Health Alert: 40 साल से कम उम्र में ब्रेन स्ट्रोक के बढ़ते मामले, डॉक्टरों ने बताए तीन मुख्य कारण
आजकल ब्रेन स्ट्रोक सिर्फ़ बुज़ुर्गों को ही नहीं होता; 40 साल से कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग में खून का बहाव अचानक रुक जाता है या खून की कोई नस फट जाती है, जिससे दिमाग को नुकसान होता है। इससे दिमाग की कोशिकाओं को ज़रूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं।
स्ट्रोक के लक्षण अचानक दिखते हैं और अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो गंभीर हो सकते हैं। अचानक बोलने में दिक्कत, चेहरे या शरीर के किसी हिस्से में कमज़ोरी या सुन्नपन, तेज़ सिरदर्द, चक्कर आना और चलने या देखने में दिक्कत जैसे लक्षण स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए, इन संकेतों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। आइए इसके कारणों को जानें।
40 साल से कम उम्र में ब्रेन स्ट्रोक के क्या कारण हैं?
दिल्ली के GB पंत हॉस्पिटल में न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट के पूर्व डायरेक्टर डॉ. दलजीत सिंह बताते हैं कि कम उम्र में ब्रेन स्ट्रोक होने के कई कारण हो सकते हैं। सबसे आम कारण स्मोकिंग और ड्रग्स का इस्तेमाल हैं। सिगरेट या तंबाकू में मौजूद नुकसानदायक चीज़ें खून की नसों को नुकसान पहुंचाती हैं और खून के थक्के जमने का खतरा बढ़ाती हैं। कुछ लोग नशीली चीज़ों का भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे दिमाग की खून की नसों पर असर पड़ सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर, बहुत ज़्यादा स्ट्रेस, खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी डाइट से भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। कम उम्र में अचानक इसके लक्षण दिखते हैं, जैसे चेहरा लटकना, हाथ या पैर में कमज़ोरी, बोलने या समझने में दिक्कत, अचानक चक्कर आना और तेज़ सिरदर्द। इन लक्षणों को तुरंत पहचानना और समय पर इलाज करवाना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि जल्दी इलाज से स्थिति को संभालने में मदद मिल सकती है।
स्ट्रोक कितने तरह के होते हैं?
अमृतसर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सलिल उप्पल बताते हैं कि ब्रेन स्ट्रोक मुख्य रूप से तीन तरह के होते हैं। पहला इस्केमिक स्ट्रोक है, जिसे सबसे आम माना जाता है। यह तब होता है जब दिमाग की खून की नस में खून का थक्का बन जाता है, जिससे खून का बहाव रुक जाता है। दूसरा है हेमरेजिक स्ट्रोक, जिसमें दिमाग की खून की नस फट जाती है और खून बहने लगता है। यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है और इसके लिए तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है। तीसरा टाइप है ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक, जिसे मिनी-स्ट्रोक भी कहते हैं। इस कंडीशन में, ब्रेन में ब्लड फ्लो कुछ समय के लिए रुक जाता है, लेकिन बाद में नॉर्मल हो जाता है। हालांकि, यह भविष्य में किसी बड़े स्ट्रोक का संकेत भी हो सकता है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
स्ट्रोक का खतरा किसे ज़्यादा होता है?
कुछ लोगों को दूसरों की तुलना में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा ज़्यादा हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाती हैं। बहुत ज़्यादा स्ट्रेस, लंबे समय तक फिजिकल एक्टिविटी न करना और अनहेल्दी खाने की आदतें भी इस खतरे को बढ़ा सकती हैं। जिन लोगों की फैमिली हिस्ट्री में स्ट्रोक रहा है, उन्हें भी इसका खतरा ज़्यादा हो सकता है। इसलिए, ऐसे लोगों को अपनी हेल्थ पर खास ध्यान देने की ज़रूरत है।
ब्रेन स्ट्रोक से कैसे बचें
ब्रेन स्ट्रोक से बचने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना ज़रूरी है। सबसे पहले, आपको स्मोकिंग और ड्रग्स से दूर रहना चाहिए। रेगुलर एक्सरसाइज, बैलेंस्ड और न्यूट्रिशियस डाइट और वज़न कंट्रोल रखना भी फायदेमंद है। इसके अलावा, रेगुलर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल चेकअप कराने की सलाह दी जाती है। पूरी नींद लेना और स्ट्रेस कम करना भी ज़रूरी है। अगर आपको स्ट्रोक के कोई भी लक्षण महसूस हों, तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। समय पर सावधानी बरतने से इस गंभीर बीमारी का खतरा काफी कम हो सकता है।

