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क्या आप जानते हैं सेल्फ फटिंलिटी मसाज के बारे में, इस मसाज से हो सकते हैं महिलाओं को ये फायद

जयपुर हेल्थ। फर्टिलिटी मसाज एक तरीके से आपके प्रजनन क्षमता को बढ़ाने का तरीका है। इस मसाज में आपके पैरों के आसपास कुछ एक्यूप्रेशर बिंदुओं को भी इस्तेमाल किया जाता है। विशेष रूप से आंतरिक और बाहरी टखने, जो गर्भाशय, अंडाशय और अन्य प्रजनन अंगों के आसपास होते हैं। इसमें मौजूद पैरों की मसाज को
क्या आप जानते हैं सेल्फ फटिंलिटी मसाज के बारे में, इस मसाज से हो सकते हैं महिलाओं को ये फायद

जयपुर हेल्थ। फर्टिलिटी मसाज एक तरीके से आपके प्रजनन क्षमता को बढ़ाने का तरीका है। इस मसाज में आपके पैरों के आसपास कुछ एक्यूप्रेशर बिंदुओं को भी इस्तेमाल किया जाता है।क्या आप जानते हैं सेल्फ फटिंलिटी मसाज के बारे में, इस मसाज से हो सकते हैं महिलाओं को ये फायद

विशेष रूप से आंतरिक और बाहरी टखने, जो गर्भाशय, अंडाशय और अन्य प्रजनन अंगों के आसपास होते हैं। इसमें मौजूद पैरों की मसाज को रिफ्लक्सोलॉजी कहा जाता है। वैसे तो बहुत ही कम महिलाएं इस तकनीक का इस्तेमाल करती है, लेकिन जो महिलाएं इसका इस्तेमाल करती है उनको ये तकनीक काफी फायदा पहुंचाती है।क्या आप जानते हैं सेल्फ फटिंलिटी मसाज के बारे में, इस मसाज से हो सकते हैं महिलाओं को ये फायद

जो महिलाएं  नियमित रूप से इस मसाज का इस्तेमाल करती हैं, उनकी न सिर्फ प्रजनन क्षमता बढ़ती है बल्कि प्रजनन प्रणाली भी बेहतर होती है। जिन महिलाओं का गर्भाशय टेढ़ा या फिर झुका हुआ होता है उन महिलाओं को गर्भधारण करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अगर वो महिलाएं फर्टिलिटी मसाज को अपनाती हैं तो वो इस समस्या से छुटकारा पा सकती हैं।क्या आप जानते हैं सेल्फ फटिंलिटी मसाज के बारे में, इस मसाज से हो सकते हैं महिलाओं को ये फायद

आपको शायद ये नहीं पता होगा कि इसको करने का तरीका क्या है या फिर इसे कैसे किया जाए। इसके फायदे और इसकी जानकारी के बाद ये जानना बहुत जरूरी है कि आपको ये मसाज कैसे करनी है। आपको बता दें कि गर्भाशय मूत्राशय के पीछे पेल्विक कैविटी के नीचे वाले हिस्से में होता है।क्या आप जानते हैं सेल्फ फटिंलिटी मसाज के बारे में, इस मसाज से हो सकते हैं महिलाओं को ये फायद

इस हिस्से में मालिश करने से आपके टेढ़े गर्भाशय को सीधे होने में मदद मिलती है और आपका रक्त संचार भी सही होता है। सेल्फ मसाज के जरिये भीतरी हिस्से में ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह होता है जिससे अण्डों की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ता है।

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