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नो-ब्लॉकेज हार्ट अटैक: नसों में रुकावट के बिना भी कैसे आता है अटैक? जानें छिपे हुए लक्षण और बचाव

नो-ब्लॉकेज हार्ट अटैक: नसों में रुकावट के बिना भी कैसे आता है अटैक? जानें छिपे हुए लक्षण और बचाव

आमतौर पर हार्ट अटैक का नाम सुनते ही दिमाग में धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा होने और ब्लॉकेज की तस्वीर आती है। लेकिन हर हार्ट अटैक में बड़ी धमनी का स्पष्ट ब्लॉकेज जरूरी नहीं होता। कुछ मामलों में कोरोनरी धमनियों में बड़ी रुकावट दिखाई नहीं देती, फिर भी हृदय की मांसपेशियों तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और हार्ट अटैक हो सकता है।इस स्थिति को अक्सर MINOCA (Myocardial Infarction with Non-Obstructive Coronary Arteries) कहा जाता है। यह कोई एक बीमारी नहीं बल्कि हार्ट अटैक के पीछे मौजूद अलग-अलग कारणों का समूह है।

बिना ब्लॉकेज हार्ट अटैक कैसे आता है?

कोरोनरी आर्टरीज में ब्लॉकेज न होने के बावजूद हार्ट अटैक के कई संभावित कारण हो सकते हैं। इनमें कोरोनरी आर्टरी स्पाज्म, यानी नस का अचानक सिकुड़ जाना, एक कारण हो सकता है।

इसके अलावा किसी छोटे क्लॉट का अस्थायी रूप से रक्त प्रवाह रोकना, धमनियों की अंदरूनी परत में समस्या या स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डिसेक्शन (SCAD) जैसी स्थितियां भी भूमिका निभा सकती हैं।

कुछ मामलों में हृदय की ऑक्सीजन की जरूरत और उसे मिलने वाली ऑक्सीजन के बीच असंतुलन भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए केवल यह मान लेना सही नहीं है कि एंजियोग्राफी में बड़ी ब्लॉकेज नहीं दिखी तो दिल पूरी तरह सुरक्षित है।

कौन से लक्षण नजरअंदाज न करें?

नो-ब्लॉकेज हार्ट अटैक के लक्षण आम हार्ट अटैक जैसे ही हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • छाती में दबाव, भारीपन या दर्द
  • दर्द का हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक पहुंचना
  • अचानक सांस फूलना
  • ठंडा पसीना आना
  • चक्कर या कमजोरी महसूस होना
  • मतली या उल्टी
  • असामान्य और अचानक थकान

कुछ लोगों, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों में लक्षण अपेक्षाकृत कम स्पष्ट हो सकते हैं। सिर्फ गैस, एसिडिटी या थकान समझकर इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

किन लोगों में खतरा बढ़ सकता है?

हार्ट अटैक का जोखिम सिर्फ ब्लॉकेज से तय नहीं होता। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता जैसे कई कारक दिल की बीमारी का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

कुछ विशेष स्थितियों में कोरोनरी स्पाज्म या SCAD जैसी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए किसी व्यक्ति को पहले से हार्ट की समस्या न होने का मतलब यह नहीं कि उसे अचानक होने वाले कार्डियक इवेंट का कोई खतरा नहीं है।

बचाव के लिए क्या करें?

दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच, संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से दूरी मददगार हो सकती है।

अगर डॉक्टर ने पहले से कोई दवा लिखी है तो उसे अपनी मर्जी से बंद या बदलना नहीं चाहिए। परिवार में कम उम्र में हार्ट डिजीज का इतिहास हो या कोई अन्य जोखिम कारक हो, तो डॉक्टर से समय-समय पर जांच और व्यक्तिगत सलाह लेना बेहतर है।

छाती में दर्द हो तो क्या करें?

अगर अचानक छाती में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, चक्कर या दर्द का हाथ/जबड़े तक फैलना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे गैस या सामान्य थकान मानकर इंतजार न करें। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

महत्वपूर्ण: बिना बड़ी ब्लॉकेज के होने वाला हार्ट अटैक भी गंभीर स्थिति है। इसके कारण की पुष्टि ECG, ब्लड टेस्ट, इमेजिंग और जरूरत के अनुसार अन्य हृदय जांचों से डॉक्टर करते हैं। खुद से निष्कर्ष निकालने के बजाय लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना सबसे जरूरी है।

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