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शरीर को डिटॉक्स और रीढ़ को लचीला बनाता है अर्ध मत्स्येन्द्रासन, जानें लाभ

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। आधुनिक जीवनशैली और घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। योग के कई आसनों में से अर्ध मत्स्येंद्रासन एक ऐसा आसन है, जो हमारे पूरे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, पेट के अंगों को सही तरीके से काम करने में मदद करता है।

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। आधुनिक जीवनशैली और घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। योग के कई आसनों में से अर्ध मत्स्येंद्रासन एक ऐसा आसन है, जो हमारे पूरे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, पेट के अंगों को सही तरीके से काम करने में मदद करता है।

अर्ध मत्स्येंद्रासन, हठयोग का एक प्रमुख और महत्वपूर्ण आसन है, जिसे महान योगी और हठयोग के प्रवर्तकों में से एक, महर्षि मत्स्येंद्रनाथ के नाम पर रखा गया।

संस्कृत में 'अर्ध' का अर्थ आधा, 'मत्स्य' का अर्थ मछली और 'इंद्र' का अर्थ राजा होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर की सुप्त ऊर्जा जागृत होती है और रीढ़ का स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है। यह आसन केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन प्राप्त करने की एक वैज्ञानिक विधि है।

यह एक प्रमुख 'ट्विस्टिंग' (मोड़ने वाला) योगासन है, जो न केवल शरीर की जकड़न को दूर करता है बल्कि आंतरिक अंगों की मालिश कर शरीर को डिटॉक्स (विषमुक्त) करने में भी मदद करता है। आइए, इस प्राचीन और लाभकारी आसन के महत्व, सही तकनीक और स्वास्थ्य लाभों को विस्तार से समझें।

हठयोग प्रदीपिका में मूल रूप से मत्स्येंद्रासन (पूर्ण मत्स्येंद्रासन) का वर्णन मिलता है। आधुनिक योग अभ्यास में इसी आसन को सरल और सुलभ बनाने के लिए इसके आधे रूप यानी अर्ध मत्स्येंद्रासन का विकास किया गया। इस आसन का नाम नाथ संप्रदाय के महान योगी मत्स्येंद्रनाथ के नाम पर रखा गया है।

अर्ध मत्स्येंद्रासन करने का तरीका भी ज्यादा कठिन नहीं होता और नियमित अभ्यास करने पर इसके परिणाम साफ नजर आने लगते हैं। इस आसन को करने के दौरान शरीर को आधा मोड़ते हैं, जिससे शरीर में खून का संचार बेहतर हो जाता है और ऊर्जा का प्रवाह भी बढ़ता है। यही वजह है कि इसे सबसे बेहतरीन आसनों में से एक माना जाता है।

इसके अलावा, यह आसन मधुमेह के मरीजों के लिए भी मददगार माना जाता है। पेट के हिस्से में खिंचाव होने से अग्न्याशय (पैंक्रियास) की कार्यक्षमता बेहतर होती है, जिससे इंसुलिन का स्राव संतुलित होता है। हालांकि, मधुमेह से जुड़े किसी भी अभ्यास को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम

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