ऑफिस में घंटों बैठना पड़ सकता है भारी! घुटनों की अकड़न को न करें नजरअंदाज, डॉक्टर्स ने बताया गंभीर बीमारी का पहला लक्षण
आजकल 30 से 35 साल की उम्र के कई कामकाजी लोग कमर दर्द, घुटनों में भारीपन और जोड़ों की जकड़न जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। खासकर आईटी और कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों को दिनभर कुर्सी पर बैठने के बाद शाम को उठते समय परेशानी महसूस हो सकती है। कई बार कमर सीधी करने में मुश्किल होती है, तो कभी घुटने भारी और अकड़े हुए लगते हैं।
ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब कोई भारी वजन नहीं उठाया और न ही चोट लगी, तो फिर जोड़ों में दर्द क्यों हो रहा है? इसकी एक संभावित वजह लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी और गलत पॉस्चर हो सकता है। हालांकि, लगातार दर्द को केवल डेस्क जॉब का नतीजा मानना सही नहीं है।
पारस हेल्थ, उदयपुर के सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. आशीष सिंघल के मुताबिक, लंबे समय तक बिना हिले-डुले बैठे रहने से मांसपेशियों में जकड़न और जोड़ों को सहारा देने वाली मांसपेशियों की सक्रियता प्रभावित हो सकती है। आइए समझते हैं कि डेस्क जॉब का शरीर पर क्या असर पड़ता है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए।
कुर्सी से उठते ही घुटने भारी क्यों महसूस होते हैं?
हमारे जोड़ों में सायनोवियल फ्लूइड नाम का प्राकृतिक तरल मौजूद होता है, जो जोड़ों की सतहों के बीच घर्षण कम करने और उन्हें सुचारू रूप से चलने में मदद करता है।
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक घुटनों को मोड़कर एक ही स्थिति में बैठा रहता है, तो घुटनों और आसपास की मांसपेशियों में अस्थायी जकड़न महसूस हो सकती है। ऐसे में कुर्सी से उठते समय घुटने भारी लग सकते हैं या शुरुआती कुछ कदम उठाने में परेशानी हो सकती है।
लगातार बैठे रहने से कूल्हों और कमर के आसपास की मांसपेशियों में भी अकड़न आ सकती है। यदि यह समस्या बार-बार होती है या दर्द बढ़ता जा रहा है, तो इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बैठने का गलत तरीका कैसे बढ़ाता है परेशानी?
लंबे समय तक बैठने के साथ गलत पॉस्चर भी कमर, गर्दन और कूल्हों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। खासकर इन आदतों से समस्या बढ़ सकती है:
1. स्क्रीन की ऊंचाई सही न होना: अगर लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन बहुत नीचे है, तो गर्दन आगे झुकाकर काम करना पड़ता है। इससे गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में तनाव बढ़ सकता है।
2. कुर्सी पर झुककर बैठना: लगातार आगे झुककर या पीठ को उचित सहारा दिए बिना बैठने से कमर के निचले हिस्से में परेशानी हो सकती है।
3. पैरों का सही स्थिति में न होना: यदि कुर्सी बहुत ऊंची है और पैर जमीन पर ठीक से नहीं टिकते, तो बैठने की स्थिति असहज हो सकती है। पैरों को लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रखने से भी अकड़न महसूस हो सकती है।
4. शरीर का वजन ज्यादा होना: अतिरिक्त वजन घुटनों पर पड़ने वाले दबाव को बढ़ा सकता है। ऐसे में पहले से मौजूद घुटनों के दर्द या अन्य समस्याओं के लक्षण ज्यादा महसूस हो सकते हैं।
8 घंटे की डेस्क जॉब के बाद 1 घंटा जिम करना काफी है?
कई लोग सोचते हैं कि दिनभर कुर्सी पर बैठने के बाद शाम को एक घंटे जिम करने से शारीरिक गतिविधि की कमी पूरी हो जाएगी। नियमित व्यायाम फायदेमंद है, लेकिन दिनभर लगातार बैठे रहने के बीच मिलने वाला छोटा-छोटा मूवमेंट भी महत्वपूर्ण है।
लंबे समय तक बैठे रहने के बाद अचानक बहुत भारी एक्सरसाइज शुरू करने के बजाय शरीर को धीरे-धीरे वार्म-अप करना बेहतर है। इससे मांसपेशियों को गतिविधि के लिए तैयार होने में मदद मिलती है।
डेस्क जॉब करने वाले लोग अपनी दिनचर्या में ये बदलाव कर सकते हैं:
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हर 30 से 60 मिनट में उठें: कुछ मिनट खड़े हों, हल्का चलें या अपनी सुविधा के अनुसार शरीर को स्ट्रेच करें।
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फोन पर बात करते समय टहलें: यदि काम की स्थिति अनुमति देती है, तो लंबी कॉल के दौरान कुछ देर चलते रहें।
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बैठने की स्थिति बदलते रहें: लगातार एक ही मुद्रा में बैठे रहने से बचें।
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पैरों को हल्का मूवमेंट दें: बैठे-बैठे पंजों को ऊपर-नीचे करना और पैरों को आराम से सीधा करना उपयोगी हो सकता है।
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नियमित व्यायाम करें: पैदल चलना, हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और शरीर की क्षमता के अनुसार स्ट्रेचिंग को दिनचर्या में शामिल करें।
ऑफिस में बैठने का सही तरीका क्या है?
कमर और गर्दन पर पड़ने वाला अनावश्यक दबाव कम करने के लिए वर्कस्टेशन को सही तरीके से व्यवस्थित करना जरूरी है।
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पीठ को कुर्सी का सहारा दें और कमर को आरामदायक स्थिति में रखें।
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कंप्यूटर स्क्रीन को आंखों के लगभग समान स्तर पर रखें।
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कीबोर्ड और माउस को ऐसी जगह रखें, जहां हाथों और कंधों पर ज्यादा तनाव न पड़े।
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पैरों को जमीन पर सपाट टिकाएं या जरूरत पड़ने पर फुटरेस्ट का इस्तेमाल करें।
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लगातार काम करने के बजाय बीच-बीच में छोटे ब्रेक लें।
ध्यान रखें कि केवल सही पॉस्चर में बैठे रहना ही पर्याप्त नहीं है। लंबे समय तक बैठे रहने के दौरान स्थिति बदलना और नियमित रूप से चलना भी जरूरी है।
कमर और घुटनों के दर्द को कब गंभीरता से लें?
काम के बाद हल्की थकान या कुछ समय की जकड़न हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती। लेकिन कुछ लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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घुटनों या कमर में लगातार या बढ़ता हुआ दर्द।
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जोड़ों के आसपास सूजन, लालिमा या गर्माहट।
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सुबह उठने के बाद लंबे समय तक बनी रहने वाली जकड़न।
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चलने, सीढ़ियां चढ़ने या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी।
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घुटने का अचानक बहुत दर्द करना या उस पर वजन न रख पाना।
यदि कमर दर्द के साथ पैरों में कमजोरी, जांघों के बीच या निजी अंगों के आसपास सुन्नपन, या पेशाब-पाखाने पर नियंत्रण में बदलाव हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
लगातार दर्द होने पर स्वयं से दर्द निवारक दवाएं लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराएं। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ मांसपेशियों की ताकत, जोड़ों की गतिविधि और अन्य संभावित कारणों का मूल्यांकन कर सकते हैं।
डेस्क जॉब करने वालों के लिए जरूरी सलाह
लंबे समय तक कुर्सी पर बैठना अपने आप में बीमारी नहीं है, लेकिन लगातार निष्क्रिय रहना, गलत पॉस्चर और व्यायाम की कमी कमर व जोड़ों की परेशानी बढ़ा सकते हैं। इसलिए काम के दौरान नियमित ब्रेक लेना, सही तरीके से बैठना और रोजाना शारीरिक गतिविधि बनाए रखना फायदेमंद है।

