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वैक्सीन लगने से पहले ही पता चल सकता है कितना होगा असर? नई स्टडी में खुलासा

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। वैक्सीन हमारे शरीर को गंभीर बीमारियों से बचाने में अहम भूमिका निभाती है, लेकिन हर व्यक्ति के शरीर में वैक्सीन का असर एक जैसा नहीं होता। किसी में मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स बनता है, तो किसी में इसका असर अपेक्षाकृत कमजोर रह सकता है। अब वैज्ञानिकों ने यह समझने की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है कि आखिर ऐसा क्यों होता है।

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। वैक्सीन हमारे शरीर को गंभीर बीमारियों से बचाने में अहम भूमिका निभाती है, लेकिन हर व्यक्ति के शरीर में वैक्सीन का असर एक जैसा नहीं होता। किसी में मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स बनता है, तो किसी में इसका असर अपेक्षाकृत कमजोर रह सकता है। अब वैज्ञानिकों ने यह समझने की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है कि आखिर ऐसा क्यों होता है।

अमेरिका की एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी (एएसयू) के नेतृत्व में हुए एक नए अध्ययन में सामने आया है कि वैक्सीन लगने से पहले ही खून में मौजूद कुछ एंटीबॉडी संकेत यह बता सकते हैं कि किसी व्यक्ति का शरीर वैक्सीन को कितनी मजबूती से जवाब देगा।

इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से हजारों लोगों के ब्लड सैंपल का विश्लेषण किया। उनका मकसद यह पता लगाना था कि क्या वैक्सीन लेने से पहले शरीर की इम्यून स्थिति को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वैक्सीन के बाद मजबूत या कमजोर इम्यून रिस्पॉन्स बनेगा।

अध्ययन में 4,089 लोगों के कुल 8,687 ब्लड सैंपल शामिल किए गए। शोधकर्ताओं ने इन सैंपल में 185 अलग-अलग एंटीजन के खिलाफ मौजूद एंटीबॉडी की जांच की। इन एंटीजन में सामान्य वायरस और बैक्टीरिया के साथ-साथ ऑटोइम्यून बीमारियों से जुड़े कुछ टारगेट भी शामिल थे।

शोधकर्ताओं ने वैक्सीन लगने से पहले और उसके बाद लिए गए सैंपल की तुलना की। इसके बाद एआई और डीप-लर्निंग मॉडल की मदद से उन पैटर्न को खोजा गया, जो मजबूत और कमजोर वैक्सीन रिस्पॉन्स वाले लोगों के बीच अंतर कर सकते थे।

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले एएसयू के बायोडिजाइन इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक और वर्जीनिया जी. पाइपर सेंटर फॉर पर्सनलाइज्ड डायग्नोस्टिक्स के निदेशक जोशुआ लाबेयर के मुताबिक, कुछ ऐसे बायोमार्कर मिले हैं, जिन्हें एआई के जरिए देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वैक्सीन लगने से पहले ही कौन व्यक्ति बेहतर रिस्पॉन्स देने की संभावना रखता है।

रिसर्च में कुछ खास एंटीबॉडी का संबंध बेहतर कोविड-19 वैक्सीन रिस्पॉन्स से पाया गया। इनमें स्टैफिलोकोकस ऑरियस, आरएसवी और ह्यूमन रेस्पाइरोवायरस 3 जैसे सामान्य माइक्रोब्स के खिलाफ बनी एंटीबॉडी भी शामिल थीं।

वैज्ञानिकों ने इन्हें 'सेंटिनल एंटीबॉडी' कहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि ये एंटीबॉडी सीधे कोविड-19 वायरस से लड़ रही थीं। बल्कि इनका स्तर शरीर की पहले से मौजूद इम्यून तैयारी का संकेत दे सकता है।

वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि कुछ ऐसे लोग, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर माना जाता है, उनमें कोविड वैक्सीन के बाद एंटीबॉडी रिस्पॉन्स कम रहने की संभावना ज्यादा थी। इनमें एचआईवी, मल्टीपल मायलोमा, कुछ कैंसर, ऑटोइम्यून बीमारी, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसे मामलों से जुड़े लोग शामिल थे। लेकिन कमजोर इम्यून सिस्टम वाले हर व्यक्ति में वैक्सीन का रिस्पॉन्स कमजोर नहीं था। कुछ ऐसे लोगों ने भी मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स दिया।

दूसरी तरफ करीब 5 से 6 प्रतिशत स्वस्थ लोगों में भी वैक्सीन के बाद कमजोर रिस्पॉन्स देखा गया। यही वजह है कि केवल उम्र, लिंग, बीमारी या किसी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर यह तय करना मुश्किल है कि वैक्सीन किसी व्यक्ति पर कितनी अच्छी तरह काम करेगी।

इस रिसर्च की खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने सिर्फ एक या दो एंटीबॉडी को देखकर अनुमान लगाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने खून में मौजूद 185 एंटीबॉडी संकेतों का पूरा पैटर्न देखा।

एआई मॉडल ने इन सभी संकेतों को एक साथ जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश की कि किसी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम वैक्सीन के लिए कितना तैयार है।

अगर आगे की रिसर्च में इन नतीजों की पुष्टि होती है और दूसरे तरह के टीकों में भी इसी तरह के संकेत मिलते हैं, तो इसका इस्तेमाल भविष्य में वैक्सीन की रणनीति को ज्यादा व्यक्तिगत बनाने में किया जा सकता है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एबीएम

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