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महंगे खिलौने नहीं, प्यार और खेल से होता है बच्चे का सही विकास

नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में किसी भी तरह की कोई कमी न आए। इसके लिए वो बच्चे को महंगे से महंगे खिलौने और अन्य चीजें देते हैं, लेकिन सच यह है कि बच्चे का असली विकास महंगे खिलौनों से नहीं, बल्कि आपके समय, प्यार और रोजमर्रा की छोटी-छोटी गतिविधियों से होता है।
महंगे खिलौने नहीं, प्यार और खेल से होता है बच्चे का सही विकास

नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में किसी भी तरह की कोई कमी न आए। इसके लिए वो बच्चे को महंगे से महंगे खिलौने और अन्य चीजें देते हैं, लेकिन सच यह है कि बच्चे का असली विकास महंगे खिलौनों से नहीं, बल्कि आपके समय, प्यार और रोजमर्रा की छोटी-छोटी गतिविधियों से होता है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर बताया कि छोटे बच्चों का दिमाग बहुत तेजी से विकसित होता है और इस दौरान उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है बातचीत और जुड़ाव की। जब आप अपने बच्चे से बात करते हैं, भले ही वह अभी ठीक से बोल न पा रहा हो, तब भी वह आपकी आवाज, शब्दों और भावनाओं को समझने लगता है। यही चीज उसके भाषा विकास और सोचने की क्षमता को मजबूत बनाती है।

कहानी सुनाना भी बच्चों के विकास में बहुत बड़ा रोल निभाता है। जब आप उन्हें कहानियां सुनाते हैं, तो उनकी कल्पनाशक्ति बढ़ती है और वे नए-नए विचारों से जुड़ते हैं। इसी तरह, गाने गाना या लोरी सुनाना बच्चे को न सिर्फ खुशी देता है, बल्कि उसके दिमाग और भावनात्मक विकास में भी मदद करता है।

खेल बच्चों के लिए सिर्फ टाइमपास नहीं होता, बल्कि यह सीखने का सबसे प्राकृतिक तरीका है। जब बच्चा खेलता है, तो वह अपने आसपास की दुनिया को समझता है, चीजों को पहचानता है और नए कौशल सीखता है। चाहे वह ब्लॉक्स से खेलना हो, चित्र देखना हो या फिर आपके साथ साधारण खेल खेलना हो, हर गतिविधि उसे कुछ नया सिखाती है।

सबसे खास बात यह है कि इन सबके लिए आपको किसी महंगे खिलौने या खास साधनों की जरूरत नहीं होती। घर में मौजूद साधारण चीजों से भी आप बच्चे के साथ मजेदार और सीखने वाले खेल खेल सकते हैं। जैसे कि तस्वीरें दिखाना, रंग पहचानना, या फिर रोजमर्रा की चीजों को खेल में शामिल करना।

खेल के जरिए सीखना बच्चों के लिए सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। यह तरीका बच्चों को खुश रखता है, उन्हें सक्रिय बनाता है और सीखने को मजेदार बना देता है। जब बच्चा खुशी-खुशी सीखता है, तो वह चीजों को ज्यादा अच्छे से और लंबे समय तक याद रखता है।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम

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