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पाचन से लेकर महिलाओं के स्वास्थ्य तक, जानें कैसे नागरमोथा रखता है आपकी सेहत का ख्याल?

नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। नागरमोथा अक्सर खेतों या बगीचों में खरपतवार की तरह उगता है, लेकिन इसके अंदर कई अद्भुत औषधीय गुण छुपे हैं। आयुर्वेद में इसे पाचन, वजन नियंत्रण, त्वचा, महिलाओं के स्वास्थ्य और बुखार जैसी समस्याओं में बेहद लाभकारी माना गया है।
पाचन से लेकर महिलाओं के स्वास्थ्य तक, जानें कैसे नागरमोथा रखता है आपकी सेहत का ख्याल?

नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। नागरमोथा अक्सर खेतों या बगीचों में खरपतवार की तरह उगता है, लेकिन इसके अंदर कई अद्भुत औषधीय गुण छुपे हैं। आयुर्वेद में इसे पाचन, वजन नियंत्रण, त्वचा, महिलाओं के स्वास्थ्य और बुखार जैसी समस्याओं में बेहद लाभकारी माना गया है।

सबसे पहले बात करें पाचन तंत्र की। नागरमोथा खाने से भूख बढ़ती है और पाचन बेहतर होता है। अगर आपको मंदाग्नि, यानी कम भूख लगना या पेट में मरोड़, दस्त जैसी समस्याएं हैं, तो यह जड़ी-बूटी बहुत मददगार है। इसे शहद या गुनगुने पानी के साथ लेना सबसे असरदार तरीका माना जाता है। यह पेट के हानिकारक कीड़ों को भी खत्म करने में मदद करता है।

वजन घटाने में भी नागरमोथा काम आता है। इसमें मौजूद एंटी-ओबेसिटी गुण शरीर में जमा अतिरिक्त फैट को कम करने में मदद करते हैं। यानी अगर आप वजन नियंत्रण पर ध्यान दे रहे हैं तो यह आपके लिए एक प्राकृतिक साथी बन सकता है।

त्वचा और सौंदर्य के लिए भी यह काफी लाभकारी है। इसकी खुशबू और एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा को साफ और स्वस्थ बनाए रखते हैं। मुंहासे और दाग-धब्बे कम करने के लिए इसका लेप लगाया जा सकता है।

वहीं, खुजली या त्वचा संक्रमण होने पर इसके काढ़े से प्रभावित हिस्से को धोना लाभकारी होता है।

महिलाओं के स्वास्थ्य में भी इसका महत्व कम नहीं है। मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को कम करने में यह मदद करता है और अनियमित पीरियड्स को संतुलित करने में सहायक होता है।

साथ ही, नागरमोथा बुखार को कम करने में भी उपयोगी है। पुराने या बार-बार आने वाले बुखार में इसका काढ़ा शरीर के तापमान को सामान्य करने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

नागरमोथा में औषधीय गुण मुख्य रूप से इसकी जड़ और छोटे गांठ वाले ट्यूबर में पाए जाते हैं। इन्हें सुखाकर या ताजा रूप में चूर्ण, काढ़ा, तेल या लेप बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। पत्तियां और तना भी इस्तेमाल होते हैं, लेकिन उनका असर जड़ जितना नहीं होता।

--आईएएनएस

पीआईएम/एबीएम

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