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भरोसेमंद रेगुलेटरी सिस्टम जरूरी, भारत 'दुनिया की फार्मेसी' बनकर करेगा वैश्विक सहयोग: जेपी नड्डा

नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'फर्स्ट ग्लोबल ड्रग रेगुलेटरी कॉन्क्लेव 2026' के उद्घाटन सत्र में भारत के रेगुलेटरी विजन को दुनिया के सामने रखा। इस दो दिवसीय कॉन्क्लेव में दवा और मेडिकल उपकरणों की सुरक्षा, गुणवत्ता और नवाचार को लेकर वैश्विक सहयोग पर जोर दिया गया।

नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'फर्स्ट ग्लोबल ड्रग रेगुलेटरी कॉन्क्लेव 2026' के उद्घाटन सत्र में भारत के रेगुलेटरी विजन को दुनिया के सामने रखा। इस दो दिवसीय कॉन्क्लेव में दवा और मेडिकल उपकरणों की सुरक्षा, गुणवत्ता और नवाचार को लेकर वैश्विक सहयोग पर जोर दिया गया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भरोसेमंद, विज्ञान-आधारित और पारदर्शी रेगुलेटरी सिस्टम सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। साथ ही, यह इनोवेशन को बढ़ावा देता है और मरीजों तक सुरक्षित, असरदार, उच्च-गुणवत्ता वाली और सस्ती दवाएं पहुंचाने में मदद करता है।

नड्डा ने रेगुलेटरी सुधारों, डिजिटल बदलाव और मजबूत क्वालिटी स्टैंडर्ड्स के जरिए भविष्य के लिए तैयार रेगुलेटरी इकोसिस्टम बनाने के भारत के संकल्प को दोहराया। भारत को 'दुनिया की फार्मेसी' बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक दवा आपूर्ति में बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे में जानकारी साझा करने, रेगुलेटरी तालमेल, क्षमता निर्माण और वैज्ञानिक साझेदारियों के जरिए वैश्विक सहयोग को और गहरा करना जरूरी है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उभरती वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने और दुनिया भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए सभी देशों को मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे। इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य विभिन्न देशों के रेगुलेटर्स को एक मंच पर लाकर दवा सुरक्षा के नए मानक तय करना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव ने भी कॉन्क्लेव को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से आपस में जुड़ रहा है और तकनीक हर दिन बदल रही है। ऐसे में रेगुलेटरी सिस्टम को भी उसी गति से आगे बढ़ना होगा। इसके लिए बेहतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पारदर्शिता, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और आपसी भरोसा जरूरी है। आधुनिक रेगुलेटर्स की जिम्मेदारी सिर्फ नियम बनाना नहीं है। उन्हें इनोवेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ एक मजबूत, भरोसेमंद और विज्ञान पर आधारित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के जरिए लोगों की सेहत की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए।

उन्होंने सुधारों, डिजिटल बदलाव, क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के जरिए भारत के रेगुलेटरी सिस्टम को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि दवाओं और मेडिकल उत्पादों का मुद्दा किसी एक देश तक सीमित नहीं है। इसलिए कोई भी रेगुलेटर अकेले काम नहीं कर सकता। उन्होंने वैज्ञानिक आदान-प्रदान, जानकारी साझा करने, रेगुलेटरी तालमेल, भरोसे के तंत्र और संयुक्त क्षमता निर्माण के जरिए गहरे वैश्विक सहयोग का आह्वान किया। इसका मकसद दुनिया भर के लोगों को सुरक्षित, असरदार और अच्छी क्वालिटी की दवाएं समय पर उपलब्ध कराना है।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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