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लोध्र: त्वचा और स्त्री स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद की शक्तिशाली वनौषधि, जानिए फायदे

नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। लोध्र एक बेहद खास वनौषधि है, खासकर महिलाओं के लिए यह बहुत फायदेमंद मानी जाती है। लोध्र की छाल का इस्तेमाल आयुर्वेद में हजारों सालों से होता आ रहा है। इसे पाचन और रक्त शुद्धि के साथ-साथ स्त्री स्वास्थ्य और त्वचा के लिए भी बहुत उपयोगी माना गया है।
लोध्र: त्वचा और स्त्री स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद की शक्तिशाली वनौषधि, जानिए फायदे

नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। लोध्र एक बेहद खास वनौषधि है, खासकर महिलाओं के लिए यह बहुत फायदेमंद मानी जाती है। लोध्र की छाल का इस्तेमाल आयुर्वेद में हजारों सालों से होता आ रहा है। इसे पाचन और रक्त शुद्धि के साथ-साथ स्त्री स्वास्थ्य और त्वचा के लिए भी बहुत उपयोगी माना गया है।

लोध्र त्वचा की अशुद्धियों को दूर करने में मदद करता है। मुंहासे, दाग-धब्बे या त्वचा की चिपचिपाहट जैसी समस्याओं में यह काफी असरदार है। कई आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे त्वचा की शुद्धि और रक्त संतुलन के लिए अहम बताया गया है।

महिलाओं के लिए लोध्र का महत्व और भी बढ़ जाता है। आयुर्वेद में यह श्वेत प्रदर जैसी समस्याओं में बहुत उपयोगी माना गया है। इसके अलावा, अधिक रक्तस्राव या पित्त बढ़ जाने जैसी स्थिति में भी यह संतुलन लाने में मदद करता है। शरीर की गर्मी और पित्त को शांत करने में भी इसका योगदान है। इसलिए यह सिर्फ एक औषधि नहीं, बल्कि शरीर और स्त्री स्वास्थ्य के लिए एक प्राकृतिक साथी की तरह है।

लोध्र को लेने के कई तरीके हैं। इसे चूर्ण, काढ़ा या बाह्य लेप के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ लिया जाता है और काढ़ा बनाने के लिए इसे पानी में उबालकर पी सकते हैं। त्वचा पर लेप के लिए इसे गुलाब जल या पानी के साथ मिलाकर हल्का लगाया जा सकता है।

हालांकि कुछ लोग इसे लेने से पहले सावधानी बरतें। गर्भवती महिलाएं इसे डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।

आम तौर पर 30 से 45 दिन तक इसका सेवन किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर बीच में विराम देकर इसे दोबारा लिया जा सकता है। अगर इसे नियमित और सही तरीके से लिया जाए, तो यह आपके शरीर और स्वास्थ्य दोनों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

--आईएएनएस

पीआईएम/वीसी

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