Medical Addiction Danger: हेरोइन छूटी पर मेडिकल नशा बढ़ा, सर गंगा राम अस्पताल के डॉक्टर की बड़ी चेतावनी
नशे का नाम आते ही आमतौर पर चरस, गांजा, हेरोइन या दूसरे प्रतिबंधित ड्रग्स का ख्याल आता है। लेकिन अब नशे का एक ऐसा रूप भी चिंता बढ़ा रहा है, जो पहली नजर में बेहद सामान्य दिखाई देता है। बात उन दवाइयों की है, जो असल में इलाज के लिए बनाई गई हैं, लेकिन गलत इस्तेमाल के कारण नशे का साधन बन रही हैं।
दर्द की कुछ दवाइयां, नींद और चिंता से जुड़ी दवाएं, प्रेगाबालिन और कोडीन वाली कफ सिरप जैसी दवाओं का बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल गंभीर समस्या बन सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब पुलिस ने हाल के समय में 11 लाख से ज्यादा नशीली गोलियां और कैप्सूल जब्त किए हैं। जांच में इनके दूसरे राज्यों से अवैध तरीके से पहुंचने की बात सामने आई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि पब्लिक हेल्थ से जुड़ी गंभीर चुनौती भी है।
इलाज की दवा कब बन जाती है नशे का जरिया?
कुछ दवाइयां गंभीर दर्द, सर्जरी के बाद की स्थिति या खास मेडिकल समस्याओं में डॉक्टर की निगरानी में दी जाती हैं। सही मरीज, सही खुराक और सीमित अवधि में इनका इस्तेमाल इलाज का जरूरी हिस्सा हो सकता है।
समस्या तब शुरू होती है जब कोई व्यक्ति इन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना लेने लगे या नशे जैसा असर पाने के लिए इनकी मात्रा बढ़ाता जाए। लगातार और गलत इस्तेमाल से शरीर इन दवाओं का आदी हो सकता है और कई मामलों में निर्भरता भी विकसित हो सकती है।
ट्रामाडोल
ट्रामाडोल दर्द कम करने वाली दवा है। डॉक्टर की सलाह के बिना या लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने से निर्भरता और दूसरे गंभीर साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ सकता है।
कोडीन वाली कफ सिरप
कोडीन कुछ खास कफ सिरप में इस्तेमाल होने वाला घटक है। इसे सामान्य खांसी की दवा समझकर मनमाने तरीके से लेना खतरनाक हो सकता है। इसकी ज्यादा मात्रा सुस्ती और सांस से जुड़ी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।
प्रेगाबालिन
प्रेगाबालिन का इस्तेमाल मुख्य रूप से नसों से जुड़े दर्द और कुछ अन्य मेडिकल स्थितियों में किया जाता है। इसे बिना डॉक्टर की सलाह के लेने पर चक्कर, नींद और दूसरे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।
अल्प्राजोलाम और क्लोनाजेपाम
ये दवाएं चिंता और नींद से जुड़ी कुछ समस्याओं में डॉक्टर की सलाह पर दी जाती हैं। इनका लंबे समय तक या गलत तरीके से इस्तेमाल निर्भरता का कारण बन सकता है। इन्हें अचानक बंद करना भी कुछ लोगों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
दवाइयों का गलत इस्तेमाल शरीर पर कैसे डालता है असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक एक आम गलतफहमी यह है कि मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली दवा खतरनाक नहीं हो सकती। जबकि किसी दवा का मेडिकल इस्तेमाल होना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसे बिना डॉक्टर की सलाह के लेना सुरक्षित है।
गलत तरीके से या ज्यादा मात्रा में दवा लेने पर कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:
- अत्यधिक नींद या सुस्ती
- चक्कर और भ्रम की स्थिति
- दवा पर निर्भरता या लत
- दवा बंद करने पर बेचैनी और दूसरे withdrawal symptoms
- कुछ दवाओं की ज्यादा मात्रा लेने पर सांस धीमी पड़ने का खतरा
खतरा तब और बढ़ सकता है जब व्यक्ति कई ऐसी दवाओं को एक साथ ले या उन्हें शराब अथवा दूसरी नशीली चीजों के साथ मिला दे। कुछ संयोजनों में अत्यधिक sedation और सांस दबने जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
नकली दवाएं भी बढ़ा सकती हैं खतरा
दवाओं के गलत इस्तेमाल के साथ नकली और घटिया दवाओं का कारोबार भी चिंता का विषय है। नकली दवा में सही मात्रा में सक्रिय घटक न होने से इलाज प्रभावित हो सकता है, जबकि गलत या मिलावटी सामग्री स्वास्थ्य के लिए अलग खतरा पैदा कर सकती है।
इसलिए दवा खरीदते समय सिर्फ कम कीमत देखकर फैसला नहीं करना चाहिए।
दवा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
दवाइयां हमेशा भरोसेमंद और लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से खरीदें। पैकेट पर लिखी जानकारी को ध्यान से जांचें।
- निर्माता कंपनी का नाम और पैकेजिंग देखें।
- बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें।
- पैकेट फटा हो या प्रिंटिंग असामान्य लगे तो दवा न लें।
- टैबलेट या कैप्सूल का रंग, आकार या पैकिंग संदिग्ध लगे तो इस्तेमाल से पहले फार्मासिस्ट या डॉक्टर से पूछें।
- दवा खरीदने का बिल जरूर लें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के नींद, दर्द या दूसरी prescription medicines की खुराक न बढ़ाएं।
अगर किसी दवा के नकली होने का संदेह है, तो उसे इस्तेमाल करने के बजाय फार्मासिस्ट, डॉक्टर या संबंधित ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी से संपर्क करना बेहतर है।
सोशल मीडिया से दवा खरीदना पड़ सकता है भारी
आजकल सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और अनजान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी लोग दवाएं मंगाने लगे हैं। खासकर नींद या दर्द से जुड़ी दवाओं को बिना डॉक्टर की पर्ची के खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।
किसी अनजान व्यक्ति, सोशल मीडिया ग्रुप या संदिग्ध वेबसाइट से ऐसी दवाएं खरीदने से बचें। डॉक्टर ने जितनी मात्रा और जितने समय के लिए दवा लिखी है, उसी के अनुसार इसका इस्तेमाल करें।
घर में बची हुई prescription medicine किसी दूसरे व्यक्ति को भी अपनी तरफ से न दें। एक व्यक्ति के लिए सही दवा दूसरे व्यक्ति के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
परिवार में दिखें ये बदलाव तो रहें सतर्क
दवा की लत या किसी भी तरह के substance misuse के मामलों में परिवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बड़ा बदलाव दिखे, वह असामान्य रूप से सुस्त रहने लगे, बार-बार दवाइयां मांगने लगे या उसकी दिनचर्या और सामाजिक व्यवहार में लगातार बदलाव नजर आए, तो इसे नजरअंदाज न करें।
ऐसी स्थिति में व्यक्ति को केवल डांटने या अपराधी समझने के बजाय डॉक्टर, मनोचिकित्सक या प्रमाणित नशा मुक्ति विशेषज्ञ की मदद लेना ज्यादा सही कदम है।
याद रखें, दवा इलाज के लिए होती है, नशे के लिए नहीं। सही दवा भी गलत मात्रा, गलत तरीके या बिना चिकित्सकीय सलाह के इस्तेमाल होने पर नुकसान पहुंचा सकती है। समय रहते पहचान और इलाज से इस समस्या को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।

