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40 की उम्र पार करते ही बढ़ जाता है इन साइलेंट किलर्स का खतरा, जान बचानी है तो जरूर कराएं ये 4 जरूरी टेस्ट

40 की उम्र पार करते ही बढ़ जाता है इन साइलेंट किलर्स का खतरा, जान बचानी है तो जरूर कराएं ये 4 जरूरी टेस्ट

लोग अक्सर 40 साल की उम्र को सिर्फ़ एक नंबर मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह वह दौर है जब शरीर में धीरे-धीरे बदलाव होने लगते हैं। देर रात तक जागने, गलत खान-पान और तनाव का असर भले ही पहले तुरंत न दिखा हो, लेकिन 40 की उम्र के बाद शरीर पर इन आदतों का बुरा असर पड़ने लगता है। ऐसे में, रेगुलर हेल्थ चेक-अप गंभीर बीमारियों का शुरुआती स्टेज में पता लगाने का सबसे असरदार तरीका हो सकता है।

**40 की उम्र के बाद शरीर में बड़े बदलाव होते हैं**

डॉ. शैली महाजन ने TOI को बताया कि 40 साल की उम्र के बाद पुरुषों के शरीर में कई तरह के बायोलॉजिकल बदलाव होने लगते हैं। मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, हार्मोन में बदलाव आते हैं और लंबे समय से चली आ रही लाइफस्टाइल की आदतों का असर सेहत पर दिखने लगता है। भारतीयों में जेनेटिक वजहें और शहरी जीवन से जुड़ा तनाव इन चुनौतियों को और बढ़ा देते हैं।

**डायबिटीज की समस्या**

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो बिना किसी लक्षण के लंबे समय तक शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। वज़न बढ़ना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और तनाव इसके मुख्य कारण माने जाते हैं। डॉ. महाजन का कहना है कि सिर्फ़ फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट पर निर्भर रहना काफ़ी नहीं है। HbA1c टेस्ट पिछले दो-तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर लेवल की जानकारी देता है, जिससे प्री-डायबिटीज और डायबिटीज से जुड़े खतरों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

**दिल की सेहत पर ध्यान देना ज़रूरी**

दिल की सेहत पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है। अक्सर, दिल से जुड़ी समस्याएं सालों तक बिना साफ़ लक्षणों के पनपती रहती हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन की रिसर्च से पता चलता है कि भारत में वयस्कों की मौत का एक मुख्य कारण दिल की बीमारी है। डॉ. शैली महाजन के अनुसार, पश्चिमी देशों के लोगों की तुलना में भारतीयों में दिल से जुड़ी समस्याएं कम उम्र में ही होने लगती हैं। इसलिए, लिपिड प्रोफाइल और ब्लड प्रेशर की रेगुलर जांच से भविष्य के खतरों का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

**विटामिन की कमी भी एक वजह है**

इसके अलावा, भारतीय पुरुषों में विटामिन D और विटामिन B12 की कमी भी आम समस्या बन गई है। लगातार थकान, मांसपेशियों में कमजोरी और ध्यान लगाने में मुश्किल जैसे लक्षणों को अक्सर उम्र या तनाव से जोड़कर देखा जाता है, जबकि असल में ये पोषण की कमी के कारण हो सकते हैं। डॉ. शैली महाजन के अनुसार, विटामिन D की कमी से हड्डियां कमज़ोर हो सकती हैं और कैल्शियम के अवशोषण (एब्जॉर्प्शन) पर बुरा असर पड़ सकता है। 

ऐसे टेस्ट जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए

40 साल की उम्र के बाद प्रोस्टेट, लिवर और किडनी की नियमित जांच को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। प्रोस्टेट से जुड़ी कई समस्याओं के लक्षण शुरुआती स्टेज में दिखाई नहीं देते हैं। इसी तरह, नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ और किडनी से जुड़ी बीमारियां अक्सर लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के बढ़ती रहती हैं।

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