रिपोर्ट: अत्याधिक खाद्य संकट झेलने वाले टॉप 10 देशों में बांग्लादेश शामिल
नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। ‘2026 ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस’ (जीआरएफसी) के अनुसार, वर्ष 2025 में उच्च स्तर की तीव्र खाद्य असुरक्षा का सामना करने वाले लोगों की सबसे बड़ी संख्या वाले शीर्ष 10 देशों में बांग्लादेश भी शामिल है। यह जानकारी ढाका स्थित समाचारपत्र द डेली स्टार में प्रकाशित एक लेख में दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में वर्ष 2025 के अंत तक लगभग 1.6 करोड़ लोग संकट स्तर की खाद्य असुरक्षा या उससे भी बदतर स्थिति का सामना कर रहे थे। यह विश्लेषित आबादी का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह विश्लेषण देश की कुल आबादी के केवल 59 प्रतिशत हिस्से पर आधारित था, पूरी आबादी पर नहीं।
ढाका विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. सलीम रायहान ने अपने लेख में कहा है कि खाद्य असुरक्षा की लगातार बनी रहने वाली स्थिति एक गहरी संरचनात्मक समस्या की ओर इशारा करती है। इसके पीछे कम और अस्थिर आय, कमजोर क्रय शक्ति, क्षेत्रीय असमानता, जलवायु जोखिम, पोषण संबंधी कमजोर परिणाम और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कमियां जैसी वजहें हैं।
उन्होंने कहा कि कई परिवारों के लिए समस्या यह नहीं है कि बाजार में भोजन उपलब्ध नहीं है, बल्कि यह है कि भोजन उनकी पहुंच से बाहर होता जा रहा है। पौष्टिक आहार महंगा है और लोगों के पास संकट से निपटने के साधन भी खत्म हो चुके हैं।
लेख में कहा गया है कि हाल के वर्षों में बांग्लादेश में खाद्य महंगाई ने परिवारों के व्यवहार को बदल दिया है। कई परिवारों ने प्रोटीन युक्त भोजन कम कर दिया है, सस्ते अनाजों पर निर्भरता बढ़ा दी है, स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च टाल दिया है, अनौपचारिक स्रोतों से कर्ज लिया है और बच्चों की जरूरतों में कटौती की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब चावल, खाद्य तेल, दाल, अंडे, मछली और सब्जियां लंबे समय तक महंगी बनी रहती हैं, तो इसका असर पोषण स्तर पर पड़ता है। बच्चे चुपचाप कुपोषण का शिकार होते हैं। महिलाएं अक्सर सबसे अंत में खाना खाती हैं और कम खाती हैं। गरीब परिवारों के बुजुर्ग अनियमित सहायता पर अधिक निर्भर हो जाते हैं।
लेख में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2025 में प्रवासी आय (रेमिटेंस) से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। रेमिटेंस का लाभ सभी क्षेत्रों और परिवारों तक समान रूप से नहीं पहुंचता। यह कई परिवारों को सहारा देता है, लेकिन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा रणनीति का विकल्प नहीं हो सकता।
लेख के अनुसार, बांग्लादेश की खाद्य सुरक्षा चुनौती असमानता का भी सवाल है। देश ने चावल उत्पादन बढ़ाने और मुख्य खाद्यान्न की आपूर्ति बनाए रखने में अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन खाद्य सुरक्षा केवल उपलब्धता का मुद्दा नहीं है; यह पहुंच, पोषण, स्थिरता और सम्मानजनक जीवन से भी जुड़ा विषय है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि नीति निर्माण का नजरिया “क्या पर्याप्त चावल है?” से बदलकर “क्या गरीब परिवार पूरे साल पौष्टिक भोजन खरीद सकते हैं?” पर केंद्रित होना चाहिए। इसके लिए केवल सामान्य महंगाई दर नहीं, बल्कि खाद्य टोकरी की नियमित निगरानी भी जरूरी है।
--आईएएनएस
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