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पीरियड्स में बार-बार पेशाब आने की क्या है वजह? हार्मोनल बदलाव से लेकर UTI तक, जानें कब बरतनी चाहिए सावधानी

पीरियड्स में बार-बार पेशाब आने की क्या है वजह? हार्मोनल बदलाव से लेकर UTI तक, जानें कब बरतनी चाहिए सावधानी

पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पेट में ऐंठन, कमर दर्द, ब्लोटिंग और थकान जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन कुछ महिलाओं को इस दौरान बार-बार पेशाब आने की समस्या भी होने लगती है। कई बार पेशाब की मात्रा ज्यादा होती है, तो कभी थोड़ी-सी पेशाब आने के बाद भी दोबारा वॉशरूम जाने का मन करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह मासिक धर्म के दौरान होने वाला सामान्य बदलाव है या किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत?दरअसल, मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इनका असर कुछ महिलाओं में ब्लैडर की संवेदनशीलता और पेशाब करने की आदत पर पड़ सकता है। हालांकि, बार-बार पेशाब आने के पीछे केवल हार्मोन ही जिम्मेदार नहीं होते। ज्यादा पानी पीना, चाय-कॉफी का सेवन, ब्लैडर से जुड़ी परेशानी और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) भी इसकी वजह हो सकते हैं।

1. पीरियड्स के दौरान हार्मोनल बदलाव

मासिक धर्म के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है। ये हार्मोन शरीर की कई प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। कुछ महिलाओं में मेंस्ट्रुअल साइकिल के अलग-अलग चरणों में पेशाब करने की आवृत्ति और अचानक पेशाब जाने की इच्छा में बदलाव देखा जा सकता है।

एक अध्ययन में भी पाया गया कि कुछ महिलाओं के यूरिनरी लक्षण मासिक धर्म चक्र के साथ बदलते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पीरियड्स में बार-बार पेशाब आने की समस्या हर महिला में हार्मोनल बदलावों के कारण ही होती है।

2. प्रोस्टाग्लैंडिन भी हो सकते हैं वजह?

पीरियड्स के दौरान शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन नाम के रासायनिक पदार्थ सक्रिय होते हैं। ये गर्भाशय की मांसपेशियों के संकुचन और मासिक धर्म में होने वाले दर्द में अहम भूमिका निभाते हैं।

इनके कारण पेट में ऐंठन और पेल्विक क्षेत्र में असहजता महसूस हो सकती है। हालांकि, प्रोस्टाग्लैंडिन सीधे तौर पर बार-बार पेशाब आने का कारण बनते हैं, इसके पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। इसलिए पेशाब की समस्या को केवल इन पदार्थों के प्रभाव से जोड़ना सही नहीं होगा।

3. ब्लोटिंग और ब्लैडर में दबाव

पीरियड्स के आसपास कई महिलाओं को पेट फूलने, गैस, कब्ज और निचले पेट में भारीपन की शिकायत होती है। इस दौरान पेल्विक क्षेत्र में असहजता भी महसूस हो सकती है।

जिन महिलाओं को पहले से ब्लैडर की संवेदनशीलता या ओवरएक्टिव ब्लैडर की समस्या है, उन्हें बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस हो सकती है। हालांकि, सामान्य ब्लोटिंग के कारण ही पेशाब की आवृत्ति बढ़ जाती है, ऐसा मानने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।

यदि पेशाब की समस्या हर महीने होती है और इसके साथ पेल्विक दर्द या ब्लैडर में दबाव भी महसूस होता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

4. ज्यादा पानी, चाय या कॉफी पीना

पीरियड्स के दौरान यदि आप सामान्य से ज्यादा पानी या अन्य तरल पदार्थ पी रही हैं, तो पेशाब की मात्रा बढ़ सकती है। यह शरीर की सामान्य प्रक्रिया है।

इसके अलावा चाय, कॉफी, कोला और एनर्जी ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन कुछ लोगों में पेशाब की जरूरत बढ़ा सकता है। कैफीन ब्लैडर की सक्रियता और अचानक पेशाब लगने की समस्या को भी बढ़ा सकता है।

ऐसे में कैफीन का सेवन सीमित करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, पानी पीना बंद न करें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।

5. कहीं यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) तो नहीं?

पीरियड्स के दौरान बार-बार पेशाब आने की समस्या को हमेशा सामान्य हार्मोनल बदलाव समझना सही नहीं है। इसकी वजह यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन यानी UTI भी हो सकती है। यह संक्रमण मूत्र मार्ग में बैक्टीरिया के पहुंचने से होता है।

UTI होने पर बार-बार पेशाब आने के अलावा कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं:

  • पेशाब करते समय जलन या दर्द होना।

  • बार-बार पेशाब लगना, लेकिन कम मात्रा में निकलना।

  • निचले पेट में दर्द या दबाव महसूस होना।

  • पेशाब का धुंधला या असामान्य गंध वाला होना।

  • पेशाब में खून आना।

यदि इन लक्षणों के साथ बुखार, ठंड लगना या पीठ के किनारे तेज दर्द भी हो, तो जल्द चिकित्सा सहायता लें। ये किडनी तक संक्रमण पहुंचने के संकेत हो सकते हैं।

पीरियड्स में बार-बार पेशाब आए तो क्या करें?

अगर यह समस्या केवल पीरियड्स के आसपास हल्के रूप में होती है और अपने आप ठीक हो जाती है, तो कुछ बातों का ध्यान रखा जा सकता है।

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।

  • चाय-कॉफी और अन्य कैफीन वाले पेय का सेवन कम करके देखें।

  • ध्यान दें कि समस्या हर महीने होती है या पूरे महीने बनी रहती है।

  • पेशाब में जलन, दर्द या असामान्य बदलाव होने पर डॉक्टर से जांच कराएं।

  • बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं न लें।

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

यदि बार-बार पेशाब आने की समस्या लगातार बनी रहती है, नींद प्रभावित करती है या इसके साथ जलन, दर्द अथवा पेशाब में खून आता है, तो डॉक्टर से संपर्क करें। बुखार, ठंड लगने या पीठ के किनारे तेज दर्द की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

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