Health Alert: मानसिक तनाव बन सकता है साइलेंट किलर, जानिए कैसे स्ट्रेस से बढ़ता है हार्ट अटैक का जोखिम; डॉक्टर की सलाह
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम का दबाव, पैसों की चिंता, पारिवारिक समस्याएं और भविष्य को लेकर अनिश्चितता तनाव की बड़ी वजह बन गई हैं। अक्सर लोग तनाव को सिर्फ मानसिक परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसका असर शरीर और खासकर दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बना रहने वाला मानसिक तनाव ब्लड प्रेशर, नींद, खान-पान और जीवनशैली को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ज्यादा चिंता करने से हार्ट अटैक भी आ सकता है? आइए समझते हैं तनाव और हृदय स्वास्थ्य के बीच क्या संबंध है।
तनाव होने पर शरीर में क्या बदलाव आते हैं?
जब कोई व्यक्ति डर, गुस्से, चिंता या मानसिक दबाव का सामना करता है, तो शरीर की प्राकृतिक तनाव प्रतिक्रिया सक्रिय हो जाती है। इस दौरान एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है।
इसके कारण कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं:
-
दिल की धड़कन तेज हो सकती है।
-
ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
-
मांसपेशियों में तनाव महसूस हो सकता है।
-
नींद आने में परेशानी हो सकती है।
-
बेचैनी, घबराहट और थकान बढ़ सकती है।
अगर तनाव लगातार बना रहे, तो इसका असर धीरे-धीरे व्यक्ति की जीवनशैली और हृदय स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
क्या तनाव सच में हार्ट अटैक का कारण बन सकता है?
लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति में तनाव का असर एक जैसा नहीं होता और केवल तनाव होने का मतलब यह नहीं है कि हार्ट अटैक जरूर आएगा।
लगातार तनाव के कारण कुछ लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, शारीरिक गतिविधि कम कर देते हैं या अधिक खाने, धूम्रपान और शराब जैसी आदतों की ओर बढ़ सकते हैं। इन कारणों से हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ ब्लड शुगर और अन्य हृदय संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
इसके अलावा, अचानक बहुत तेज भावनात्मक तनाव कुछ संवेदनशील लोगों में हृदय संबंधी समस्या को ट्रिगर कर सकता है।
क्या ज्यादा चिंता करने से दिल की धड़कन बढ़ जाती है?
हां, चिंता या घबराहट के दौरान दिल की धड़कन तेज महसूस हो सकती है। कुछ लोगों को सीने में बेचैनी, पसीना आना, सांस तेज चलना या हाथ-पैर कांपने जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
हालांकि, इन लक्षणों को हमेशा तनाव या एंग्जायटी से जोड़ना सही नहीं है। इनके पीछे हृदय की धड़कन से जुड़ी समस्या या कोई दूसरी स्वास्थ्य स्थिति भी हो सकती है। अगर धड़कन बार-बार तेज होती है या इसके साथ चक्कर, बेहोशी अथवा सीने में दर्द होता है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
क्या है 'ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम'?
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को मेडिकल भाषा में 'स्ट्रेस कार्डियोमायोपैथी' या 'टाकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी' कहा जाता है। यह स्थिति किसी गंभीर भावनात्मक या शारीरिक तनाव के बाद हो सकती है और इसमें हृदय की मांसपेशियों की पंप करने की क्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।
इसके लक्षण हार्ट अटैक जैसे हो सकते हैं, जिनमें सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी शामिल हैं। इसलिए अचानक ऐसे लक्षण दिखाई देने पर उन्हें केवल तनाव समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ध्यान दें: सीने में अचानक दर्द या दबाव, सांस फूलना, ठंडा पसीना, बेहोशी या दर्द का बांह, पीठ अथवा जबड़े तक फैलना हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
तनाव का दिल पर क्या असर पड़ सकता है?
लगातार तनाव कई तरीकों से हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है:
-
ब्लड प्रेशर बढ़ना: तनाव के दौरान रक्तचाप अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। बार-बार तनाव होने पर इसे नियंत्रित रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
-
नींद प्रभावित होना: चिंता के कारण नींद पूरी न होने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
-
खान-पान में बदलाव: तनाव में कुछ लोग जरूरत से ज्यादा खाते हैं, जबकि कुछ की भूख कम हो जाती है।
-
शारीरिक गतिविधि कम होना: लगातार थकान और मानसिक दबाव के कारण व्यायाम की आदत प्रभावित हो सकती है।
-
अस्वस्थ आदतें बढ़ना: तनाव से निपटने के लिए धूम्रपान या शराब का सहारा लेना हृदय के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए तनाव कैसे कम करें?
तनाव को पूरी तरह खत्म करना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन उसे नियंत्रित करने के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं।
-
रोजाना शारीरिक गतिविधि करें: अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना या नियमित व्यायाम करना फायदेमंद हो सकता है।
-
पर्याप्त नींद लें: सोने और जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें।
-
संतुलित आहार अपनाएं: फल, सब्जियां, साबुत अनाज और संतुलित मात्रा में प्रोटीन लें। नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
-
योग और ध्यान करें: गहरी सांस लेने के अभ्यास, ध्यान और योग से तनाव संभालने में मदद मिल सकती है।
-
अपनों से बात करें: अपनी परेशानियों को परिवार, दोस्तों या किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ साझा करना उपयोगी हो सकता है।
-
जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें: यदि चिंता या उदासी लंबे समय तक बनी रहे और दैनिक जीवन प्रभावित होने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल या हृदय रोग है, उन्हें अपने स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करनी चाहिए। उम्र, पारिवारिक इतिहास, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधि की कमी भी हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।

