभी भी स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की है। उनका कहना है कि अस्थायी व्यवस्था से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। हर साल बारिश के दौरान होने वाली परेशानी से स्थायी राहत तभी मिलेगी, जब स्कूल तक पक्की सड़क का निर्माण किया जाएगा।

दोनों घटनाएं एक ही बात की ओर इशारा करती हैं—जब स्कूलों में जरूरी सुविधाएं और शिक्षक उपलब्ध नहीं होते, तो सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ता है।

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