रोग से युद्ध नहीं, दिनचर्या को शुद्ध करके पाया जा सकता है छुटकारा
नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। थोड़ा भी बीमार होने पर बदलते मौसम को दोष दिया जाता है। बदलता मौसम भी बीमारी का कारण है, लेकिन असली जड़ हमारे शरीर के अंदर होती है, जो बाहर के वातावरण के साथ मिलकर शरीर को बीमार करती है।
तुरंत दवा के प्रभाव के साथ बीमारी को कम करने की कोशिश की जाती है, लेकिन जड़ के बारे में कम ही लोग बात करते हैं या उसे समझने की कोशिश करते हैं। सभी रोगों की एक ही जड़ है, वो है जीवनशैली।
खराब जीवनशैली शरीर को बुरे तरीके से प्रभावित करती है और रोगों का घर बना देती है। कई बार बीमारी शरीर के अंदर पनप रही होती है लेकिन उसके लक्षण बहुत देर में समझ आते हैं। आज हम आपको अष्टांग योग में वर्णित स्वास्थ्य सिद्धांत और दिनचर्या के बारे में बताएंगे, जिससे जीवनशैली में बदलाव लाकर शरीर को रोगों से दूर रखा जा सकता है। अष्टांग हृदय किसी दवा के बारे में नहीं बताता है, बल्कि जीवन जीने की विधि सिखाता है। बीमारी आने से पहले कैसे जीना है, ये सिखाता है। पहले जानते हैं कि दिन की शुरुआत कैसे होनी चाहिए।
स्वस्थ शरीर के लिए न दवा की जरूरत है और न ही व्यायाम की; इसके लिए जरूरत है सुबह सूर्योदय से पहले जागने की। प्रकृति हमें सिखाती है कि जल्दी उठना कितना फायदेमंद है। सुबह उठते ही पहला काम रात भर शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना है। हल्का गुनगुना पानी पीएं और शरीर की गंदगी को बाहर निकालें। शरीर में जमा आम हॉर्मोन को असंतुलित कर सकते हैं। सुबह का गुनगुना पानी पेट की पाचन अग्नि को तेज करता है और भूख अच्छे से लगती है।
किसी भी तरह के भोजन से पहले मुख की सफाई बहुत जरूरी है। मुख और जिह्वा की सफाई सिर्फ सौंदर्य से जुड़ी नहीं होती है, बल्कि इसका कनेक्शन पेट से होता है। जीभ पर जमी परत और मुंह के कीटाणु पेट को कई रोग दे सकते हैं। इसके साथ ही मुख और जिह्वा को साफ करने के लिए ऑयल पुलिंग भी करना जरूरी है। इससे दांतों को मजबूती मिलती है और पीलेपन से छुटकारा मिलता है।
भोजन से पहले शरीर के लिए हल्का व्यायाम भी जरूरी है। व्यायाम शरीर को थकाता नहीं है, बल्कि नई ऊर्जा का प्रवाह करता है। इससे शरीर के हर हिस्से में रक्त और ऑक्सीजन सही मात्रा में पहुंचती है। इसके साथ ही प्यास लगने पर खूब सारा पानी और आहार को औषधि की तरह लें।
--आईएएनएस
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