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दवाओं के साथ शराब पीने के गंभीर नुकसान: जानें किन 10 स्थितियों में जहर बन सकती है शराब

दवाओं के साथ शराब पीने के गंभीर नुकसान: जानें किन 10 स्थितियों में जहर बन सकती है शराब

पार्टी या किसी खास मौके पर शराब पीने से पहले ज्यादातर लोग यह नहीं सोचते कि इसका उनकी मौजूदा सेहत या चल रही दवाइयों पर क्या असर पड़ेगा। कई लोगों को लगता है कि एक-दो ड्रिंक से कोई खास नुकसान नहीं होगा, लेकिन शराब और कुछ दवाओं का कॉम्बिनेशन गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है। शराब कुछ दवाओं के असर को बदल सकती है और नींद, चक्कर, ब्लीडिंग या दूसरे साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ा सकती है।

आइए जानते हैं ऐसे 10 हालात, जब शराब से दूरी बनाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

1. कुछ एंटीबायोटिक्स लेते समय

हर एंटीबायोटिक के साथ शराब का एक जैसा रिएक्शन नहीं होता, लेकिन मेट्रोनिडाजोल और टिनिडाजोल जैसी दवाओं के साथ शराब से पूरी तरह बचने की सलाह दी जाती है। इनके साथ शराब लेने पर मतली, उल्टी, पेट दर्द, सिरदर्द, चक्कर, गर्माहट और तेज या अनियमित धड़कन जैसी परेशानियां हो सकती हैं। मेट्रोनिडाजोल खत्म करने के बाद भी 48 घंटे और टिनिडाजोल के बाद 72 घंटे तक शराब से बचने की सलाह दी जाती है।

कुछ अन्य दवाओं, जैसे लाइनजोलिड और डॉक्सीसाइक्लिन, के साथ भी शराब से सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसलिए एंटीबायोटिक लेते समय डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पूछना बेहतर है।

2. डिप्रेशन या एंग्जायटी की दवाओं के दौरान

एंटीडिप्रेसेंट और कुछ एंग्जायटी की दवाओं के साथ शराब लेने से उनींदापन, चक्कर और सोचने-समझने की क्षमता पर असर बढ़ सकता है। कुछ मामलों में शराब दवा के असर को भी प्रभावित कर सकती है और डिप्रेशन या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को और बिगाड़ सकती है।

इसलिए ऐसी दवाएं लेने वाले लोगों को शराब पीने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

3. हाई ब्लड प्रेशर होने पर

अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो ज्यादा शराब पीने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसके अलावा कुछ BP की दवाओं के साथ शराब लेने पर चक्कर, कमजोरी या ब्लड प्रेशर में जरूरत से ज्यादा गिरावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से बहुत ज्यादा शराब पी रहा है, तो उसे अचानक शराब बंद करने के बजाय डॉक्टर की निगरानी में इसे कम करना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है।

 4. दर्द की दवाएं लेते समय

पैरासिटामोल, इबुप्रोफेन, एस्पिरिन और दूसरी दर्द निवारक दवाओं के साथ शराब लेने में सावधानी जरूरी है। कुछ दवाओं के साथ शराब पेट में जलन, अल्सर या ब्लीडिंग का खतरा बढ़ा सकती है, जबकि कुछ कॉम्बिनेशन लिवर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।

खासकर अगर आप नियमित रूप से पेनकिलर लेते हैं या शराब का सेवन ज्यादा करते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

5. प्रेग्नेंसी की प्लानिंग के दौरान

अगर आप गर्भधारण की योजना बना रहे हैं, तो शराब से दूरी रखना बेहतर है। खासकर गर्भावस्था के दौरान शराब का कोई सुरक्षित स्तर स्थापित नहीं है। शराब गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकती है और FASD जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती है।

जो कपल्स फैमिली प्लानिंग कर रहे हैं, वे शराब के सेवन को लेकर अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह ले सकते हैं।

6. सिर में चोट या Concussion के बाद

सिर पर चोट या concussion के बाद दिमाग को रिकवर होने में समय लगता है। इस दौरान शराब लेने से चक्कर, नींद और संतुलन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे दोबारा गिरने या चोट लगने का खतरा भी बढ़ सकता है।

इसलिए सिर की चोट के बाद दोबारा शराब शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

 7. IVF या दूसरे Fertility Treatment के दौरान

IVF जैसे fertility treatment के दौरान शराब का सेवन प्रेग्नेंसी के परिणामों को प्रभावित कर सकता है। इसीलिए उपचार के दौरान शराब से बचने की सलाह दी जाती है।

अगर आप IVF या किसी अन्य fertility treatment से गुजर रहे हैं, तो शराब को लेकर अपने fertility specialist की सलाह को प्राथमिकता दें।

 8. प्रेग्नेंसी के दौरान

गर्भावस्था में शराब से पूरी तरह बचना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। शराब मां के खून से प्लेसेंटा के जरिए बच्चे तक पहुंच सकती है और भ्रूण के विकास को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे miscarriage, समय से पहले जन्म, कम वजन और Fetal Alcohol Spectrum Disorder (FASD) जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

9. स्ट्रोक के बाद रिकवरी के दौरान

स्ट्रोक के बाद कई मरीजों को ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिनके साथ शराब का सेवन जोखिम बढ़ा सकता है। खासकर  वारफरिन जैसी blood-thinning medicine के साथ शराब लेने से ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है।

स्ट्रोक के बाद शराब दोबारा शुरू करने का फैसला डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए।

10. स्तनपान कराने के दौरान

शराब मां के खून से breast milk में भी पहुंच सकती है। इसलिए स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए शराब से बचना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

अगर कभी शराब का सेवन किया गया हो, तो NHS के अनुसार आम तौर पर एक ड्रिंक के बाद कम से कम 2 घंटे इंतजार करने से बच्चे तक शराब के संपर्क को कम करने में मदद मिल सकती है; मात्रा बढ़ने पर अधिक समय लग सकता है। शराब पीने के बाद बच्चे के साथ बिस्तर या सोफे पर सोना भी बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। शराब और दवाइयों का असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। इसलिए किसी बीमारी, गर्भावस्था, fertility treatment या नियमित दवा के दौरान सिर्फ यह मान लेना कि “थोड़ी शराब से कुछ नहीं होगा”, सही नहीं है। कोई भी दवा लेते समय शराब पीने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें। अपनी मर्जी से जरूरी दवा बंद करना या शराब के लिए दवा का समय बदलना भी उचित नहीं है।
 

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