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जम्मू-कश्मीर विधानसभा: छात्र-शिक्षक अनुपात सुधारने, किसानों और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर सरकार का जोर

श्रीनगर, 24 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने गुरुवार को विधानसभा को बताया कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में 'रैशनलाइजेशन' के जरिए कम स्टाफ वाले स्कूलों को अतिरिक्त स्टाफ देकर 'छात्र-शिक्षक अनुपात' (पीटीआर) को ठीक करने की समस्या का समाधान किया जा रहा है।

श्रीनगर, 24 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने गुरुवार को विधानसभा को बताया कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में 'रैशनलाइजेशन' के जरिए कम स्टाफ वाले स्कूलों को अतिरिक्त स्टाफ देकर 'छात्र-शिक्षक अनुपात' (पीटीआर) को ठीक करने की समस्या का समाधान किया जा रहा है।

विधानसभा के चल रहे ऑटम सेशन (पतझड़ सत्र) के दौरान 'प्रश्नकाल' में उरी के विधायक सज्जाद शफी के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि जिन स्कूलों में पीटीआर ज्यादा है, वहां स्टाफ की जरूरतों को 'रैशनलाइजेशन' की चल रही प्रक्रिया के जरिए पूरा किया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि उरी विधानसभा क्षेत्र के 375 सरकारी स्कूलों में से केवल 10 स्कूलों में ही पीटीआर 40 से ज्यादा है, और इन स्कूलों में स्टाफ की जरूरतों को 'रैशनलाइजेशन' और उपलब्ध टीचिंग रिसोर्स (शिक्षण संसाधनों) के सही इस्तेमाल से पूरा करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

सकीना इट्टू ने बताया कि सालाना ट्रांसफर ड्राइव (एटीडी)-2026 के तहत योग्य शिक्षकों से आवेदन पहले ही मंगाए जा चुके हैं। इन आवेदनों पर विचार करते समय उन स्कूलों में स्टाफ की जरूरतों का खास ध्यान रखा जाएगा, जहां छात्र-शिक्षक अनुपात ज्यादा है और जहां इसकी जरूरत है।

मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि हाल ही में 22 लैब असिस्टेंट को शिक्षक के पद पर प्रमोट किया गया है, जिनमें से आठ को उरी निर्वाचन क्षेत्र में तैनात किया गया है। इसके अलावा, मौजूदा शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उरी निर्वाचन क्षेत्र में पांच मास्टर्स का ट्रांसफर किया गया है, खासकर उन स्कूलों में जहां छात्र-शिक्षक अनुपात ज्यादा है।

सकीना इट्टू ने बताया कि मौजूदा एकेडमिक ईयर के लिए स्टाफ को सही तरीके से बांटने (रैशनलाइजेशन) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस प्रक्रिया के तहत हर स्कूल में स्टाफ की जरूरतों पर ठीक से विचार किया जाएगा, ताकि टीचिंग स्टाफ का बंटवारा संतुलित हो सके।

कृषि उत्पादन मंत्री जावेद डार ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा को बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत 12.89 लाख किसान शामिल हैं। 221.71 करोड़ रुपए के 3.72 लाख क्लेम रजिस्टर किए गए हैं। जम्मू-कश्मीर का बागवानी सेक्टर लगभग 35 लाख लोगों की आजीविका का सहारा है और केंद्र शासित प्रदेश की जीडीपी में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान देता है।

उन्होंने विधानसभा को यह भी बताया कि बागवानी सेक्टर जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था के मुख्य स्तंभों में से एक है, जो आबादी के एक बड़े हिस्से की आजीविका और रोजगार का सहारा है।

मंत्री, विधायक पीरजादा फारूक अहमद शाह, गुलाम मोहि-उद-दीन मीर और इरफान हाफिज लोन के संयुक्त सवाल और विधायक शब्बीर अहमद कुल्ले के सप्लीमेंट्री सवाल का जवाब दे रहे थे। जावेद डार ने बताया कि लगभग 35 लाख लोग, जिनमें करीब 7.5 लाख परिवार शामिल हैं, बागवानी सेक्टर से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।

यह सेक्टर केंद्र शासित प्रदेश की जीडीपी में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान देता है और इससे सालाना लगभग 12,000 करोड़ रुपए की अनुमानित आय होती है। उन्होंने यह भी कहा कि बागवानी में रोजगार की काफी संभावनाएं हैं। एक हेक्टेयर बागान से सालाना लगभग 400 मैन-डेज का रोजगार पैदा होता है, जिससे ग्रामीण आजीविका और जम्मू-कश्मीर की व्यापक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।

फसल बीमा के बारे में मंत्री ने बताया कि पीएमएफबीवाई को अभी जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में लागू किया जा रहा है। उन्होंने सदन को बताया कि यह स्कीम मांग पर आधारित है और तय गाइडलाइंस और पात्रता शर्तों के तहत, इसका फायदा उठाने वाले किसानों की संख्या पर कोई सीमा नहीं है।

उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 13.985 लाख किसान परिवार इस स्कीम का फायदा उठाने के पात्र हैं।

मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, 6,86,741.37 हेक्टेयर जमीन को इसके दायरे में लाया गया है, जिससे 12,89,917 किसानों को फायदा हुआ है, जबकि लगभग 221.71 करोड़ रुपये की राशि के 3,72,134 क्लेम दर्ज किए गए हैं।

मंत्री ने माना कि अलग-अलग इलाकों में किसानों और बागवानों को ओलावृष्टि, बाढ़ और भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि विभाग अपने फील्ड कर्मचारियों के जरिए फसल के नुकसान का आकलन करता है और लागू योजनाओं और दिशानिर्देशों के तहत, जहां भी संभव हो, मदद और राहत देता है।

जावेद डार ने आगे कहा कि पीएमएफबीवाई, नोटिफाइड फसलों के लिए ओलावृष्टि सहित नोटिफाइड प्राकृतिक जोखिमों के खिलाफ इंश्योरेंस कवरेज देता है।

बेसिक कवर, नोटिफाइड फसलों, इलाकों और लागू दिशानिर्देशों के आधार पर, बुवाई से लेकर कटाई तक खड़ी फसलों में पैदावार के नुकसान के खिलाफ एरिया-बेस्ड इंश्योरेंस देता है। यह कवर सूखे, लंबे समय तक बारिश न होने, बाढ़, जल-जमाव, बड़े पैमाने पर कीटों और बीमारियों के हमले, भूस्खलन, बिजली गिरने से लगी प्राकृतिक आग, तूफान, ओलावृष्टि और चक्रवात जैसे जोखिमों से होने वाले नुकसान के लिए होता है, जिन्हें रोका नहीं जा सकता।

मंत्री ने पेंडिंग क्लेम के मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि सही क्लेम के पेंडिंग रहने की मुख्य वजहों में आधार का वेरिफिकेशन न होना, बैंक अकाउंट बंद होना, बैंकों द्वारा एनपीसीआई मैपर के साथ आधार को लिंक न करना और बैंक अकाउंट का ब्लॉक या फ्रीज होना शामिल है।

उन्होंने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने पेमेंट ट्रांजेक्शन में आ रही दिक्कतों को दूर करने और योग्य पेंडिंग क्लेम के निपटारे में मदद करने के लिए एक स्पेशल कैंपेन शुरू किया है।

मंत्री ने कहा, "प्रभावित किसानों में से लगभग 60 प्रतिशत से संपर्क किया जा चुका है और वेरिफिकेशन व आगे की जरूरी कार्रवाई के लिए उनसे रोजाना जरूरी डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा किए जा रहे हैं।"

उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि किसानों को हो रही वास्तविक दिक्कतों को दूर करने और यह पक्का करने के लिए ठोस कोशिशें की जा रही हैं कि योग्य लाभार्थियों को स्कीम के तहत मिलने वाले फायदे मिलें।

उन्होंने यह भी कहा कि बागवानी उत्पादों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए अनंतनाग और बडगाम से दिल्ली तक रेलवे पार्सल, माल और फ्रेट सेवाओं को आसान और बढ़ावा दिया गया है।

जावेद डार ने कहा, "इन मिले-जुले उपायों का मकसद ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क में विविधता लाना, एनएच-44 पर निर्भरता कम करना और फसल कटाई के पीक सीजन के दौरान फलों से लदे वाहनों के लंबे समय तक फंसे रहने की संभावना को कम करना है।"

मंत्री ने किसानों और बागवानों के हितों की रक्षा करने, फसल बीमा सिस्टम को मजबूत करने, सही दावों के निपटारे में तेजी लाने और पूरे जम्मू-कश्मीर में बागवानी उत्पादों के लिए ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स और मार्केट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

उन्होंने यह भी कहा कि होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एचएडीपी) के तहत कई योजनाओं से किसानों को फायदा मिलता है और उन्हें प्रोजेक्ट्स में 60 प्रतिशत से ज्यादा सब्सिडी मिलती है।

ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर सतीश शर्मा ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा को बताया कि संशोधित कार पॉलिसी अभी केंद्र शासित प्रदेश की सरकार के विचाराधीन है, जिसमें "एक गाड़ी-एक अधिकारी" का सिद्धांत लागू करने का प्रस्ताव है। वे रणबीर सिंह पठानिया द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

उन्होंने कहा, "प्रस्तावित पॉलिसी में कुछ खास छूट का भी प्रावधान होगा, जिन्हें यूटी सरकार सुरक्षा जरूरतों, फील्ड ड्यूटी, अतिरिक्त काम/चार्ज, ऑपरेशन की जरूरतों और खास विभागों/संगठनों की कामकाज से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जरूरी समझेगी। यूटी सरकार से संशोधित कार पॉलिसी को मंजूरी मिलने के बाद, इसके प्रावधानों को मंजूर की गई पॉलिसी के अनुसार संबंधित विभागों/पीएसयू/बोर्ड/स्वायत्त निकायों में लागू किया जाएगा।

शर्मा ने कहा कि 'इस तरह, प्रस्तावित 'एक गाड़ी-एक अधिकारी' सिद्धांत का मकसद सरकारी गाड़ियों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना और सरकारी खर्च में बचत करना है।' उन्होंने आगे कहा कि स्टेट मोटर गैरेज विभाग समय-समय पर गाड़ियों के बेड़े का जरूरी ऑडिट/फिजिकल वेरिफिकेशन करता है।

जम्मू-कश्मीर के जल शक्ति मंत्री जावेद राणा ने गुरुवार को विधानसभा को बताया कि सोनावारी निर्वाचन क्षेत्र की 110 सिंचाई योजनाएं विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। मंत्री, हिलाल अकबर लोन द्वारा उठाए गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

मंत्री ने यह भी बताया कि विभाग ने पुरानी या बंद पड़ी सिंचाई योजनाओं की मरम्मत, बहाली और अपग्रेडेशन के लिए कुल 116 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 7 विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की हैं। उन्होंने कहा कि ये वित्त वर्ष 2027-28 के लिए परियोजनाओं की सूची का हिस्सा होंगी।

स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की सरकार दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में ट्रॉमा और क्रिटिकल केयर सेवाओं को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में 17 क्रिटिकल केयर ब्लॉक स्थापित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार जम्मू डिवीजन के दूर-दराज, पहाड़ी और मुश्किल रास्तों वाले इलाकों (जिनमें पैडर-नागसेनी विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है) में हेल्थकेयर डिलीवरी, इमरजेंसी रिस्पॉन्स, ट्रॉमा केयर और क्रिटिकल-केयर सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठा रही है।

वे सुनील कुमार शर्मा के एक सवाल का जवाब दे रहे थे। यह सवाल दूर-दराज के इलाकों में डॉक्टरों, स्पेशलिस्ट, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर, डायग्नोस्टिक सुविधाओं और इमरजेंसी हेल्थकेयर सेवाओं के बारे में था।

मंत्री ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की सरकार दूर-दराज और मुश्किल इलाकों में इमरजेंसी, ट्रॉमा और क्रिटिकल केयर सेवाओं को लगातार बढ़ा रही है। इसके लिए क्रिटिकल-केयर इंफ्रास्ट्रक्चर, इमरजेंसी और ट्रॉमा सेवाओं, एम्बुलेंस और मेडिकल इवैक्यूएशन सुविधाओं, ह्यूमन रिसोर्स और टेलीमेडिसिन सपोर्ट को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मुख्य मकसद गंभीर रूप से बीमार और ट्रॉमा वाले मरीजों को सबसे नजदीकी हेल्थ सेंटर पर समय रहते स्थिर (स्टेबलाइज) करना और उनका इलाज करना है, और जहां भी स्पेशलाइज्ड इलाज की जरूरत हो, उन्हें बड़े सेंटर्स पर रेफर करना है।

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (पीएम-अभिम) के तहत किए जा रहे कामों का जिक्र करते हुए, मंत्री ने बताया कि पूरे जम्मू-कश्मीर में 17 क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाए जा रहे हैं, जिनमें 50-50 बेड वाले 15 ब्लॉक और 100-100 बेड वाले दो ब्लॉक शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं का मकसद क्रिटिकल केयर की क्षमता को काफी बढ़ाना और स्पेशलाइज़्ड सेवाओं का विकेंद्रीकरण करना है, ताकि दूर-दराज़ के इलाकों से आने वाले मरीजों को गंभीर मेडिकल केयर के लिए लंबी यात्रा न करनी पड़े।

मंत्री ने यह भी बताया कि 44 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एम्बुलेंस (जम्मू और कश्मीर डिवीजन के लिए 22-22) शामिल करके इमरजेंसी रिस्पॉन्स और मरीजों को लाने-ले जाने की सुविधाओं को और बेहतर बनाया गया है। इससे 102/108 एम्बुलेंस सर्विस के तहत कुल एम्बुलेंस की संख्या 530 हो गई है।

उन्होंने कहा कि इस बेड़े में 100 और एम्बुलेंस शामिल की जा रही हैं, जिनमें 75 क्रिटिकल-केयर एम्बुलेंस और 25 4x4 ऑल-टेरेन एम्बुलेंस शामिल हैं। इनसे इमरजेंसी ट्रांसपोर्टेशन और लोगों को सुरक्षित निकालने की क्षमता और बेहतर होगी, खासकर पहाड़ी, दूर-दराज और मुश्किल रास्तों वाले इलाकों में।

मंत्री ने आगे कहा, "एक असरदार एम्बुलेंस नेटवर्क समय पर इमरजेंसी रिस्पॉन्स, शुरुआती इलाज और मरीजों को सुरक्षित लाने-ले जाने में अहम भूमिका निभाता है, खासकर दूर-दराज, पहाड़ी और भौगोलिक रूप से मुश्किल इलाकों से।"

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

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