Samachar Nama
×

नया अध्ययन ब्राज़ील में कान के मोम (Earwax) से कैंसर की शुरुआती पहचान संभव 

Ear Wax

ब्राज़ील के फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ गोइअस (UFG) में वैज्ञानिकों ने एक ऐसे नए और प्रभावी परीक्षण (Cerumenogram) को विकसित किया है, जो कान के मोम (earwax) के नमूने के आधार पर कैंसर की शुरुआती पहचान करने में मदद कर सकता है। यह अध्ययन 2025 में प्रकाशित हुआ और इसे 2025 Capes पुरस्कार में सम्मानित भी किया गया है, जो शोध की गुणवत्ता और उपयोगिता को दर्शाता है।

इस शोध के अनुसार कान के मोम में मौजूद रासायनिक तत्वों का विश्लेषण करने से शरीर के अंदर चल रही बीमारी, खासकर कैंसर, के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं। अगर शरीर स्वास्थ्य है तो earwax की बनावट व रसायनिक संरचना एक तरह की होती है, लेकिन जब शरीर में कोई गंभीर समस्या होती है तो इसमें बदलाब आता है, जिसे वैज्ञानिक पहचान सकते हैं। इस तरह के परीक्षण को सरल, कम लागत, दर्द रहित, और नॉन-इनवेसिव माना गया है।


 

शोध के मुख्य समन्वयक नेल्सन एंटोनियोसी फिल्हो (Nelson Antoniosi Filho) के अनुसार, इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह कैंसर के बहुत शुरुआती चरणों में भी बदलाव पहचान सकता है, जिससे मरीजों को समय रहते इलाज मिल सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। उन्होंने कहा, “यह एक सरल, किफायती, व्यावहारिक और दर्द रहित तरीका है जो मरीज को अस्पतालों तक दौड़ने से बचा सकता है।”

यह शोध प्रोजेक्ट शुरू में डायबिटीज, दवाओं या कीटनाशकों की विषाक्तता का पता लगाने के लिए काम में लिया जाता था, लेकिन बाद में इसे पशु चिकित्सा विज्ञान में भी लागू किया गया, जहाँ कुत्तों में कैंसर पहचानने के लिए भी इसका इस्तेमाल हुआ। इसके सकारात्मक परिणामों से प्रेरित होकर शोध को मनुष्यों पर भी परीक्षण करने का निर्णय लिया गया।

इस परियोजना में कुल 751 स्वयंसेवियों के耳wax नमूने लिए गए; जिनमें से 531 लोग पहले से कैंसर के इलाज में थे और बाकी 220 लोगों के पास कैंसर का कोई पूर्व निदान नहीं था। शोध के परिणामों से पता चला कि कैंसर ग्रस्त लोगों के earwax में विशिष्ट असामान्य तत्व पाए गए, जबकि 220 स्वास्थ्य लोगों में केवल पांच ही नमूनों में असामान्य संकेत मिले और बाद की जांच में पता चला कि उन सभी में कैंसर था। यह सफलता इस तकनीक की विश्वसनीयता को दर्शाती है।

हालाँकि यह परीक्षण अभी ब्राज़ील के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली (SUS) में मुफ्त उपलब्ध नहीं है। फिलहाल यह परीक्षण निजी स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों में ही शुरू होगा, क्योंकि सरकारी अनुमोदन प्रक्रिया जारी है। फिल्हो के अनुसार, शुरुआत विश्वविद्यालयों और शोध केंद्रों से होना चाहिए, और बाद में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में विस्तारित हो सकता है।

उद्योग विशेषज्ञ और शोधकर्ता यह भी जानना चाह रहे हैं कि क्या इस टेस्ट को अन्य बीमारियों की पहचान जैसे अल्ज़ाइमर, पार्किंसंस और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फिल्हो के अनुसार, ये अध्ययन चल रहे हैं और अगले वर्ष तक इन पर अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

यह शोध साबित करता है कि ब्राज़ील में सार्वजनिक संस्थानों में चल रहा विज्ञान और अनुसंधान कैसे सरल और रचनात्मक तरीकों से चिकित्सा विज्ञान में क्रांति ला सकता है। Cerumenogram जैसे परीक्षण भविष्य में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की पहचान को और भी आसान, किफायती और व्यापक बना सकते हैं।

Share this story

Tags