Samachar Nama
×

विदिशा में कुपोषण के खिलाफ जंग: जिला अस्पताल में 229 एसएएम बच्चों का सफल इलाज

विदिशा, 25 अगस्त (आईएएनएस)। गंभीर तीव्र कुपोषण यानी (एसएएम) से जूझ रहे बच्चों के उपचार के लिए विदिशा जिला अस्पताल में इंटीग्रेटेड एसएएम मैनेजमेंट व्यवस्था के तहत प्रभावी तरीके से इलाज किया जा रहा है। इस व्यवस्था में बच्चों को केवल पोषण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उनकी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का उपचार, विशेष पोषण, पुनर्वास और डिस्चार्ज के बाद नियमित फॉलोअप भी किया जाता है। पिछले चार महीनों में जुलाई तक 203 बच्चों और चालू माह में 26 नए बच्चों समेत कुल 229 गंभीर कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया जा चुका है।

विदिशा, 25 अगस्त (आईएएनएस)। गंभीर तीव्र कुपोषण यानी (एसएएम) से जूझ रहे बच्चों के उपचार के लिए विदिशा जिला अस्पताल में इंटीग्रेटेड एसएएम मैनेजमेंट व्यवस्था के तहत प्रभावी तरीके से इलाज किया जा रहा है। इस व्यवस्था में बच्चों को केवल पोषण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उनकी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का उपचार, विशेष पोषण, पुनर्वास और डिस्चार्ज के बाद नियमित फॉलोअप भी किया जाता है। पिछले चार महीनों में जुलाई तक 203 बच्चों और चालू माह में 26 नए बच्चों समेत कुल 229 गंभीर कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया जा चुका है।

जिला अस्पताल में आने वाले अति कुपोषित बच्चों की स्थिति का आकलन करने के बाद उन्हें जरूरत के अनुसार पीडियाट्रिक वार्ड या पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में भर्ती किया जाता है। यहां बच्चे में मौजूद बुखार, खांसी, दस्त, डिहाइड्रेशन, सांस संबंधी परेशानी, शॉक सहित अन्य जटिलताओं का उपचार किया जाता है। साथ ही, कुपोषण की स्थिति को देखते हुए बच्चों को विशेष डाइट उपलब्ध कराई जाती है।

जिला अस्पताल विदिशा के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बृजेंद्र छारी ने बताया कि ज्यादातर बच्चे ओपीडी के माध्यम से एनआरसी तक पहुंचते हैं, जबकि कुछ बच्चे फील्ड से भी रेफर होकर आते हैं। बच्चे के गंभीर कुपोषित होने की स्थिति का पता लगाने के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत उसका वजन, लंबाई और एमयूएसी, यानी मध्य-ऊपरी बांह की परिधि, मापी जाती है। इन मानकों के आधार पर तय किया जाता है कि बच्चा एसएएम श्रेणी में आता है या नहीं।

उन्होंने बताया कि अभिभावकों को सरकार की उपचार और पोषण संबंधी व्यवस्था के बारे में जानकारी देकर बच्चों को भर्ती कराने के लिए प्रेरित किया जाता है। बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में करीब 14 दिनों तक विशेष निगरानी में रखा जाता है। इस दौरान उन्हें पौष्टिक आहार, बीमारी के अनुसार उपचार और पुनर्वास की सुविधा दी जाती है। सरकार की ओर से परिजनों को 120 रुपए प्रतिदिन वेज कॉम्पन्सेशन भी दिया जाता है।

बच्चे की प्रारंभिक स्वास्थ्य जटिलताएं नियंत्रित होने के बाद उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में शिफ्ट किया जाता है। एनआरसी में बच्चों को करीब 14 दिनों तक विशेष देखभाल दी जाती है और दिन में आठ बार पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाता है। केंद्र में बच्चों के लिए 20 बेड की व्यवस्था है। भोजन तैयार करने, टॉयलेट-बाथरूम और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध है।

डॉ. छारी ने बताया कि बच्चों के साथ आने वाली माताओं और परिजनों को भी नियमित रूप से पोषण एवं स्वच्छता के संबंध में जानकारी दी जाती है। उन्हें बताया जाता है कि बच्चे को किस तरह खाना खिलाना है, भोजन को ढककर रखना क्यों जरूरी है, खाना खिलाने से पहले हाथों को साबुन से धोना, बच्चों के नाखून काटना और साफ-सफाई का ध्यान रखना क्यों आवश्यक है। इन सभी बिंदुओं पर अभिभावकों को रोजाना समझाइश दी जाती है।

एनआरसी से डिस्चार्ज होने के बाद भी बच्चों की निगरानी जारी रहती है। बच्चों को दो महीने तक हर 15 दिन में फॉलोअप के लिए अस्पताल बुलाया जाता है। फॉलोअप के दौरान बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति की जांच की जाती है। जरूरत के अनुसार दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं और एनआरसी में तैयार किया गया खाद्य पैकेट भी दिया जाता है। इसके अलावा, बच्चों के इम्यूनाइजेशन की स्थिति भी देखी जाती है। यदि किसी बच्चे का कोई टीकाकरण छूटा हुआ है तो उसे पूरा कराने पर भी जोर दिया जाता है। डॉ. छारी ने बताया कि इस व्यवस्था के तहत अधिकतर बच्चे उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं।

डॉ. छारी ने बताया कि नर्सिंग स्टाफ की कमी को विभाग स्तर पर समायोजित किया जाता है। एनआरसी में दो कुक, एक केयरटेकर, और सफाई व्यवस्था के लिए कर्मचारी भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि स्टाफ की कमी के बावजूद टीम समन्वय के साथ काम कर रही है और बच्चों के उपचार में किसी तरह की लापरवाही न हो, इसका ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्यक्रम की निगरानी में प्रशासन की सक्रिय भूमिका है। कलेक्टर स्तर से भी इसकी नियमित निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम, प्रशासन, और परिजनों के समन्वय से गंभीर कुपोषित बच्चों को उपचार, पोषण, और फॉलोअप की एकीकृत सुविधा मिल रही है, जिससे अधिकतर बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं।

जिला अस्पताल विदिशा के शिशु विभाग प्रभारी डॉ. प्रमोद मिश्रा ने बताया कि पिछले चार महीनों के एनआरसी आंकड़ों के अनुसार जुलाई तक 203 बच्चे भर्ती हुए, जबकि चालू माह में 26 नए बच्चे भर्ती हुए हैं। इस तरह अब तक कुल 229 बच्चों का उपचार किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि जिला चिकित्सालय विदिशा में इंटीग्रेटेड एसएएम मैनेजमेंट के तहत बच्चे के उपचार को अलग-अलग स्तरों पर जोड़ा गया है। बच्चा पहले पीडियाट्रिक वार्ड या पीआईसीयू में भर्ती होता है। प्रारंभिक जटिलताएं नियंत्रित होने के बाद उसे एनआरसी में शिफ्ट किया जाता है। हालांकि, बच्चा वार्ड या पीआईसीयू में भर्ती रहने के दौरान भी उसकी पोषण संबंधी जरूरत के अनुसार विशेष डाइट एनआरसी से ही उपलब्ध कराई जाती है। डॉ. मिश्रा ने आगे बताया कि एसएएम मैनेजमेंट के निर्धारित प्रोटोकॉल के साथ बच्चे के पोषण का विशेष प्रबंधन किया जाता है।

--आईएएनएस

पीएसके/डीकेपी

Share this story

Tags