Karwa Chauth 2026: 12 से 15 घंटे निर्जला व्रत रखने पर शरीर में क्या होता है? जानें घंटे-दर-घंटे असर और जरूरी सावधानियां
करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए आस्था और परंपरा से जुड़ा बेहद खास पर्व है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ सूर्योदय से पहले सरगी खाती हैं। इसके बाद चांद के दर्शन और पूजा के बाद ही व्रत खोलती हैं। इस दौरान कई महिलाएं 12 से 15 घंटे तक बिना भोजन और पानी के रहती हैं।
धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह व्रत शरीर के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लंबे समय तक कुछ न खाने और पानी न पीने से शरीर की ऊर्जा, ब्लड शुगर और हाइड्रेशन पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि निर्जला व्रत के दौरान शरीर किस तरह काम करता है और किन परिस्थितियों में सेहत को खतरा हो सकता है? आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।
शुरुआती 4 घंटे: सरगी से मिलती है ऊर्जा
करवा चौथ की सुबह खाई गई सरगी दिन की शुरुआत में शरीर को ऊर्जा देती है। भोजन पचने के बाद उससे मिलने वाले पोषक तत्व शरीर के काम आते हैं। कार्बोहाइड्रेट से मिलने वाला ग्लूकोज शरीर की कोशिकाओं के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है।
अगर सरगी में फल, दही, दूध, पनीर और मेवे जैसी चीजें शामिल हों, तो शरीर को ऊर्जा के साथ प्रोटीन, वसा और फाइबर भी मिल सकते हैं। इससे पेट भरा रहने में मदद मिलती है। वहीं, बहुत ज्यादा मीठा या तला-भुना भोजन खाने से कुछ लोगों को जल्दी भूख लग सकती है या ऊर्जा में उतार-चढ़ाव महसूस हो सकता है।
4 से 8 घंटे: लिवर में जमा ग्लाइकोजन आने लगता है काम
व्रत के दौरान जब भोजन से मिलने वाली ऊर्जा कम होने लगती है, तो शरीर अपने अंदर जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करता है। लिवर में ग्लाइकोजन के रूप में ग्लूकोज जमा रहता है। जरूरत पड़ने पर लिवर इसे तोड़कर रक्त में ग्लूकोज की उपलब्धता बनाए रखने में मदद करता है।
इस दौरान कुछ महिलाओं को हल्की थकान, सुस्ती, सिरदर्द या गले में सूखापन महसूस हो सकता है। हालांकि, इन लक्षणों का अनुभव हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। पानी न पीने के कारण शरीर में तरल पदार्थों की कमी भी धीरे-धीरे बढ़ सकती है।
8 से 12 घंटे: ऊर्जा के लिए वसा का इस्तेमाल बढ़ सकता है
व्रत लंबा होने पर शरीर ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए जमा वसा का इस्तेमाल बढ़ा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति में एक ही समय पर फैट बर्निंग शुरू होती है। यह शरीर की गतिविधि, पहले खाए गए भोजन और स्वास्थ्य जैसी स्थितियों पर निर्भर करता है।
इस दौरान कमजोरी, थकान, सिर घूमने या हाथ-पैरों में कंपकंपी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर मौसम गर्म है या पूजा की तैयारियों में लगातार भागदौड़ करनी पड़ रही है, तो पसीने के कारण शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स का नुकसान भी बढ़ सकता है।
12 घंटे के बाद: डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है
लंबे समय तक पानी न पीने के बाद शरीर में पानी की कमी के लक्षण ज्यादा स्पष्ट हो सकते हैं। इसकी गंभीरता मौसम, शारीरिक गतिविधि, पहले से शरीर में मौजूद पानी और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।
पेशाब कम होना: शरीर पानी बचाने की कोशिश करता है, जिससे पेशाब की मात्रा कम हो सकती है और उसका रंग गहरा पीला दिखाई दे सकता है।
मुंह और गला सूखना: पानी की कमी होने पर होंठ सूख सकते हैं और मुंह में चिपचिपाहट महसूस हो सकती है।
चक्कर और कमजोरी: लंबे समय तक भोजन-पानी से दूर रहने पर कुछ लोगों को सिर घूमने, सिरदर्द या खड़े होते समय आंखों के सामने अंधेरा छाने जैसी परेशानी हो सकती है। गंभीर स्थिति में बेहोशी भी हो सकती है।
ऐसे लक्षणों को केवल सामान्य भूख या प्यास समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह: किन महिलाओं को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?
बीएलके-मैक्स अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के वाइस चेयरमैन एवं एचओडी डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल के अनुसार, करवा चौथ का निर्जला व्रत आस्था से जुड़ा है, लेकिन इस दौरान स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
लंबे समय तक भोजन और पानी न लेने से कमजोरी, सिरदर्द, डिहाइड्रेशन और ब्लड प्रेशर कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासतौर पर बुजुर्ग महिलाओं और डायबिटीज, हृदय रोग या किडनी की बीमारी से जूझ रही महिलाओं को व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। दवाएं लेने वाली महिलाओं को यह भी समझना चाहिए कि उपवास के दौरान उनकी दवाओं और भोजन-पानी के समय में बदलाव करना सुरक्षित है या नहीं।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इस दौरान अचानक तेज चक्कर आना, बेहोशी जैसा महसूस होना, सीने में दर्द या भारीपन होना अथवा अत्यधिक कमजोरी महसूस होना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में व्रत जारी रखने की जिद न करें और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
चांद देखकर व्रत खोलते समय इन बातों का रखें ध्यान
दिनभर के उपवास के बाद व्रत खोलते समय जल्दबाजी करने के बजाय धीरे-धीरे पानी और भोजन लेना बेहतर रहता है।
1. पानी धीरे-धीरे पिएं: व्रत खोलते समय एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय छोटे-छोटे घूंट लें।
2. तुरंत भारी भोजन न करें: लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद एकदम ज्यादा तला-भुना या भारी भोजन करने से पेट फूलने और अपच की परेशानी हो सकती है।
3. हल्के भोजन से शुरुआत करें: पानी पीने के बाद अपनी सहनशीलता के अनुसार फल, दही या हल्का भोजन लिया जा सकता है। इसके बाद दाल, सब्जी और रोटी जैसे संतुलित भोजन की ओर बढ़ें।
4. शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें: अगर व्रत खोलने के बाद भी चक्कर, अत्यधिक कमजोरी या दूसरी परेशानी बनी रहती है, तो चिकित्सकीय सलाह लें।
करवा चौथ का व्रत आस्था और परंपरा का प्रतीक है, लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक जरूरतें अलग होती हैं। इसलिए अपनी सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है। किसी भी तरह की पुरानी बीमारी या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में निर्जला व्रत रखने का फैसला डॉक्टर की सलाह से ही लें।

